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बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह का गांवों में निरीक्षण, किसानों को आर्थिक आत्मनिर्भर बनने पर दिया जोर

Sat, 12 Sep 2020 02:52 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 12 Sep 2020 02:52 PM IST
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Former Vice Chancellor of BHU Prof. Punjab Singh inspects villages, insists farmers to become financially self-reliant
गांवों का किया निरीक्षण। - फोटो : अमर उजाला

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व कुलपति और फॉर्ड फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. पंजाब सिंह के नेतृत्व में शनिवार को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रायोजित बायोटेक किसान परियोजना के तहत वाराणसी के गांवों में निरीक्षण किया। इस उनके साथ कृषि वैज्ञानिकों व अधिकारियों की टीम भी शामिल थी।

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उन्होंने वाराणसी जिले के आठ गांवों भिखारीपुर, बंगालीपुर, चित्तापूर, जयापुर, जोगापुर, कचनार, विरभानपुर व कोर्री में परियोजना की प्रगति एवं निगरानी का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया।
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इसके अंतर्गत फार्ड फाउंडेशन, भारतीय सब्जी अनुसंधान केंद्र (वाराणसी), कृषि विज्ञान केंद्र, कल्लीपुर और एफपीओ जया एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में गांवों में परियोजना में लाभान्वित किसानों की फसलों का भौतिक सत्यापन के साथ उन्हें जागरूक किया गया।
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इस दौरान राजातालाब तहसील के बंगालीपुर गांव में बैठक हुई। इसमें प्रो. पंजाब सिंह ने कहा कि किसानों के चहुमुखी विकास के लिए कृषि को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों के स्वास्थ्य एवं उनके बच्चों की शिक्षा तथा अपने क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने पर बल दिया जाएगा। उन्होंने कृषक उत्पादक संगठनों  (एफपीओ) द्वारा किसानों का क्लस्टर बनाकर कृषि उत्पाद के निर्यात को बढ़ावा देने की बात कही।

प्रोफेसर सिंह ने कहा कि बीज शोधन में इच्छुक किसानों को देश के प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे उनकी आय में बृद्धि हो सके और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने फॉर्ड फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित फॉर्ड संवाद का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।

कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू, के पूर्व निदेशक प्रो. शिवराज सिंह ने कृषि में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर खेती करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश की आत्मा गांवों में बसती है। इसलिए गांव और किसान जब तक आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक देश का विकास नहीं होगा।

बीएचयू के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं बॉयोटेक किसान परियोजना के सह अन्वेषक डॉ संतोष कुमार सिंह ने औषधीय पौधों व उसकी उपयोगिता के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गांव ही ऐसा जरिया है जो रोजगार का माध्यम बन सकता है। इसलिए किसानों को सशक्त होने की जरूरत है।


आईआईवीआर के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ नीरज सिंह ने संघटित एवं समूह खेती करने पर जोर दिया। इस अवसर पर किसानों को सहजन के पौधों का वितरण किया गया।

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के निदेशक डॉ. जगदीश सिंह, आईआईवीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एबी राय, कृषि वैज्ञानिक डॉ संजीत कुमार, बीएचयू के पीआरओ डॉ. राजेश सिंह, फॉर्ड फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ उमेश सिंह एवं दशरथ सिंह, राजेश्वरी रिसर्च फाउंडेशन के सचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, पशुपालन वैज्ञानिक डॉ ए के सिंह, परियोजना में कार्यरत यंग प्रोफेसनल्स आदर्श कुमार, तुशार कांत, मधुकर पटेल के साथ फार्ड फाउण्डेशन के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन फॉर्ड फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ. उमेश सिंह ने किया। 

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