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अब आंदोलन की राह पर चलेंगे किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 12 May 2017 02:07 AM IST
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37 साल से अधर में लटकी लखमीपुर माइनर को बनवाने के लिए किसानों ने गुरुवार को आंदोलन की राह पकड़ने का एलान कर दिया। गुरुवार को बनकट में किसानों ने बैठक कर चरणबद्ध आंदोलन चलाने के लिए कोर कमेटी का गठन किया। आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। किसानों ने कहा कि जब तक नहर की खुदाई का काम शुरू नहीं हो जाएगा और इसके लिए किसानों की अधिग्रहीत की गई जमीनों का मुआवजा उचित दर पर नहीं मिल जाएगा तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
बनकट गांव में किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुरुवार को हुई बैठक में किसानों ने आंदोलन को तेज करने के लिए कोर कमेटी का गठन आशीष राय रिंकू के नेतृत्व में किया। किसानों ने कहा की सिंचाई का साधन न होने से वर्षों से खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। 37 वर्ष पहले नहर के लिए जमीन छोड़ी गई थी। कुछ दूरी तक नहर का निर्माण भी हुआ लेकिन आगे का काम जो ठप हुआ वह आज तक शुरू नहीं हो सका। साथ ही जो जमीन नहर के लिए अधिग्रहीत की गई थी उसका मुआवजा भी नहीं मिला ।
किसान नेता आशीष ने बताया कि नहर के लिए अधिग्रहीत जमीन पर खेती करने वालों को बीच -बीच में सिंचाई विभाग की तरफ से नोटिस भी जारी किया जाता रहा। चेताए जाने के बाद वर्षों पहले ही किसानों ने उस जमीन पर खेती करना बंद कर दिया था। जब खेत के बीच परती जमीन रहने पर किसानों का नुकसान होने लगा तो दुबारा उस पर खेती की जाने लगी। इस मौके पर राम नारायन चौहान, मनोज पांडेय, कमरुद्दीन खान, वीरेंद्र पटेल, मुन्ना सिंह, कतवारु सिंह, तेज बहादुर सिंह, अनूप सिंह, नौशाद खान अजित कुमार ने नहर की खुदाई कराने पर जोर दिया। अध्यक्षता अनिल सिंह ने की।
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बनकट गांव में किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुरुवार को हुई बैठक में किसानों ने आंदोलन को तेज करने के लिए कोर कमेटी का गठन आशीष राय रिंकू के नेतृत्व में किया। किसानों ने कहा की सिंचाई का साधन न होने से वर्षों से खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। 37 वर्ष पहले नहर के लिए जमीन छोड़ी गई थी। कुछ दूरी तक नहर का निर्माण भी हुआ लेकिन आगे का काम जो ठप हुआ वह आज तक शुरू नहीं हो सका। साथ ही जो जमीन नहर के लिए अधिग्रहीत की गई थी उसका मुआवजा भी नहीं मिला ।
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किसान नेता आशीष ने बताया कि नहर के लिए अधिग्रहीत जमीन पर खेती करने वालों को बीच -बीच में सिंचाई विभाग की तरफ से नोटिस भी जारी किया जाता रहा। चेताए जाने के बाद वर्षों पहले ही किसानों ने उस जमीन पर खेती करना बंद कर दिया था। जब खेत के बीच परती जमीन रहने पर किसानों का नुकसान होने लगा तो दुबारा उस पर खेती की जाने लगी। इस मौके पर राम नारायन चौहान, मनोज पांडेय, कमरुद्दीन खान, वीरेंद्र पटेल, मुन्ना सिंह, कतवारु सिंह, तेज बहादुर सिंह, अनूप सिंह, नौशाद खान अजित कुमार ने नहर की खुदाई कराने पर जोर दिया। अध्यक्षता अनिल सिंह ने की।
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