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सरेआम हो रही हर्बल उत्पादों के नाम पर धोखाधड़ी, आयुष मंत्रालय को लिखा गया पत्र

Mon, 16 Apr 2018 06:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 16 Apr 2018 06:22 PM IST
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fraud in daylight on the name of herbal products
प्राकृतिक या हर्बल के नाम पर तरह तरह के ब्रांडेड प्रोडक्ट्स आजकल बाजार में पटे पड़े हैं। ग्राहक प्रायः खुली आंखों से ऐसे सामान खरीदते समय सावाधानियां नहीं बरतते हैं। लिहाजा इसका नुकसान ग्राहक को उठाना पड़ता है। 
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 बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में विभाग स्तरीय गोष्ठी में शोध पत्र आदि पर चर्चा के बाद इसकी जानकारी दी गई। लिहाजा संकाय के रसशास्त्र और भैषज्य कल्पना विभाग के पूर्व अध्यक्ष ने इसकी शिकायत आयुष मंत्रालय से की है। इसके माध्यम से उन्होंने इन सभी सामानों की गुणवत्ता जांचने, बिक्री आदि के लिए एक नियम बनाने की मांग की है, जिससे कि ग्राहकों को कोई नुकसान न हो। 
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विभागीय गोष्ठी के बाद मंत्रालय को भेजे गए पत्र में प्रो. चौधरी ने बताया कि आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, हर्बल सौंदर्य प्रसाधनों से शहर और गांव का बाजार पूरी तरह से पट गया है। इसमें उन्होंने यह बताया है कि आजा बाजार में प्राकृतिक, हर्बल के नाम पर जितने भी सामान बेचे जा रहे हैं, उसमें रासायनिक सामानों का प्रयोग अधिक हो रहा है जबकि हर्बल और प्राकृतिक सामग्री दो से तीन प्रतिशत ही रहती है।
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जानी-मानी कंपनियां भले ही गुणवत्ता का दावा करती हो लेकिन आम जनता का इससे नुकसान हो रहा है। इन सामानों को बाजार में लाने से पहले किसी तरह की गुणवत्ता की जांच नहीं होती है।


इसके पीछे सरकार की ओर से नियम न तय हो पाना ही मुख्य वजह है। प्रो.चौधरी ने मंत्रालय से एक नियम बनाने की मांग की है, जिसके बाद इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके। 
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