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पितरों की शांति के लिए कुंड से लेकर घाट तक किया तर्पण
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पितृपक्ष की तृतीया पर पिशाचमोचन पर श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा रही। कुंड से लेकर गंगा के तट तक श्राद्ध के लिए देश के कई राज्यों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है। सुबह से लेकर रात तक पिशाचमोचन का क्षेत्र श्रद्धालुओं के कारण गुलजार हो गया है। यजमानों की आवाजाही बढ़ने से तीर्थ-पुराहितों की गद्दी गुलजार हो गई है।
बृहस्पतिवार को दोपहर में श्राद्ध का सर्वोत्तम समय होने के कारण पिशाचमोन की सभी गद्दियों पर यजमानाें ने अपने पितरों का त्रिपिंडी श्राद्ध किया और उनसे आशीर्वाद लिया। यजमानों की संख्या में बढ़ोतरी होने से आसपास के दुकानदार भी खुश हैं। तीर्थ पुरोहित राजेश मिश्रा ने बताया कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत त्रिपिंडी श्राद्ध कराया जा रहा है। हम लोग यजमानों से अपील कर रहे हैं कि वह भी सोशल डिस्टेंस का पालन करें और मास्क लगाकर ही बाहर निकलें। कुंड पर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात समेत पूर्वांचल के आसपास के जिलों से भी लोग अपने पितरों का त्रिपिंडी श्राद्ध करने पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
तुलसी, पीपल, बरगद, अशोक और बिल्व पत्र लगाने से प्रसन्न होते हैं पितर
वाराणसी। पितृपक्ष में तुलसी, पीपल, बरगद, अशोक और बिल्व पत्र के पौधे लगाने से पितरों की आत्मा को तृप्ति और मुक्ति मिलती है। पीपल में देवी- देवताओं के साथ पितरों का भी वास होता है, इस पेड़ में पानी के साथ दूध और तिल मिलाकर चढ़ाने से पितर भी तृप्त होते हैं।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पीपल का पेड़ खासतौर से लगाना चाहिए। इसके साथ बरगद, नीम, अशोक, बिल्वपत्र, तुलसी, आंवला और शमी का पेड़ लगाने से पर्यावरण को साफ रखने में तो मदद होगी ही, पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होंगे।
पेड़-पौधे लगाने का फल
बरगद- ये पौधा लगाने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। इसमें जल देने से व्यक्ति दीर्घायु होता है। यह मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। बरगद को साक्षी मानकर माता सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था।
अशोक- इसे लगाने से पितृ प्रसन्न होते हैं, रोग व शोक का नाश होता है। पितरों को तृप्ति व मुक्ति मिलती है। यह पौधा घर के द्वार के पास लगाना चाहिए।
पीपल- पीपल में देवता और पितरों का वास होता है। इसका पौधा लगाकर जल देने पर पितरों को वह जल पहुंचता है। इस वृक्ष पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी का आधिपत्य है।
बिल्व पत्र-इसका पौधा लगाने से शिव के साथ पितरों की भी कृपा प्राप्त होती है। पितरों का संबंध शिव और विष्णु लोक से जुड़ा है।
तुलसी-तुलसी लगाने और उसमें नियमित रूप से जल देने से भगवान विष्णु व पितृ प्रसन्न होते हैं। पिंडदान करते हैं, तब विष्णु की पूजा होती है। भगवान विष्णु ने ही गयासुर राक्षस का वध किया था।
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बृहस्पतिवार को दोपहर में श्राद्ध का सर्वोत्तम समय होने के कारण पिशाचमोन की सभी गद्दियों पर यजमानाें ने अपने पितरों का त्रिपिंडी श्राद्ध किया और उनसे आशीर्वाद लिया। यजमानों की संख्या में बढ़ोतरी होने से आसपास के दुकानदार भी खुश हैं। तीर्थ पुरोहित राजेश मिश्रा ने बताया कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत त्रिपिंडी श्राद्ध कराया जा रहा है। हम लोग यजमानों से अपील कर रहे हैं कि वह भी सोशल डिस्टेंस का पालन करें और मास्क लगाकर ही बाहर निकलें। कुंड पर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात समेत पूर्वांचल के आसपास के जिलों से भी लोग अपने पितरों का त्रिपिंडी श्राद्ध करने पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
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तुलसी, पीपल, बरगद, अशोक और बिल्व पत्र लगाने से प्रसन्न होते हैं पितर
वाराणसी। पितृपक्ष में तुलसी, पीपल, बरगद, अशोक और बिल्व पत्र के पौधे लगाने से पितरों की आत्मा को तृप्ति और मुक्ति मिलती है। पीपल में देवी- देवताओं के साथ पितरों का भी वास होता है, इस पेड़ में पानी के साथ दूध और तिल मिलाकर चढ़ाने से पितर भी तृप्त होते हैं।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पीपल का पेड़ खासतौर से लगाना चाहिए। इसके साथ बरगद, नीम, अशोक, बिल्वपत्र, तुलसी, आंवला और शमी का पेड़ लगाने से पर्यावरण को साफ रखने में तो मदद होगी ही, पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होंगे।
पेड़-पौधे लगाने का फल
बरगद- ये पौधा लगाने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। इसमें जल देने से व्यक्ति दीर्घायु होता है। यह मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। बरगद को साक्षी मानकर माता सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था।
अशोक- इसे लगाने से पितृ प्रसन्न होते हैं, रोग व शोक का नाश होता है। पितरों को तृप्ति व मुक्ति मिलती है। यह पौधा घर के द्वार के पास लगाना चाहिए।
पीपल- पीपल में देवता और पितरों का वास होता है। इसका पौधा लगाकर जल देने पर पितरों को वह जल पहुंचता है। इस वृक्ष पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी का आधिपत्य है।
बिल्व पत्र-इसका पौधा लगाने से शिव के साथ पितरों की भी कृपा प्राप्त होती है। पितरों का संबंध शिव और विष्णु लोक से जुड़ा है।
तुलसी-तुलसी लगाने और उसमें नियमित रूप से जल देने से भगवान विष्णु व पितृ प्रसन्न होते हैं। पिंडदान करते हैं, तब विष्णु की पूजा होती है। भगवान विष्णु ने ही गयासुर राक्षस का वध किया था।