UP: चार चिकित्सकों ने घायल का किया था चेकअप, CMO बोले- परिजनों का आरोप बेबुनियाद; युवक की मौत का मामला
Ballia News: बलिया में घायल के इलाज को लेकर विवाद गहरा गया है। सीएमओ ने कहा कि चार चिकित्सकों ने घायल का परीक्षण किया था और परिजनों के आरोप बेबुनियाद हैं। वहीं परिजनों ने चिकित्सकों के चेकअप का वीडियो सार्वजनिक करने की मांग करते हुए विभाग पर लापरवाह डॉक्टर को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर न्याय मांगने की बात कही।
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बलिया के जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में सड़क दुर्घटना में घायल अविनाश प्रजापति की मौत पर विवाद गहरा गया है। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। सीएमओ राय ने शुक्रवार को कहा कि अस्पताल के सीसी कैमरे की फुटेज की जांच की गई है।
फुटेज के अनुसार, घायल मरीज सुबह 8 बजकर 9 मिनट पर ई-रिक्शा से अस्पताल परिसर पहुंचा। 8 बजकर 16 मिनट पर इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अधिकारी संतोष सिंह को ट्रॉमा सेंटर की ओर जाते देखा गया।
संतोष सिंह ने अपने लिखित बयान में अविनाश को देखने और मृत होने की पुष्टि करने की बात कही। उन्होंने ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत मनोज कुमार को आगे की कार्रवाई के लिए समझाया था। मनोज कुमार ने भी अपने बयान में कहा कि उन्होंने और उनके रिलीवर रजनीश ने मरीज को देखा था। ऑन-कॉल कंसल्टेंट सर्जन अनिल सिंह ने भी मरीज की जांच की थी।
सीएमओ ने दावा किया कि कुल चार चिकित्सकों ने मरीज को देखा था। कहा कि मृत अवस्था में ट्रॉमा सेंटर लाया गया था अविनाश कुमार। उन्होंने चिकित्सकों के ड्यूटी पर न होने के आरोप को पूरी तरह निराधार बताया। डॉ मनोज कुमार ने अपने बयान में यह भी लिखा है कि ट्रॉमा सेंटर में तोड़फोड़ शुरू हो गई थी जिसमें उन्हें चोट भी आई है।
परिजनों ने वीडियो जारी करने की मांग की
मृतक अविनाश के छोटे भाई अमित प्रजापति ने सीएमओ के बयान को खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग लापरवाह चिकित्सकों को बचा रहा है। अमित ने कहा कि यदि किसी चिकित्सक ने समय पर जांच की होती तो हंगामा नहीं होता। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से चिकित्सक द्वारा चेकअप करने का वीडियो जारी करने की मांग की। अमित के अनुसार, वीडियो जारी होने से सच्चाई सामने आ जाएगी।
निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग
अमित प्रजापति ने बताया कि चिकित्सक द्वारा समय पर न देखने के कारण उनके भाई की दर्द से तड़पते हुए मौत हो गई। उन्होंने करीब 10 से 15 मिनट तक सीपीआर भी दिया था। अमित ने कहा कि परिवार में चिकित्सक और अधिवक्ता भी मौजूद थे, जिन्होंने स्थिति को शांत किया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलने की बात कही।