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संकट मोचन के दरबार में आस्था का सैलाब
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 23 Apr 2016 01:55 AM IST
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हनुमत ध्वजा यात्रा
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पवन के समान वेग वाले सनातन धर्मियों के आराध्य हनुमान जी के चरणों में हाजिरी लगाने के लिए शुक्रवार को जन सैलाब उमड़ पड़ा। घर-घर से पुरुष ध्वजा -पताका लेकर निकले, तो मनोरथ पूरे करने की कामना से महिलाओं ने आरती की थाल सजाई। आस्था के रंग में रंगा चहुंदिशि उत्सव पसर गया। गांव से शहर तक लोग एक भरोसे, एक आस-विश्वास के साथ संकट मोचन के दरबार पहुंचे। ध्वजा यात्राओं में कहीं राम दरबार सजा दिखा तो कहीं भगवान के स्वरूप रथों, बग्घियों पर सवार दर्शन देते नजर आए। हनुमान भक्तों के हृदय से उठतीं भक्ति भावना की हिलोरें गगनभेदी जयघोष के रूप में गूंज रही थीं। संकट मोचन भगवान की बैठकी की शृंगार झांकी के दर्शन के लिए सड़कों, गलियों से इस कदर भीड़ चली कि मंदिर परिसर में कहीं तिल रखने की जगह नहीं थी।
‘को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो’...। पौ फटने से पहले ही संत गोस्वामी तुलसी दास की इन पंक्तियों में गाई हुई संकट मोचन हनुमान की महिमा स्तुति के रूप में हर तरफ गूंजने लगी। सुबह पांच बजे महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र की मौजूदगी में हनुमान जी की बैठकी शृंगार की झांकी सजाकर आरती उतारी गई। काशी के वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ लोक मंगल की कामना से संकट मोचन का अभिषेक किया। इससे पहले दुखों से निकालने वाले संकट मोचन की झलक पाने के लिए लंबी कतार लग चुकी थी। सुबह सात बजे भिखारीपुर तिराहे से हनुमान ध्वजा यात्रा निकाली गई। एक बड़े रथ पर हनुमान जी की झांकी सजाकर भक्त निकले। इस ध्वजा यात्रा में काशी से लगे 50 किमी दूर तक के गांवों के अलावा अहमदाबाद, सूरत, मुंबई से भी आए भक्तों ने हिस्सा लिया। नेवादा, सुंदरपुर, नरिया से मालवीय प्रतिमा होते हुए शोभायात्रा दिन के करीब 10:15 बजे संकट मोचन पहुंची। इस यात्रा के साथ छोटी-बड़ी कई झांकियां थीं। मंदिर पहुंचने के बाद ध्वजा के साथ भक्तों ने परिक्रमा की। डमरूदल अलग नाद करते हुए फेरी लगा रहा था। मंदिर परिसर में जगह-जगह पूर्वांचल की विख्यात रामायण मंडलियां मानस की चौपाई को सुरों से सजा रही थीं, तो हर तरफ-सुंदरकांड का पाठ भी चल रहा था। इस शोभायात्रा में रामबलि मौर्या, त्रिभुवन मौर्य, तारकेश्वर नाथ कुशवाहा, अशोक गुप्ता, चंद्रभूषण वर्मा, छोटेलाल पटेल, अजय शर्मा, बब्लू सिंह, विनोद मौर्य, प्रदीप राय,कृष्णावतार मिश्र समेत तमाम लोग शामिल थे।
रथारूढ़ संकटमोचन के पीछे शुक्रवार की सुबह देवी-देवताओं का कारवां निकला। मौका था हनुमान जयंती पर क्षेत्रपालेश्वर मंदिर से निकलने वाली हनुमान ध्वजा की आखिरी प्रभातफेरी का। सड़कों पर लाल ध्वजाएं लिए भक्तों की कतार ही नजर आ रही थी। कहीं डांडिया नृत्य तो कहीं बर्फ की सिल्लियों में सजी देव विग्रहों की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी।
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दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ के सामने क्षेत्रपालेश्वर महादेव मंदिर से सुबह छह बजे शोभायात्रा निकाली गई। कौशल शर्मा, भरत सराफ, व्यास राम कुमार कपूरिया, राधेगोविंद केजरीवाल भक्तों को ध्वजा वितरित कर रहे थे। शोभायात्रा के आगे विश्वनाथ अग्रवाल मंगल ज्योति लिए चल रहे थे। हनुमान पताका के साथ 21 फुट ऊंचे हनुमान की झांकी देखते बन रही थी। बैंड बाजा के साथ दो सौ से अधिक बटुकों के हाथ में ध्वजा थी तो डमरु दल के साथ शिव तांडव नृत्य हो रहा था। 21 युवक-युवतियों के समूह डांडिया नृत्य से इस यात्रा को मोहक बना रहे थे। 501 महिलाएं आरती की थाल लेकर चल रही थीं। 11 सौ पताकाएं पुरुषों के हाथ में थीं। एक रथ पर संकट मोचन हनुमान की झांकी थी तो गणेश, शिव, हनुमान के विविध स्वरूपों की पालकी भी सजाई गई थी। गुरुधाम, रवींद्रपुरी, दुर्गाकुंड से त्रिदेव मंदिर के सामने जब शोभायात्रा पहुंची तब पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। भक्तों ने संकट मोचन के दरबार में पहुंचकर ध्वजा अर्पित की। इसके बाद राम दरबार की बैठकी लगी।इस शोभायात्रा में विश्वनाथ पोद्दार, सुरेश तुलस्यान, श्रीनारायण खेमका, कृष्णकुमार काबरा, प्रकाश जालान, मनीष लोहिया, पवन अग्रवाल, प्रेम मिश्र, मोहन रौनियार, अनिल सराफ, रमेश गोयल, रवि कानोडिया, श्याम लोहिया, निधिदेव अग्रवाल, ईशू अग्रवाल, अवधेश खेमका समेत तमाम लोग शामिल थे। रास्ते भर शर्बत, आइसक्रीम का वितरण किया जा रहा था।
