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संस्कृत विवि में दम तोड़ रही विदेशी भाषा की पढ़ाई 

Thu, 19 Jan 2017 01:49 PM IST
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 19 Jan 2017 01:49 PM IST
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Foreign language studies died in Sanskrit University
sampurnanand university - फोटो : अमर उजाला
सांस्कृतिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध काशी के प्रति विदेशी पयर्टकों का आकर्षण भले ही अधिक हो लेकिन यहां चलने वाले विदेशी भाषा की पढ़ाई का बुरा हाल है। प्राचीनतम शिक्षण केंद्र संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कहने को तो विदेशी भाषा की पढ़ाई होती है लेकिन वह भी दम तोड़ रही है।
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इसके पीछे व्यवस्थागत कमियां मुख्य वजह है। हालत यह है कि पांच साल पहले जहां जापानी-चीनी भाषा की पढ़ाई बंद हो गई वहीं इस समय बची पांच में से फ्रेंच को छोड़ बाकी की स्थिति ठीक नहीं है।
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विश्वविद्यालय में आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय के तहत करीब बीस साल पहले जापानी, चीनी, फ्रेंच, जर्मन, रूसी, तिब्बती, अग्रेंजी और नेपाली भाषा की पढ़ाई शुरू हुई थी। इसमें दो साल का स्नातक और एक साल का एडवांस डिप्लोमा कोर्स है।
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फ्रेंच के अलावा किसी भी भाषा में नियमित शिक्षक नहीं हैं। जैसे-तैसे संविदा शिक्षकों को रखकर पढ़ाई करवाई जा रही है लेकिन नियमित भुगतान न होने से वह भी यहां आने में कतराते हैं। इसके लिए एक अलग विभाग भी बनाया गया है। 

क्लास चलने की बात करें तो लंबे समय से मुख्य भवन में क्लास चलती थी लेकिन भवन की मरम्मत चलने से फिलहाल क्लास चलाने में भी दिक्कत हो रही है। पहले विभाग में नियमित शिक्षक भी थे लेकिन करीब दस साल से अधिक समय से नियमित शिक्षकों के रिटायर होने के बाद उनकी जगह किसी की नियमित नियुक्ति नहीं हुई।
 

फ्रेंच में रोजगार की संभावनाएं अधिक 

Foreign language studies died in Sanskrit University
foreign language - फोटो : फाइल फोटो
विश्वविद्यालय के विदेशी भाषाओं में प्रवेश लेने वालों का ग्राफ गिरता जा रहा है। पिछले तीन साल की बात करें तो फ्रेंच में हर साल निर्धारित 60 सीट के सापेक्ष करीब कभी 250 तो कभी 300 आवेदन आए लेकिन बाकी में तो आधी सीट भी नहीं भर पा रही है।

इस बार फ्रेंच में भी 54 ने ही आवेदन किया जबकि रुसी और नेपाल में तो दहाई का आंकड़ा भी नहीं पहुंच पाया। जर्मन और तिब्बती में 21 ही आवेदन आए। 

अन्य विदेशी भाषाओं की तुलना में फ्रेंच मौजूदा समय में अंग्रेजी के बाद सबसे लोकप्रिय भाषा है। इसमें रोजगार की संभावनाएं भी अधिक है। अंग्रेजी के जानकार इसे बेहद सरलता से सीख सकते हैं क्योंकि यह अंग्रेजी से काफी मिलती जुलती भाषा है।

शायद यही वजह है कि इसके प्रति युवाओं का रुझान अधिक हैं। विदेशी पयर्टकों को हिंदी के मुकाबले अंग्रेजी में बातचीत में कोई असुविधा नहीं होती है। इसलिए इस भाषा में डिप्लोमा करने के बाद युवाओं को तत्काल गाइड के रुप में रोजगार मिलना आसान होता है। 

आधुनिक भाषा एवं भाषा विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो.विनीता सिंह फ्रेंच में हर साल सीट से चार-पांच गुना अधिक आवेदन आते थे लेकिन बाकी विषयों में कम आवेदन आ रहे हैं। इस बार आनलाइन आवेदन की व्यवस्था थी, कम आवेदन आने का यह भी एक मुख्य वजह है।

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