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उत्सवों का केंद्र बना गंगा किनारा
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Fri, 29 May 2015 02:26 AM IST
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गंगा दशहरा पर गुरुवार को पतित पावनी गंगा का तट कहीं स्नान-दान, अनुष्ठान तो कहीं उत्सव का केंद्र बना रहा। पुण्य की डुबकी लगाने के लिए भोर में ही देश के कोने-कोने से भक्तों की भीड़ घाटों पर लग गई। सीढ़ियों से लेकर लहरों पर दीपमालाएं इतराईं तो कामनाओं से भरे श्रद्धालुओं ने सीढ़ियों पर हल्दी-चंदन के टीके लगाकर प्रार्थना की। शाम को चंवर डुलाती देव कन्याओं की मौजूदगी में दशाश्वमेध घाट पर गंगा की महाआरती की छटा निहारने के लिए सात किनारे के भवनों, मंदिरों की छतों, सीढ़ियों से लेकर नावों तक खचाखच सैलाब उमड़ पड़ा।
मान्यता है कि गंगा दशहरा पर गंगा स्नान से जाने अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिल जाती है। ऐसे में सनातनी परंपरा से जुड़े लोगों ने पत्नी, बच्चों के साथ गंगा घाटों का रुख किया। बसों, ट्रेनों के अलावा निजी वाहनों से भी लोग काशी में गंगा स्नान के लिए पहुंचे। अस्सी घाट पर बांस-बल्ली से बने सुरक्षा घेरे के भीतर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। हालांकि रीवा-गंगा महल घाटों पर सिल्ट सफाई के लिए खुदाई होने की वजह से वहां कम लोग डुबकी लगाने के लिए उतरे लेकिन तुलसी घाट पर स्नानार्थियों ने जमकर डुबकी लगाई।
दशाश्वमेध घाट पर स्नान के बाद महिलाएं समूहों में गंगा की आराधना के गीत गाती रहीं। दीपों की लड़ियां सजाने के साथ ही आरती भी उतारी जा रही थी। गंगा की पूजा कर मनोरथ पूर्ति के लिए कामनाएं करने वालों की आस्था देखते बन रही थी। रामघाट पर पं. नारायण गुरु के संयोजन में गंगा आरती के बाद प्रदूषण मुक्ति की कामना को लेकर अभिषेक किया गया। सिंधिया घाट पर महर्षि महेश योगी आश्रम के बटुकों ने रुद्राभिषेक के बाद गंगा आरती की। रमन श्रीवास्तव के संयोजन में आरती हुई।
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मान्यता है कि गंगा दशहरा पर गंगा स्नान से जाने अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिल जाती है। ऐसे में सनातनी परंपरा से जुड़े लोगों ने पत्नी, बच्चों के साथ गंगा घाटों का रुख किया। बसों, ट्रेनों के अलावा निजी वाहनों से भी लोग काशी में गंगा स्नान के लिए पहुंचे। अस्सी घाट पर बांस-बल्ली से बने सुरक्षा घेरे के भीतर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। हालांकि रीवा-गंगा महल घाटों पर सिल्ट सफाई के लिए खुदाई होने की वजह से वहां कम लोग डुबकी लगाने के लिए उतरे लेकिन तुलसी घाट पर स्नानार्थियों ने जमकर डुबकी लगाई।
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दशाश्वमेध घाट पर स्नान के बाद महिलाएं समूहों में गंगा की आराधना के गीत गाती रहीं। दीपों की लड़ियां सजाने के साथ ही आरती भी उतारी जा रही थी। गंगा की पूजा कर मनोरथ पूर्ति के लिए कामनाएं करने वालों की आस्था देखते बन रही थी। रामघाट पर पं. नारायण गुरु के संयोजन में गंगा आरती के बाद प्रदूषण मुक्ति की कामना को लेकर अभिषेक किया गया। सिंधिया घाट पर महर्षि महेश योगी आश्रम के बटुकों ने रुद्राभिषेक के बाद गंगा आरती की। रमन श्रीवास्तव के संयोजन में आरती हुई।
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