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Varanasi News: पिता ने कहा, वह दोनों मेरे लिए पहले ही मर चुके
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मुठभेड़ में ढेर दोनों बेटे रजनीश और मनीष की मौत की सूचना जब बिहार पुलिस ने परिजनों को दी तो सब सन्न रह गए। घर की महिलाएं जहां फफक पड़ी तो वहीं, पिता शिवशंकर कुछ देर तक खामोश रहा। बड़ागांव पुलिस की ओर से शव लेने के लिए भेजी गई नोटिस को पढ़ा और कुछ देर बाद पिता ने बिहार पुलिस से कहा कि वह दोनों अपराधी थे और कभी घर नहीं आते थे। वह दोनों मेरे लिए पहले ही मर चुके थे। मुझसे या परिवार के अन्य किसी सदस्य से कोई रिश्ता नहीं है। इसलिए शव लेने वाराणसी नहीं जा सकता। पिता शिवशंकर ने लिखित जवाब बड़ागांव थाने की पुलिस को भेजा।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि पिता शिवशंकर सिंह ने लिखित जवाब दिया है कि उन दोनों से मेरा कोई लेना देना नहीं था। दोनों अपराधी थे और कभी घर नहीं आते थे। तीसरे बेटे लल्लन सिंह के बारे में बताया कि उससे भी हाल के दिनों में मुलाकात नहीं है।
शरणदाताओं को पुलिस ने किया चिह्नित, सीडीआर से खुला राज
बिहार के कुख्यात बदमाशों को शरण देने वालों की कमिश्नरेट पुलिस ने पहचान कर ली है। पटना कोर्ट से दोनों के फरार होने के दौरान और वाराणसी के मंडुवाडीह में पनाह देने तक में अहम भूमिका निभाने वाले की पहचान हुई है। मारे गए बदमाशों के मोबाइल की सीडीआर से कई नंबर ट्रेस हुए हैं। कुछ नंबर बंद है तो कुछ नंबरों पर सिर्फ व्हाट्सएप कॉलिंग से अपराधी बातचीत करते थे। अधिकतर नंबर बिहार और झारखंड के बताए गए हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद वह दोनों पड़ाव पर ठौर लिए थे। क्राइम ब्रांच की टीम ने सीडीआर से कई राज उजागार किए हैं।
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लल्लन पर दर्ज हैं हत्या और डकैती समेत आठ आपराधिक मुकदमे
बिहार पुलिस के डोजियर के अनुसार एक लाख के इनामी बदमाश लल्लन सिंह अपने दोनों भाइयों से भी बहुत खतरनाक है। इस पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती समेत आठ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसमें हत्या के तीन मुकदमे हैं। मारे गए रजनीश सिंह उर्फ बऊवा पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत सात आपराधिक मुुकदमे थे और मनीष पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती समेत आठ मुकदमे दर्ज थे।
एक दशक बाद वाराणसी में हुई दोहरी मुठभेड़
पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ तो शहर में कई बार हुई, लेकिन हरहुआ में हुई इस मुठभेड़ ने पिछले एक दशक की पुलिसिंग की यादें ताजा कर दी। तब एसओजी प्रभारी गिरिजाशंकर त्रिपाठी ने डेढ़ लाख के इनामी और पूर्वांचल में आतंक का दूसरा नाम कहे जाने वाले संतोष कुमार गुप्ता उर्फ किट्टू और संतोष सिंह को चार जून 2010 को चौकाघाट इलाके में मार गिराया था। इसके बाद इनामी तो कई मारे गए लेकिन दो बदमाश एक साथ ढेर नहीं हुए। एक दशक के बाद सोमवार को बनारस में दो बदमाशों को एक साथ पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। कमिश्नरेट पुलिस अधिकारियों के अनुसार एक साथ दो बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने की कार्रवाई से अपराधियों में खौफ पैदा होगा और पुलिसिया इकबाल बुलंद रहेगा।
बड़े अपराधियों की बात करें तो इससे पहले 21 मार्च 2022 को यूपी एसटीएफ ने लोहता क्षेत्र में दो लाख के इनामी बदमाश मनीष सिंह उर्फ सोनू को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। नरोत्तमपुर निवासी मनीष उर्फ सोनू के ऊपर 36 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। मनीष के पास से कारबाइन और .32 बोर की फैक्ट्री मेड पिस्टल और 20 कारतूस बरामद हुए थे।
