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काशी की इन गलियों में सजता है सात समंदर पार का बाजार

Sat, 13 Jan 2018 02:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 13 Jan 2018 02:02 PM IST
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Foreign market established in street of varanasi
खरीददारी करतीं व‌िदेशी युवत‌ियां - फोटो : अमर उजाला
अध्यात्म की नींव पर बसी काशी का तिलिस्म सात समंदर पार तक फैला हुआ है। गलियों से लेकर सड़कों तक विदेशी पर्यटकों का रेला लगा रहता है। चाहे नदेसर के कई सितारा होटल हों या फिर तंग गलियां, विदेशी मेहमान बनारसी की तस्वीर में चटख रंग बनकर घुल गए हैं।
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अलग संस्कृति, जुदा रहन सहन का तरीका और अलहदा जरूरतें। काशी की यही तो खूबी है, अपनापन का एहसास कराना इस शहर को बखूबी आता है। यहां घाट और उनकी गलियों में ऐसा बाजार भी है, जहां जाते ही कोरिया, जापान, थाईलैंड जैसे देशों के मार्केट सा एहसास होने लगता है।
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ऐसा बाजार जो विदेशी रंग में रचा बसा है। गली में बसा ये बाजार विदेशी पर्यटकों के लिए ही खासतौर पर सजता है। काशी की पारंपरिक तासीर को पक्के महाल और घाट किनारे के इलाके में महसूस किया जा सकता है। 
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विदेशी फैशन देसी टच के साथ

Foreign market established in street of varanasi
बनारस की ग‌ल‌ियों में ‌व‌िदेशी बाजार - फोटो : अमर उजाला
यहां आने वाले विदेशी सैलानी भी बनारस को जानने-समझने के लिए यहीं आते हैं। ऐसे में काशी का ये विदेशी बाजार भी पक्के महाल की इन्हीं गलियों में सजता है। पतली तंग गलियों में ये बाजार कब से सज रहा है, कोई ठीक से नहीं बता पाता लेकिन यहां की कई दुकानें 30 से 40 साल से सज रही हैं।

चौसट्टी घाट से गलियों में गुजरना शुरू करिए तो एक करीने से कपड़ों, विदेशी फैशन, खानपान से लेकर रेस्टोरेंट व कैफे आपको नजर आ जाएंगे, जहां विदेशी पर्यटक खरीदारी करते, खाते पीते, गाते बजाते भी दिख जाएंगे।

विदेशी फैशन इन गलियों में खूब दिखता है लेकिन वो देसी टच लिए होता है। चाय की गुमटी जितनी दुकानों पर शर्ट, टी-शर्ट, स्कर्ट से लेकर स्टोल तक विदेशियों के लिए खास टंगे मिल जाएंगे।

खासियत यही होती है कि ये कपड़े फैशनेबल तो होते हैं लेकिन देसी टच होता है। चूंकि काशी के आध्यात्म का असर विदेशियों पर खूब पड़ता है, इसलिए वो यहां पारंपरिक पहनावे और खानपान को दिल से कुबूल करते हैं। 

दुकानों के नाम कोरियाई, जापानी भाषा में लिखे

Foreign market established in street of varanasi
गली में सजी दुकान - फोटो : अमर उजाला
दुकानदार उदय कुमार गुप्ता बताते हैं कि मंत्र, ऊं, स्वास्तिक प्रिंट वाले शर्ट, टी-शर्ट, स्टोल इन्हें खास तौर पर आकर्षित करते हैं। जूट खादी के बैग भी विदेशियों को खूब आकर्षित करते हैं। इसलिए इनकी भी दुकानें यहां खूब सजी मिलती हैं। शिवा हैंडीक्राफ्ट्स, राजकुमार हैंडीक्राफ्ट्स जैसी दुकानें उनकी जरूरत का खास ध्यान रखते हैं।

विदेशियों को बनारसी खानपान भी खूब भाता है, ऐसे में इन गलियों में आपको चाट गोलगप्पे, कचौड़ी, जलेबी के साथ दक्षिण भारतीय खानपान की दुकानों पर विदेशियों की भीड़ उमड़ती है लेकिन इससे इतर जापानी, कॉटीनेंटल, कोरियन और चाइनीज रेस्टोरेंट व कैफे की भरमार है।

इस बाजार की एक और खूबी है। यहां जितनी भी दुकानें हैं, सभी के नाम हिंदी में भले न लिखे हों, कोरियाई, जापानी भाषा में जरूर लिखे हैं। दरअसल पूरा मार्केट ही विदेशियों के लिए है, इसलिए उनकी सहूलियत का खास ध्यान रखा जाता है। 
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