{"_id":"58ebdff64f1c1b874acf5e7b","slug":"five-day-shitla-music-festival-start-in-varanasi","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरों की कशिश के साथ पांच दिवसीय शीतला माता संगीत महोत्सव का आगाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुरों की कशिश के साथ पांच दिवसीय शीतला माता संगीत महोत्सव का आगाज
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 11 Apr 2017 01:11 AM IST
विज्ञापन
हजार दीपों और 21 किलो कपूर से हुई मां की महाआरती
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहनाई की गूंज और सुरों की कशिश के साथ सोमवार की देर रात पांच दिवसीय शीतला माता संगीत महोत्सव का जोरदार आगाज हुआ। भोजपुरी लोक गीतों, भजनों के साथ पूर्वी, छपरहिया की धुनों से पहली संगीत निशा गुलजार हुई।
मध्यरात्रि के बाद भव्य शृंगार के बाद मां की हजारा दीपक और 21 किलो कपूर से महाआरती की गई। देवी के दरबार में देर रात तक बधावा लेकर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
पंचामृत स्नान के बाद महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने गहनों से सुसज्जित मां शीतला की महाआरती की। आदि बुढ़िया की गुफा में देव विग्रहों की भी सविधि आरती की गई। इसके बाद गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में संगीत महोत्सव का शुभारंभ महेंद्र प्रसन्ना के शहनाई वादन से हुआ।
विज्ञापन
उन्होंने चैती की धुन बजाई- आइब माई के दुअरिया हो रामा... की प्रस्तुति पर लोग झूम उठे। इनके बाद सत्यम मिश्र ने तीन ताल में तबला वादन से बनारसबाज की शैली का एहसास कराया। बाल कलाकारों में अनन्या मिश्रा और विदुषी ने भी मां के दरबार में भजनों से हाजिरी लगाई।
इनके बाद भोजी नंबर-वन का ताज हासिल कर चुकीं सुमन अग्रहरि ने माइक संभाला। उन्होंने हम त मइया के हईं दीवानी....निमिया के डारि मइया डालेंली झुलनवां हो कि झूलि हो झूलि ना....। वीरेंद्र वीर ने भी भजन पेश किए।
विज्ञापन
मध्यरात्रि के बाद भव्य शृंगार के बाद मां की हजारा दीपक और 21 किलो कपूर से महाआरती की गई। देवी के दरबार में देर रात तक बधावा लेकर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
विज्ञापन
पंचामृत स्नान के बाद महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज ने गहनों से सुसज्जित मां शीतला की महाआरती की। आदि बुढ़िया की गुफा में देव विग्रहों की भी सविधि आरती की गई। इसके बाद गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में संगीत महोत्सव का शुभारंभ महेंद्र प्रसन्ना के शहनाई वादन से हुआ।
विज्ञापन
उन्होंने चैती की धुन बजाई- आइब माई के दुअरिया हो रामा... की प्रस्तुति पर लोग झूम उठे। इनके बाद सत्यम मिश्र ने तीन ताल में तबला वादन से बनारसबाज की शैली का एहसास कराया। बाल कलाकारों में अनन्या मिश्रा और विदुषी ने भी मां के दरबार में भजनों से हाजिरी लगाई।
इनके बाद भोजी नंबर-वन का ताज हासिल कर चुकीं सुमन अग्रहरि ने माइक संभाला। उन्होंने हम त मइया के हईं दीवानी....निमिया के डारि मइया डालेंली झुलनवां हो कि झूलि हो झूलि ना....। वीरेंद्र वीर ने भी भजन पेश किए।