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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   For the first time, procession of Chitragupta decorated on 51 banks in Ganga, Aarti performed for 21 feet hig

Varanasi: पहली बार गंगा में 51 बजड़ों पर सजी चित्रगुप्त की शोभायात्रा,21 फीट ऊंची भगवान की प्रतिमा की हुई आरती

Thu, 16 Nov 2023 04:48 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 16 Nov 2023 04:48 PM IST
सार

बुधवार की शाम को महापूजनोत्सव की शुरुआत भगवान चित्रगुप्त महाराज की 21 फीट की ऊंची प्रतिमा के पूजन-अर्चन और महाआरती से हुई। मां गंगा की आरती उतारने के बाद एक-एक करके 51 बजड़ों ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट के लिए प्रस्थान किया।

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For the first time, procession of Chitragupta decorated on 51 banks in Ganga, Aarti performed for 21 feet hig
अस्सी घाट पर चित्रगुप्त जयंती के अवसर पर महाआरती करते बटुक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अस्सी का किनारा और मां गंगा की गोद...। 51 सजे-धजे बजड़ों पर सजीं झांकियां...। 21 फीट की भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा और गंगा आरती का विहंगम नजारा...। बुधवार को चित्रगुप्त जयंती पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से निकली श्री चित्रगुप्त महाराज की भव्य शोभायात्रा जन-जन के लिए अविस्मरणीय बन गई।

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बुधवार की शाम को महापूजनोत्सव की शुरुआत भगवान चित्रगुप्त महाराज की 21 फीट की ऊंची प्रतिमा के पूजन-अर्चन और महाआरती से हुई। मां गंगा की आरती उतारने के बाद एक-एक करके 51 बजड़ों ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट के लिए प्रस्थान किया। इस अवसर पर विश्व में पहली बार बुद्धि, विवेक और ज्ञान के प्रदाता व लेखनी के आराध्य देव भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज पर आधारित नाट्य का मंचन आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें गंगापुत्र भीष्म के ब्रह्मा जी के मानस पुत्र ऋषि पुलस्त्य से संवाद में भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की महिमा और पूजन का मंचन कलाकारों ने किया। इसके साथ शिव तांडव स्तोत्र, श्री राधा कृष्ण नृत्य नाट्य का मंचन भी हुआ। शोभायात्रा का घाटों पर समाज के लोगों व श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया। शोभायात्रा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर पहुंचने पर मुख्य अतिथि और महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति, भारत रत्न स्व. डाॅ. राजेंद्र प्रसाद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर नमन किया।
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भगवान चित्रगुप्त की भक्ति और शिक्षा को करें आत्मसात

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि व महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक महेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह आज हम सबका सौभाग्य है कि भगवान चित्रगुप्त की पूजा कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। भगवान चित्रगुप्त न्यायब्रह्म हैं। पुण्य और पाप के निष्पक्ष विचारक ही नहीं, फल निश्चित करने वाले शक्तिमान परमेश्वर हैं। वे सनातन धर्म के स्वरूप हैं। इस दौरान स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि हमारे कर्मों का लेखा जोखा केवल एक पौराणिक इकाई नहीं है, बल्कि एक गहन आदर्श है जो मानवीय अनुभव के साथ प्रतिध्वनित होता है। आत्म-चिंतन की भावना से, हम सबको भगवान चित्रगुप्त जी की भक्ति और शिक्षाओं को अपनाकर सत्य, निष्ठा, करुणापूर्ण जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।

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