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फादर्स डे 2021: काशी की सुमेधा के लिए सुपरहीरो हैं उनके पिता, पेराप्लेजिक की वजह नहीं चल पातीं, पिता ने एक डिवाइस बनाकर ऐसे की मदद

Sun, 20 Jun 2021 03:42 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 20 Jun 2021 03:42 PM IST
सार

वाराणसी के मानस नगर की सुमेधा पाठक चल नहीं सकती हैं। वह पेराप्लेजिक नाम की बीमारी की शिकार हैं। सुमेधा के पिता ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जिसे सुमेधा खुद चला सकती हैं। उन्होंने साइकिल की दुकान से उसके पार्ट्स लाकर वह डिवाइस बनाई है। सुमेधा व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे बिना किसी मदद से अपने हाथों से पैरों को मूवमेंट देती हैं।

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Fathers day 2021: varanasi father help his daughter make device chair to walk
पिता के साथ सुमेधा पाठक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दुनिया आज फादर्स डे मना रही है। हमारी जिंदगी में सबसे पहले सुपरहीरो एक पिता ही होते हैं। ये अपने बच्चों के लिए हर जंग से लड़ने को तैयार रहते हैं। यह उनकी खुशी के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही पिता की कहानी बताएंगे, जो अपनी बेटी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहे हैं।

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वाराणसी के मानस नगर की सुमेधा पाठक चल नहीं सकती हैं। लेकिन उनमें हुनर और जज्बे को कई कमी नहीं है। सुमेधा पेराप्लेजिक नाम की बीमारी की शिकार हैं। 2013 में रीढ़ की हड्डी में इंफेक्शन हुआ और उनकी कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। इससे सुमेधा को रोज फिजियोथेरेपी करानी पड़ती थी। तब वो 10वीं की परीक्षा दे रही थीं। तीन पेपर देने के बाद संक्रमण की वजह से वह आगे परीक्षा नहीं दे सकीं और एक साल तक उनकी पढ़ाई भी बाधित रही। 
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सुमेधा के पिता बृजेशचंद पाठक को फिजियोथेरेपिस्ट ने कहा कि कोई ऐसी डिवाइस हो जिसे सुमेधा खुद चला सके। फिर क्या उन्होंने साइकिल की दुकान से उसके पार्ट्स ले आए और डिवाइस तैयार कर दी। इसके बनने के बाद सुमेधा व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे बिना किसी मदद से अपने हाथों से पैरों को मूवमेंट देती हैं।

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Fathers day 2021: varanasi father help his daughter make device chair to walk
पीएम मोदी के साथ सुमेधा पाठक। - फोटो : अमर उजाला।

बीमारी की वजह से उनकी इंटर की परीक्षा छूट गई थी। इसके बाद उन्होंने 2016 में 91.4 प्रतिशत अंकों के साथ दिव्यांग वर्ग में नेशनल टॉप किया। उन्होंने पढ़ाई के साथ निशानेबाजी सीखी। महज छह महीने के अभ्यास के बाद स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में दिव्यांग वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। सुमेधा प्री नेशनल में उत्तर प्रदेश से मेडल पाने वाली एकमात्र खिलाड़ी हैं। शिक्षा और खेल के क्षेत्र में अच्छा करने के साथ सुमेधा एक कुशल एंकर और सोशल एक्टिविस्ट भी हैं। प्री नेशनल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लक्ष्मीबाई अवार्ड से भी सम्मानित हैं।

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