बाढ़ परियोजनाएं: अपनों ने ही घेरा प्रदेश सरकार को, भाजपा के पूर्व सांसद ने लूट-खसोट का लगाया आरोप
भाजपा के पूर्व सांसद भरत सिंह ने कहा, कटान रोकने के लिए 200 करोड़ आए, जमकर लूटखसोट हुई। वहीं पूर्व भाजपा विधायक ने कहा, बाढ़ रोकने को 133 करोड़ खर्च भी हो गए, कटान भी नहीं रुकी।
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यूपी के बलिया में बाढ़ राहत परियोजनाओं के समय पर पूरा न होने से शासन और प्रशासन ग्रामीणों के निशाने पर था ही, अब अपनों ने भी इनमें लूट-खसोट के आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को भाजपा के पूर्व सांसद भरत सिंह और पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह इसे लेकर अधिकारियों और सत्ताधारी नेताओं को घेरते नजर आए।
भाजपा के पूर्व सांसद भरत सिंह ने कहा कि बाढ़ और कटानरोधी कार्य के लिए 200 करोड़ रुपये आए। इसमें बड़े पैमाने पर लूट खसोट हुई है। जिससे जनता को बाढ़ से राहत नहीं मिली। उन्होंने पिछले चार वर्षों में हुए बाढ़ और कटानरोधी कार्यों की जांच की मांग की। कहा कि जो भी दोषी हों उनसे रिकवरी की जाए। एनएच-31 के लिए भी आए धन में जमकर लूटपाट हुई है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
मंगलवार को बैरिया डाक बंगले में भरत सिंह ने कहा कि 200 करोड़ रुपये के कार्यों का लाभ नहीं दिख रहा है। प्राकृतिक आपदा से निजात के लिए ही सरकार योजना बनाकर धन भेजती है। कहा कि मेरे कार्यकाल में भी गंगा मझौवां को काट रही थी, मझौवां बचा की नहीं, जो कार्य होता है उसका रिजल्ट सामने आना चाहिए। एनएच और बाढ़ कटान में भ्रष्टाचार का समय पर सटीक जवाब देंगे। समय का इंतजार करें। यह पूछने पर कि क्या आप विधानसभा चुनाव में आ रहे हैं? कहा कि पार्टी का कार्यकर्ता हूं। संगठन और शीर्ष नेतृत्व को निर्णय करना है।
एनएच नहीं, बलिया को बाढ़-कटान से मुक्ति चाहिए
भाजपा के पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह सोमवार शाम कटान पीड़ितों का हाल जानने दुबे छपरा पहुंचे। फल, बिस्किट और ब्रेड का वितरण किया। पूर्व विधायक ने कहा कि बलिया की जनता को नेशनल हाईवे नहीं बाढ़ और कटान से निजात चाहिए। कुछ जनप्रतिनिधि समाचार पत्रों में कभी नेशनल हाईवे तो कभी ग्रीनफील्ड-वे का राग अलापते रहते हैं। जनपद की मूल समस्या बाढ़ और कटान है। ईमानदारी से काम हुआ होता तो आज यह नौबत नहीं आती। सरकार से पूछा कि क्या कारण है कि गीता प्रेस का बनवाया रिंग बंधा पूरे दुबेछपरा का सुरक्षा कर रहा था। जब से इस बंधे पर सिंचाई विभाग कार्य कराने लगा, तब से 133 करोड़ खर्च भी हो गए और गांव भी नहीं बचे। अभी भी उद्योगपति बिड़ला का बनवाया बंधा टेंगरही से जयप्रकाश नगर तक बाढ़ से सुरक्षा कर रहा है। अब कोई उद्योगपति ऐसा कार्य नहीं कराता? सरकार उनसे पैसा लेकर अब स्वयं कार्य करा रही है।
विकास के धन में कमीशनखोरी
विकास के लिए धन ऊपर से नीचे आता है। फिर नीचे से ऊपर की तरफ कमीशन के रूप में चला जाता है। जो बचता है वो ठेकेदार का हो जाता है। ऐसे में कटान कैसे रुकेगी। गंगा का पानी बनारस में भी आता है। रामनगर किले में लड़ने के बाद उसकी धारा कमजोर हो जाती है। उसी प्रकार प्रयागराज में भी यमुना का पानी किले में लड़ने के बाद शिथिल हो जाता है। वहां कटान नहीं होती। वैसी व्यवस्था बलिया में क्यों नहीं की जाती। 133 करोड़ रुपए में बलिया से जयप्रकाश नगर तक पांच मीटर चौड़ा सरिया लगाकर गिट्टी-सीमेंट की ढलाई हो जाती और कटान से मुक्ति मिल जाती। द्वाबा की जनता को जागना होगा। आंदोलन छेड़ना होगा।