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Varanasi News: डोली उठने से पहले उठ गई पिता, भाई व बहन की अर्थी

Thu, 18 May 2023 12:37 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 18 May 2023 12:37 AM IST
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Father, brother and sister's bier got up before the doli got up
घर में खुशियों का माहौल था। बड़ी बिटिया के शादी की तैयारी चल रही थी। रिश्तेदार भी आने लगे थे। अचानक सारी खुशियां मातम में बदल गईं। मृत अविनाश प्रसाद के जिस घर से बिटिया की डोली 22 मई को उठनी थी, वहां से पहले उसकी, भाई और बहन की अर्थी उठेगी। ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था। बुधवार को घर में शादी के मंगल गीत की जगह रोने की आवाज सुनाई देती रही। अविनाश की लगी।रामनगर थाना क्षेत्र के कोदोपुर स्थित बंधन लाॅन के सामने हादसे में अविनाश प्रसाद, बेटी ज्योति और बेटे रतनदीप सोनी की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया। घर में चल रही शादी की तैयारी के बीच दुखों का पहाड़ टूट गया। जानकारी के मुताबिक, मृत अविनाश की बड़ी बेटी प्रीति सोनी की 21 मई को शादी है। घर-परिवार के लोग बिटिया की शादी की तैयारियों में लगे थे। अचानक परिवार में एक साथ तीन मौतों ने हिलाकर रख दिया। अविनाश की पत्नी आशा
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की हालत बेसुधों जैसी थी। वह बार-बार यही कह रही थीं कि आखिर किसका क्या बिगाड़ा था, जो मेरे साथ ऐसा हुआ। पति के साथ ही कलेजे के टुकड़े बेटे व बेटी की भी मौत हो गई। अब किसके सहारे बड़ी बेटी की शादी करेंगे। उसे विदा करके ससुराल भेजेंगे। उसकी चित्कार सुनकर आसपास के लोगों की आंखें नम हो गईं। घर की दूसरी महिलाएं उसे किसी तरह संभाल रही थीं।
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सात बहनों के बाद पैदा हुआ था रतनदीप
बड़ी मिन्नत के बाद हमार ललनवा भयल रहल हो, अब केकरा सहारे हम जियब हो, हमरे ललनवा के कोई लिया देत हो, हम फिर से भगवान से मन्नत करत हइ, हमरे रतनदीप हमरे गोविंदा के कोई बोला देत हो। यह करुण क्रंदन बुधवार को डोमरी गांव में जिसने भी सुना, उसकी आंखें डबडबा गईं। होती भी क्यों नहीं सात बेटियों के बाद अविनाश प्रसाद व आशा देवी के आंगन में बेटे के रूप में रतनदीप की किलकारियां गूंजी थीं। रतनदीप को घर के लोग गोविंदा कह कर बुलाते थे। मां के साथ ही सभी बहनें रतनदीप पर जान छिड़कती थीं। अब अविनाश के परिवार में पत्नी, छह बेटियां व एक बेटा है।
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मदद के लिए कोई नहीं आया आगे



सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने सभी को झकझोर दिया। बताया जा रहा है कि घटना के बाद काफी देर तक रतनदीप कराहता रहा, लेकिन कोई आगे नहीं आया। सब आते-जाते रहे पर मदद की पहल नहीं की। काफी देर बाद एक ऑटो चालक ने हिम्मत जुटाई, लेकिन के ऑटो का टायर पंचर हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने रतनदीप को लेकर अस्पताल जा रही थी कि रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना था कि अगर रतनदीप को समय से अस्पताल पहुंचाया गया होता तो उसकी जान शायद बच जाती।


शादी व चोट लगने की वजह से नहीं गई बड़ी बेटी
अपने पिता अविनाश की डायलिसिस कराने हर बार बड़ी बेटी प्रीति ही स्कूटी से जाती थी। उसके पैर में चोट लगने और शादी की तिथि नजदीक होने की वजह से ही वह नहीं गई। इस बार छोटी बहन और भाई ही पिता को लेकर बीएचयू अस्पताल गए थे।



हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार
मृत अविनाश, रतनदीप व ज्योति के शव का पोस्टमार्टम कराया गया, फिर हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। छोटे बेटे सत्यम सोनी ने मृत पिता, भाई व बहन को मुखाग्नि दी।


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