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काशी में देवदीपावली: होटलों-धर्मशालाओं में जगह पक्की करने में जुटे हैं सात समंदर पार के सैलानी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 11 Oct 2017 10:57 AM IST
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देवदीपावली की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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मेले-उत्सवों के रंग परंपराओं की नगरी काशी के शृंगार हैं। रथयात्रा के बाद नाटी इमली का भरत मिलाप, चेतगंज की नक्कटैया और तुलसी घाट की नाग नथैया भक्ति भाव पर आधारित काशी के लक्खा मेले के रूप में विख्यात हैं।
इसी कड़ी में पिछले एक दशक में प्राचीन नगरी के सबसे बड़े दीपोत्सव देवदीपावली ने भी अब पांचवें लक्खा मेले का रूप ले लिया है। देवदीपावली अब विश्व समुदाय के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। इस बार भी सात समंदर पार से हजारों की तादाद में सैलानी इस दीपोत्सव के साक्षी बनेंगे।
देव दीपावली निहारने के लिए दुनिया के कोने-कोने से विदेशी सैलानी काशी पहुंचेंगे। इसके लिए होटलों, धर्मशालाओं में जगह पक्की की जा रही है।
देव दीपावली कार्तिक में मास पर्यंत चलने वाले उत्सवों का चरमोत्कर्ष है।
जब गंगा के घाटों से लेकर कुंडों, सरोवरों और पेड़ों पर तक दीपमालाओं की लड़ियां जगमगा उठती हैं। देव दीपावली भी काशी के अन्य पर्व-त्योहारों की तरह संदेशपरक महोत्सव के रूप में विख्यात हो चला है।
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विश्व सुंदरी पुल के पास मदरवा, सामने घाट से लेकर गंगा-वरुणा संगम (सराय मोहाना) तक घाट-घाट पर लोगों के सपने दीयों में सजेंगे। कहीं पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का संदेश होगा तो कहीं डिजिटल इंडिया और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दीपमालाओं में उकेरा जाएगा।
आतंकवाद के अलावा देवी-देवताओं, राष्ट्रीय परिदृश्यों पर आधारित दीपों की अल्पनाएं यादगार बनेंगी। 100 से अधिक घाटों पर दीपदान होगा।
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इसी कड़ी में पिछले एक दशक में प्राचीन नगरी के सबसे बड़े दीपोत्सव देवदीपावली ने भी अब पांचवें लक्खा मेले का रूप ले लिया है। देवदीपावली अब विश्व समुदाय के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। इस बार भी सात समंदर पार से हजारों की तादाद में सैलानी इस दीपोत्सव के साक्षी बनेंगे।
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देव दीपावली निहारने के लिए दुनिया के कोने-कोने से विदेशी सैलानी काशी पहुंचेंगे। इसके लिए होटलों, धर्मशालाओं में जगह पक्की की जा रही है।
देव दीपावली कार्तिक में मास पर्यंत चलने वाले उत्सवों का चरमोत्कर्ष है।
जब गंगा के घाटों से लेकर कुंडों, सरोवरों और पेड़ों पर तक दीपमालाओं की लड़ियां जगमगा उठती हैं। देव दीपावली भी काशी के अन्य पर्व-त्योहारों की तरह संदेशपरक महोत्सव के रूप में विख्यात हो चला है।
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विश्व सुंदरी पुल के पास मदरवा, सामने घाट से लेकर गंगा-वरुणा संगम (सराय मोहाना) तक घाट-घाट पर लोगों के सपने दीयों में सजेंगे। कहीं पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का संदेश होगा तो कहीं डिजिटल इंडिया और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दीपमालाओं में उकेरा जाएगा।
आतंकवाद के अलावा देवी-देवताओं, राष्ट्रीय परिदृश्यों पर आधारित दीपों की अल्पनाएं यादगार बनेंगी। 100 से अधिक घाटों पर दीपदान होगा।
दशाश्वमेध घाट पर बनाई जाएगी इंडिया गेट की रिप्लिका
दीवाली
- फोटो : amar ujala
केंद्रीय देव दीपावली महासमिति के अध्यक्ष पं. वागीश दत्त मिश्र बताते हैं कि इस बार गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इस वजह से घाटों की सफाई में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जल्द ही घाट समितियों की बैठक कर दीपदान की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पंचगंगा घाट पर रानी अहिल्याबाई के हजारा स्तंभ के साथ ही पांच हजारा स्तंभ प्रज्ज्वलित होगा। मानसरोवर घाट पर दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं की ओर से फूलों, रंगों की रंगोली बनाकर दीप जलाए जाएंगे।
दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की ओर इंडिया गेट की रिप्लिका बनाई जाएगी। जिस पर अमर जवान ज्योति जलाई जाएगी। इसमें शौर्य धुन के साथ सेना के आला अफसर पुष्प गुच्छ अर्पित करेंगे।