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12 को अस्सी घाट पर सजेगी लोक संगीत महफिल
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sun, 08 Feb 2015 02:03 AM IST
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वाराणसी। सिल्ट हटने के बाद निखरे अस्सी घाट पर 12 फरवरी को ‘सोन चिरैया’ का कलरव होगा।शाम साढ़े छह बजे से सजने वाली महफिल में लोक संगीत की सतरंगी झलक दिखेगी। कोई आल्हा गाएगा तो कोई फाग सुनाएगा। बिरहा की तान भी सुनने को मिलेगी। लोक संगीत के संरक्षण में लगी संस्था सोन चिरैया की सचिव मालिनी अवस्थी, सनबीम स्कूल समूह के चेयरमैन दीपक मधोक एवं भारती मधोक ने शनिवार को अस्सी घाट पर संयुक्त प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। इस मौके पर स्कूलों में लोक संगीत का पाठ्यक्रम शुरू करने की मांग की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सोन चिरैया की बनारस में पहली प्रस्तुति में शेख इब्राहीम एवं साथी लुप्त प्राय लोक वाद्यों का वादन करेंगे। रमेश पाल एवं साथी पाई दंडा, आदिवासी लोकनृत्य कर्मा, पश्चिम बंगाल का नृत्य छऊ, गाजीपुर के कलाकार धोबिया नृत्य, बुंदेलखंड के लोक गायक फाग-राई की
प्रस्तुति करेंगे। भैरव सिंह चौहान और उनके साथ कबीर का निगुर्ण सुनाएंगे। सनबीम स्कूल के छात्र आल्हा सीख रहे हैं। वे बैसवारी शैली में आल्हा गायन करेंगे। आल्हा की प्रैक्टिस नौ तारीख से ही घाट पर शुरू हो जाएगी। इस मौके पर कलाकारों के हस्ताक्षर से एक मांग पत्र तैयार किया जाएगा, जिसमें स्कूली पाठ्यक्रम में लोक संगीत को शामिल कराने का मांग की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि सोन चिरैया की बनारस में पहली प्रस्तुति में शेख इब्राहीम एवं साथी लुप्त प्राय लोक वाद्यों का वादन करेंगे। रमेश पाल एवं साथी पाई दंडा, आदिवासी लोकनृत्य कर्मा, पश्चिम बंगाल का नृत्य छऊ, गाजीपुर के कलाकार धोबिया नृत्य, बुंदेलखंड के लोक गायक फाग-राई की
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प्रस्तुति करेंगे। भैरव सिंह चौहान और उनके साथ कबीर का निगुर्ण सुनाएंगे। सनबीम स्कूल के छात्र आल्हा सीख रहे हैं। वे बैसवारी शैली में आल्हा गायन करेंगे। आल्हा की प्रैक्टिस नौ तारीख से ही घाट पर शुरू हो जाएगी। इस मौके पर कलाकारों के हस्ताक्षर से एक मांग पत्र तैयार किया जाएगा, जिसमें स्कूली पाठ्यक्रम में लोक संगीत को शामिल कराने का मांग की जाएगी।
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