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‘को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो’...। पौ फटने से पहले ही संत गोस्वामी तुलसी दास की इन पंक्तियों में गाई हुई संकट मोचन हनुमान की महिमा स्तुति के रूप में हर तरफ गूंजने लगी। सुबह पांच बजे महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र की मौजूदगी में हनुमान जी की बैठकी शृंगार की झांकी सजाकर आरती उतारी गई। काशी के वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ लोक मंगल की कामना से संकट मोचन का अभिषेक किया। इससे पहले दुखों से निकालने वाले संकट मोचन की झलक पाने के लिए लंबी कतार लग चुकी थी। सुबह सात बजे भिखारीपुर तिराहे से हनुमान ध्वजा यात्रा निकाली गई। एक बड़े रथ पर हनुमान जी की झांकी सजाकर भक्त निकले। इस ध्वजा यात्रा में काशी से लगे 50 किमी दूर तक के गांवों के अलावा अहमदाबाद, सूरत, मुंबई से भी आए भक्तों ने हिस्सा लिया। नेवादा, सुंदरपुर, नरिया से मालवीय प्रतिमा होते हुए शोभायात्रा दिन के करीब 10:15 बजे संकट मोचन पहुंची। इस यात्रा के साथ छोटी-बड़ी कई झांकियां थीं। मंदिर पहुंचने के बाद ध्वजा के साथ भक्तों ने परिक्रमा की। डमरूदल अलग नाद करते हुए फेरी लगा रहा था। मंदिर परिसर में जगह-जगह पूर्वांचल की विख्यात रामायण मंडलियां मानस की चौपाई को सुरों से सजा रही थीं, तो हर तरफ-सुंदरकांड का पाठ भी चल रहा था। इस शोभायात्रा में रामबलि मौर्या, त्रिभुवन मौर्य, तारकेश्वर नाथ कुशवाहा, अशोक गुप्ता, चंद्रभूषण वर्मा, छोटेलाल पटेल, अजय शर्मा, बब्लू सिंह, विनोद मौर्य, प्रदीप राय,कृष्णावतार मिश्र समेत तमाम लोग शामिल थे।
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रथारूढ़ संकटमोचन के पीछे शुक्रवार की सुबह देवी-देवताओं का कारवां निकला। मौका था हनुमान जयंती पर क्षेत्रपालेश्वर मंदिर से निकलने वाली हनुमान ध्वजा की आखिरी प्रभातफेरी का। सड़कों पर लाल ध्वजाएं लिए भक्तों की कतार ही नजर आ रही थी। कहीं डांडिया नृत्य तो कहीं बर्फ की सिल्लियों में सजी देव विग्रहों की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी।
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दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ के सामने क्षेत्रपालेश्वर महादेव मंदिर से सुबह छह बजे शोभायात्रा निकाली गई। कौशल शर्मा, भरत सराफ, व्यास राम कुमार कपूरिया, राधेगोविंद केजरीवाल भक्तों को ध्वजा वितरित कर रहे थे। शोभायात्रा के आगे विश्वनाथ अग्रवाल मंगल ज्योति लिए चल रहे थे। हनुमान पताका के साथ 21 फुट ऊंचे हनुमान की झांकी देखते बन रही थी। बैंड बाजा के साथ दो सौ से अधिक बटुकों के हाथ में ध्वजा थी तो डमरु दल के साथ शिव तांडव नृत्य हो रहा था। 21 युवक-युवतियों के समूह डांडिया नृत्य से इस यात्रा को मोहक बना रहे थे। 501 महिलाएं आरती की थाल लेकर चल रही थीं। 11 सौ पताकाएं पुरुषों के हाथ में थीं। एक रथ पर संकट मोचन हनुमान की झांकी थी तो गणेश, शिव, हनुमान के विविध स्वरूपों की पालकी भी सजाई गई थी। गुरुधाम, रवींद्रपुरी, दुर्गाकुंड से त्रिदेव मंदिर के सामने जब शोभायात्रा पहुंची तब पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। भक्तों ने संकट मोचन के दरबार में पहुंचकर ध्वजा अर्पित की। इसके बाद राम दरबार की बैठकी लगी।इस शोभायात्रा में विश्वनाथ पोद्दार, सुरेश तुलस्यान, श्रीनारायण खेमका, कृष्णकुमार काबरा, प्रकाश जालान, मनीष लोहिया, पवन अग्रवाल, प्रेम मिश्र, मोहन रौनियार, अनिल सराफ, रमेश गोयल, रवि कानोडिया, श्याम लोहिया, निधिदेव अग्रवाल, ईशू अग्रवाल, अवधेश खेमका समेत तमाम लोग शामिल थे। रास्ते भर शर्बत, आइसक्रीम का वितरण किया जा रहा था।