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जनकपुरी बन गई शिव की नगरी, गूंजे मंगल गीत
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वाराणसी। शिव की नगरी काशी सीताराम विवाह पंचमी की पूर्व संध्या पर जनकपुरी की तरह सज गई है। अस्सी स्थित रामजानकी मठ में मंगल गीत गूंजे और जनक नंदिनी के विवाह से पूर्व की रस्मों का श्रीगणेश हुआ। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और गंगा की पूजा की। मटकोर पूजन के साथ ही तीन दिवसीय राम विवाह पंचमी महोत्सव का श्रीगणेश हो गया।
शुक्रवार की सुबह से ही श्री रामजानकी मठ में मंगल गीत गूंजने लगे थे। मठ में बिटिया के विवाह जैसा नजारा था। साधु-संन्यासी गृहस्थों की तरह भागदौड़ में लगे हुए थे। कोरोना संक्रमण के कारण आयोजन को भव्यता तो नहीं दी गई है लेकिन बरातियों के बेजोड़ स्वागत की तैयारी की होड़ लगी हुई थी। दोपहर बाद ढोलक की थाप पर मंगल गीत गातीं महिलाएं सीता स्वरूप को लेकर अस्सी घाट पहुंचीं। परंपरा अनुसार गंगा की पूजा-अर्चना की गई। साक्षी के तौर पर मिट्टी लेकर महिलाएं मठ पहुंचीं। रास्ते में लोगों ने सीता स्वरूप पर पुष्प बरसाए और आरती उतारी। मठ में बटुकों के सस्वर मंत्रोच्चार के साथ गंगा की मिट्टी पर मंडप सजाया गया। इस अनुपम मंगलमय वातावरण में संत, महात्मा, बटुक तथा काशीवासी हिस्सा ले रहे थे। कार्यक्रम मठ के प्रभारी संत रामलोचन दास के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
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शुक्रवार की सुबह से ही श्री रामजानकी मठ में मंगल गीत गूंजने लगे थे। मठ में बिटिया के विवाह जैसा नजारा था। साधु-संन्यासी गृहस्थों की तरह भागदौड़ में लगे हुए थे। कोरोना संक्रमण के कारण आयोजन को भव्यता तो नहीं दी गई है लेकिन बरातियों के बेजोड़ स्वागत की तैयारी की होड़ लगी हुई थी। दोपहर बाद ढोलक की थाप पर मंगल गीत गातीं महिलाएं सीता स्वरूप को लेकर अस्सी घाट पहुंचीं। परंपरा अनुसार गंगा की पूजा-अर्चना की गई। साक्षी के तौर पर मिट्टी लेकर महिलाएं मठ पहुंचीं। रास्ते में लोगों ने सीता स्वरूप पर पुष्प बरसाए और आरती उतारी। मठ में बटुकों के सस्वर मंत्रोच्चार के साथ गंगा की मिट्टी पर मंडप सजाया गया। इस अनुपम मंगलमय वातावरण में संत, महात्मा, बटुक तथा काशीवासी हिस्सा ले रहे थे। कार्यक्रम मठ के प्रभारी संत रामलोचन दास के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
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