इसके पहले 13 सितंबर 2021 को यूपी एसटीएफ ने चौबेपुर क्षेत्र में एक लाख के इनामी दीपक वर्मा उर्फ गुड्डू को मार गिराया था। उस पर हत्या, लूट, रंगदारी समेत दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। इसके पहले वर्ष 2020 में 50 हजार के इनामी मोनू चौहान और एक लाख के इनामी रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। वर्ष 2015 को सन्नी सिंह का एनकाउंटर जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा में हुआ था।
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पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि पिता शिवशंकर सिंह ने लिखित जवाब दिया है कि उन दोनों से मेरा कोई लेना देना नहीं था। दोनों अपराधी थे और कभी घर नहीं आते थे। तीसरे बेटे लल्लन सिंह के बारे में बताया कि उससे भी हाल के दिनों में मुलाकात नहीं है।
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शरणदाताओं को पुलिस ने किया चिह्नित, सीडीआर से खुला राज
बिहार के कुख्यात बदमाशों को शरण देने वालों की कमिश्नरेट पुलिस ने पहचान कर ली है। पटना कोर्ट से दोनों के फरार होने के दौरान और वाराणसी के मंडुवाडीह में पनाह देने तक में अहम भूमिका निभाने वाले की पहचान हुई है। मारे गए बदमाशों के मोबाइल की सीडीआर से कई नंबर ट्रेस हुए हैं। कुछ नंबर बंद है तो कुछ नंबरों पर सिर्फ व्हाट्सएप कॉलिंग से अपराधी बातचीत करते थे। अधिकतर नंबर बिहार और झारखंड के बताए गए हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद वह दोनों पड़ाव पर ठौर लिए थे। क्राइम ब्रांच की टीम ने सीडीआर से कई राज उजागार किए हैं।
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लल्लन पर दर्ज हैं हत्या और डकैती समेत आठ आपराधिक मुकदमे
बिहार पुलिस के डोजियर के अनुसार एक लाख के इनामी बदमाश लल्लन सिंह अपने दोनों भाइयों से भी बहुत खतरनाक है। इस पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती समेत आठ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसमें हत्या के तीन मुकदमे हैं। मारे गए रजनीश सिंह उर्फ बऊवा पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट समेत सात आपराधिक मुुकदमे थे और मनीष पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती समेत आठ मुकदमे दर्ज थे।
एक दशक बाद वाराणसी में हुई दोहरी मुठभेड़
पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ तो शहर में कई बार हुई, लेकिन हरहुआ में हुई इस मुठभेड़ ने पिछले एक दशक की पुलिसिंग की यादें ताजा कर दी। तब एसओजी प्रभारी गिरिजाशंकर त्रिपाठी ने डेढ़ लाख के इनामी और पूर्वांचल में आतंक का दूसरा नाम कहे जाने वाले संतोष कुमार गुप्ता उर्फ किट्टू और संतोष सिंह को चार जून 2010 को चौकाघाट इलाके में मार गिराया था। इसके बाद इनामी तो कई मारे गए लेकिन दो बदमाश एक साथ ढेर नहीं हुए। एक दशक के बाद सोमवार को बनारस में दो बदमाशों को एक साथ पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। कमिश्नरेट पुलिस अधिकारियों के अनुसार एक साथ दो बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने की कार्रवाई से अपराधियों में खौफ पैदा होगा और पुलिसिया इकबाल बुलंद रहेगा।
बड़े अपराधियों की बात करें तो इससे पहले 21 मार्च 2022 को यूपी एसटीएफ ने लोहता क्षेत्र में दो लाख के इनामी बदमाश मनीष सिंह उर्फ सोनू को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। नरोत्तमपुर निवासी मनीष उर्फ सोनू के ऊपर 36 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। मनीष के पास से कारबाइन और .32 बोर की फैक्ट्री मेड पिस्टल और 20 कारतूस बरामद हुए थे।
इसके पहले 13 सितंबर 2021 को यूपी एसटीएफ ने चौबेपुर क्षेत्र में एक लाख के इनामी दीपक वर्मा उर्फ गुड्डू को मार गिराया था। उस पर हत्या, लूट, रंगदारी समेत दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। इसके पहले वर्ष 2020 में 50 हजार के इनामी मोनू चौहान और एक लाख के इनामी रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। वर्ष 2015 को सन्नी सिंह का एनकाउंटर जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा में हुआ था।