फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एम वाहन एप लांच, पहले दिन 48 वाहनों की फिटनेस जांच
वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सोमवार से नई व्यवस्था लागू हो गई है। पहले दिन 48 वाहनों की फिटनेस जांच एम वाहन एप के जरिए की गई। नई व्यवस्था के तहत वाहनों को मौके पर पहुंचना अनिवार्य किया गया है।
परिवहन कार्यालय में सोमवार को आए वाहनों की एम वाहन एप में निर्धारित छह बिंदुओं पर वाहनों से संबंधित तस्वीर लोड की गई। सभी बिंदुओं पर तस्वीर लोड होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। एआरटीओ प्रशासन सर्वेश चतुर्वेदी ने बताया कि एप में वाहन की पूरी तस्वीर, चेसिस नंबर, आगे और पीछे के सभी लाइट और हाई सिक्योरिटी नंबर लोड करनी पड़ रही है। गाड़ी का इंजन, हार्न, आगे और पीछे की लाइट व इंडीकेटर, सीट, फाग लाइट, फर्स्ट एड बाक्स, रिफ्लेक्टर, सफाई, डेंट-पेंट तथा नंबर प्लेट आदि की जांच होती है। व्यावसायिक वाहनों के पंजीकरण के समय ही दो साल के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र बनता है। दो साल के बाद प्रत्येक वर्ष जांच के बाद फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता है। गैर व्यावसायिक वाहनों के लिए 15 साल के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र बनाया जाता है। प्रमाण पत्र समाप्त होने के बाद दूसरा बनवाना अनिवार्य होता है और इसके लिए एक सप्ताह का समय मिलता है।
वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए ऐसा कदम उठाया गया। इसके लिए वाहनों की फिटनेस जांच अब ऑनलाइन होगी। एम वाहन एप को लांच किया। नई व्यवस्था के तहत वाहनों का मौके पर पहुंचना अनिवार्य होगा। मौके पर पहुंचे वाहनों को देखने के बाद ही संबंधित अधिकारी और कर्मचारी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर पाएंगे।
एम वाहन एप में जांचकर्ता को एम मोबाइल एप में निर्धारित छह बिंदुओं पर वाहनों से संबंधित तस्वीर लोड करनी होगी। सभी बिंदुओं पर तस्वीर लोड होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। अन्यथा की स्थिति में फिटनेस प्रमाण पत्र ही नहीं बन पाएगा। यानी, एप में वाहन की पूरी तस्वीर, चेसिस नंबर, आगे और पीछे के सभी लाइट और हाई सिक्योरिटी नंबर लोड करने होंगे।
यहां बता दें कि अब तक परिवहन विभाग में वाहनों के फिटनेस जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। वाहन परिवहन कार्यालय पहुंचे बिना ही फिटनेस प्रमाण पत्र बन जाता है। सुविधा शुल्क पर खटारा वाहनों का भी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी हो जाता है। इसी मामले में कुछ महीने पहले वाराणसी के तत्कालीन आरआई को शासन ने निलंबित भी किया था।