पूर्व महंत ने काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन पर लगाया मनमानी का आरोप, कहा- मंदिर प्रशासन ने 27 सदस्यों का धाम में रोका प्रवेश
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती पर विवाद से महंत परिवार के मुखिया डॉ. कुलपति तिवारी आहत हैं। सोशल मीडिया पर लिखी गई पोस्ट में मंदिर प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा है कि मुझे इस तरह के अपमानित जीवन से घृणा हो गई है।
डॉ. तिवारी ने आगे लिखा है कि मेरे पूर्वजों ने बाबा विश्वनाथ के शिवलिंग की सुरक्षा और स्थापना नहीं की होती तो इतना दुख मुझे नहीं होता। 37 साल से अधिकारियों ने अपमान ही किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की गुहार भी लगाई है।
डॉ. तिवारी ने लिखा है कि मंदिर प्रशासन ने 1669 से चली आ रही सप्तर्षि आरती की परंपरा तोड़ी। मंदिर के अधिकारियों ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन करते हुए जता दिया कि सरकार के बनाए गए अधिनियम उनके लिए कोई मायने नहीं रखते हैं। सुप्रीम कोर्ट के 1997 के फैसले को भी मंदिर प्रशासन ने दरकिनार कर दिया। वर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने महंत परिवार के 27 लोगों का प्रवेश काशी विश्वनाथ धाम में हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया।
मंदिर प्रशासन ने नहीं दिया है कोई लिखित आदेश
पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी का कहना है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से सप्तऋषि आरती पर लगातार जनता में भ्रम फैलाया जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने महंत परिवार पर तमाम आरोप लगाए, लेकिन कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हो सका। जांच प्रक्रिया में महंत परिवार का कोई पक्ष नहीं लिया गया। सप्तर्षि आरती में शामिल होने के लिए महंत परिवार को मंदिर प्रशासन की ओर से कोई लिखित आदेश नहीं भेजा गया है। उधर, राकेश भूषण तिवारी ने कहा कि वैशाख के एक पक्ष में बाबा की सप्तर्षि आरती की परंपरा वैदिक रीति से न होना चिंता का विषय है।