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अंतरगृही परिक्रमा पथ पर निकला श्रद्धा का रेला
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वाराणसी। धर्म नगरी काशी में यात्राओं का अलग ही महत्व है। कोरोना काल में भी आस्था संक्रमण पर भारी नजर आई। अंतरगृही परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं का रेला निकल पड़ा। मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए मणिकर्णिका घाट से मंगलवार को श्रद्धालुओं ने माता सीता का ध्यान कर एकदिवसीय अंतरगृही यात्रा की शुरुआत की।
मंगलवार की सुबह महिलाओं ने मणिकर्णिका घाट पर स्नान कर यात्रा का संकल्प लिया। इसके बाद श्रद्धालु देवी गीत गुनुगुनाते हुए यात्रा पथ पर बढ़ती रहीं। श्रद्धालु अस्सी घाट, संकटमोचन से एफसीआई गोदाम, मंडुवाडीह, फुलवरिया होते हुए चौकाघाट पहुंची। चौकाघाट पर महिलाओं ने रसोई बनाई और रात्रि विश्राम किया। चौकाघाट पर आरंभ फाउंडेशन केशांतनु त्रिपाठी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए कैंप लगाया गया। कैंप में महिलाओं को फलाहार, चाय और पानी का निशुल्क वितरण किया गया। रात्रि विश्राम के बाद श्रद्धालु राजघाट होते हुए मणिकर्णिका घाट पहुंचेंगे। मणिकर्णिका घाट पर संकल्प विसर्जन के साथ ही यात्रा भी पूर्ण होगी।
काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि त्रेतायुग में माता सीता ने अंतरगृही यात्रा की शुरुआत की थी। तब से काशी में यह परंपरा चली आ रही है। अंतरगृही यात्रा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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मंगलवार की सुबह महिलाओं ने मणिकर्णिका घाट पर स्नान कर यात्रा का संकल्प लिया। इसके बाद श्रद्धालु देवी गीत गुनुगुनाते हुए यात्रा पथ पर बढ़ती रहीं। श्रद्धालु अस्सी घाट, संकटमोचन से एफसीआई गोदाम, मंडुवाडीह, फुलवरिया होते हुए चौकाघाट पहुंची। चौकाघाट पर महिलाओं ने रसोई बनाई और रात्रि विश्राम किया। चौकाघाट पर आरंभ फाउंडेशन केशांतनु त्रिपाठी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए कैंप लगाया गया। कैंप में महिलाओं को फलाहार, चाय और पानी का निशुल्क वितरण किया गया। रात्रि विश्राम के बाद श्रद्धालु राजघाट होते हुए मणिकर्णिका घाट पहुंचेंगे। मणिकर्णिका घाट पर संकल्प विसर्जन के साथ ही यात्रा भी पूर्ण होगी।
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काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि त्रेतायुग में माता सीता ने अंतरगृही यात्रा की शुरुआत की थी। तब से काशी में यह परंपरा चली आ रही है। अंतरगृही यात्रा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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