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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले: प्रसादम में मिलावट बड़ा पाप, देश के हर मंदिर की हो सकती है यही कहानी

Sat, 21 Sep 2024 12:01 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Sat, 21 Sep 2024 12:01 PM IST
सार

बीएचयू में ‘भारतीय गाय, जैविक कृषि एवं पंचगव्य चिकित्सा’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन शनिवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ का प्रसाद मिला तो तिरुपति प्रकरण की याद आई।

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Former President Ram Nath Kovind inaugurated seminar program at BHU
BHU में पूर्व राष्ट्रपति ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि बाबा विश्वनाथ के प्रसादम में कितना क्या है, मैं उस पर जाना नहीं चाहता, लेकिन ये देश के हर मंदिर की कहानी हो सकती है। हर तीर्थ स्थल में ऐसी घटिया मिलावट हो सकती है। ये जो मिलावट है, इसे हिंदू शास्त्रों में बहुत बड़ा पाप कहा गया है। ये विचारणीय विषय है।

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वे शनिवार को बीएचयू में ‘भारतीय गाय, जैविक कृषि एवं पंचगव्य चिकित्सा’ की थीम पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ का प्रसादम देखकर तिरुपति तिरुमाला प्रसादम प्रकरण की याद आ गई। रात में प्रसाद सामने था तो तुरंत वो बात मेरे मन में खटकी।
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बाबा विश्वनाथ के प्रसादम में आज भी कितनी श्रद्धा है। हमारी श्रद्धा और विश्वास देवी-देवताओं पर बनी रहे। दूसरे धर्मों को मानने वाले हैं, उनके भी तीर्थ स्थल होते हैं। वहां पर भी यही चीजें मिलती हैं। इस समस्या के समाधान का आग्रह करूंगा। मैं उस पर जाना नहीं चाहता हूं, लेकिन ये देश के हर मंदिर की कहानी हो सकती है।
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कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि तिरुपति तिरुमाला प्रसादम को लेकर चिंताजनक खबर आ रही है। राजनीतिक मसले पर बात नहीं कर रहा। हिंदुओं में एक श्रद्धा होती है, उसमें कुछ शंका उत्पन्न हो जाती है। कोविंद ने कहा, मुझे इस दौरे में बाबा विश्वनाथ के दर्शन का सौभाग्य नहीं मिल सका। लेकिन, मैंने कान पकड़कर क्षमा मांग ली है। तय किया है कि अगली बार जब वाराणसी आऊंगा तो दर्शन जरूर करूंगा।



100 रुपये के लिए ऐसा न करें कि बाद इलाज में 200 खर्च हों
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि आज हम 100 रुपये के लिए ऐसा काम न करें, जिसके इलाज में 200 रुपये खर्च करना पड़े। हमने अपने युवावस्था में कैंसर का नाम नही सुना था। आज हम जिस परिस्थिति में है, उसके पीछे वजह ये है कि हमने अपनी संस्कृति की उपेक्षा की। कुछ किसान सोचते हैं कि वे अपनी खुद की खपत के लिए अपनी फसल में केमिकल का इस्तेमाल नहीं करेंगे, लेकिन मंडी में बेचने वाली फसलों में केमिकल डालेंगे। जिससे लाभ बढ़ेगा। ये सोच ठीक नहीं है।



अब गाय खोज रही कचरे में अपना भोजन
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भोजन की तलाश में गोमाता कचरे के ढेर में चरते देखी जाती हैं। आखिर, हम इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में कैसे पहुंचे। पिछले कुछ दशकों में देखा कि गोमय और गोमूत्र की जगह पर पश्चिमी देशों के रसायनों का इस्तेमाल हुआ। इससे गोवंश में कमी आने लगी। हमने खेती की उत्पादकता तो बढ़ा ली, लेकिन अब हम इसकी कीमत चुका रहे हैं। इतिहास में हजार साल खेती करके अपनी जरूरतों को हमने पूरा किया था, लेकिन अब चंद वर्षों में हमारे खेत अपनी प्राकृतिक उर्वरता खोते जा रहे हैं।


इस बगिया में आना गर्व की बात है
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि मधुर मनोहर अतीव सुंदर सर्व विद्या की राजधानी में आप सबके बीच आना गर्व की बात है। मालवीय जी की पहचान आदर्श पुरुष के रूप में है। उन्होंने अकेले दम पर पूरे देश में भ्रमण करके भिक्षा ग्रहण कर दान की याचना की। अब कोई भी ऐसी कल्पना नहीं कर सकता।

जीवन के हर पहलू में गोवंश का योगदान
उन्होंने कहा कि जीवन के हर पहलू में गोवंश का योगदान रहा है। दूध, गोबर, गोमूत्र, घी ये सब कुछ इलाज और रोजमर्रा में काम आते हैं। गोवंश में लोगों की रुचि भी खत्म होती जा रही है। हमारे दुखद अवस्था में आने की वजह कृषि में वैज्ञानिक सोच का घटना है। किसी वैज्ञानिक का बाहरी दुनिया पर क्या प्रभाव होता है उसका हम आकलन नहीं करते।

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