पूर्वांचल की सबसे बड़ी पहड़िया सब्जी मंडी में सौंदर्यीकरण के नाम पर पांच करोड़ का घोटाला
वाराणसी की पहड़िया मंडी में काम कराये बिना ही बिलों की हेराफेरी कर पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हड़प ली गई। निर्माण घोटाले के खुलासे के बाद वाराणसी से लखनऊ तक हड़कंप मच गया है। मंडी परिषद के निदेशक ने इस मामले में लिप्त दो उप निदेशक मंडी, दो अवर अभियंता और लेखाधिकारी को निलंबित कर दिया। इसमें ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी वाराणसी को पत्र भेजा गया है।
वर्ष 2016 में पहड़िया मंडी के सौंदर्यीकरण के लिए 19 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया। इस दौरान मंडी निर्माण खंड के तत्कालीन उप निदेशक निर्माण आरके वर्मा, विमलेश मिश्रा, अवर अभियंता सुनीता व अखिलेश्वर लाल और लेखाधिकारी सिद्ध गोपाल कुरील ने ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर ली।
सीसी रोड के निर्माण में तय लागत से डेढ़ करोड़ रुपये ज्यादा का भुगतान किया गया। ऐसे ही मंडी परिसर में 2.66 लाख की टाइल्स लगाकर 34 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। सरिया उपयोग किए बिना ही 90 लाख रुपये का बंदरबाट कर लिया गया। ऐसे ही छोटे-छोटे सामन की खरीद के बहाने बिलों में हेराफेरी की गई।
दो लाख रुपये के तीन सोफे की खरीद दिखाई गई, जबकि बहुत ही घटिया क्वालिटी का एक सोफा ही खरीदा गया। जुलाई महीने में नए डीडीसी रामनरेश सोनकर ने निर्माण कार्य की फाइलों को खंगाला तो अनियमितताएं सामने आईं।
इसकी पूरी जानकारी मुख्यालय को होने के बाद घोटाले की जांच संयुक्त निदेशक पीसी जैन को सौंपी गई। जांच में बिना काम कराए पैसे का भुगतान, बिलों में हेराफेरी सहित कई गड़बड़िया सामने आईं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दो डीडीसी सहित पांच कर्मचारियों को निलंबित किया गया।
मिर्जापुर और झांसी में तैनात थे डीडीसी
घोटाले में शामिल उप निदेशक मंडी आरके वर्मा मिर्जापुर और विमलेश मिश्रा झांसी में तैनात थे जबकि अवर अभियंता सुनीता व अखिलेश्वर लाल और लेखाधिकारी सिद्ध गोपाल कुरील वाराणसी में ही तैनात थे। अवर अभियंताओं की वाराणसी में तैनाती के समय हुई जांच में पता चला कि ज्यादातर माप जोख इन्होंने ने की है। ऐसे में अब नए सिरे से जांच कराई जा सकती है और बड़ी गड़बड़ी सामने आने की आशंका है।
वसूली जाएगी घोटाले की धनराशि
पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि घोटाले में आरोपी पांचों अधिकारियों से वसूली की जाएगी। इसके लिए बाकायदा विभागीय नोटिस जारी किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो निलंबित अधिकारियों की संपत्ति आदि की जांच कराई जा रही है। इन सभी पर आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया जा सकता है।
पिछले पांच साल के निर्माण की होगी जांच
निदेशक मंडी ने पिछले पांच साल में पहड़िया मंडी में कराए गए प्रत्येक काम की जांच का आदेश दिया है। इसमें बिलों से मिलान के साथ ही कामों की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। माना जा रहा है कि इस जांच में भी बड़ी धांधली समाने आ सकती है।