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किसानों को खेती के दौरान भी मिल चुके हैं 4000 साल पुराने शिल्प ग्राम के अवशेष

Mon, 24 Feb 2020 01:21 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Mon, 24 Feb 2020 01:21 AM IST
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Farmers have got 4000 year old crafts village antiquities even during farming
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

आराजी लाइन विकासखंड के दक्षिण तरफ स्थित बभनियाव गांव अतीत की प्राचीनता समेटे हुए हैं। राजा तालाब से 5 किलोमीटर दूर जक्खिनी रोड पर स्थित इस गांव में बस्ती के पास पुराना टीला है जो लगभग 10 बीघा क्षेत्रफल में फैला हुआ है। भीटे के ऊपर तथा नीचे से अक्सर प्राचीन अवशेष, बर्तन के टुकड़े, मूर्तियां आदि मिलते रहते हैं। टीले पर बिखरे प्राचीन अवशेष व पत्थर की प्राचीन मूर्तियां इसकी प्राचीनता और पूर्व में कोई समृद्ध बस्ती होने की कहानी कहते हैं। यहां पर मिले मूर्ति के आधार पर इतिहास वेत्ता इसके 4 हजार वर्ष पुराने होने की बात कह रहे हैं।

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गांव के दक्षिण ओर फैले टीले पर गांव के किसान खेती भी करते हैं। इस समय टीले के कुछ हिस्से पर फसलें हैं तो कुछ खाली पड़ा है। किसान जब भी टीले की खुदाई करता है तो उसे पत्थर की अनेक मूर्तियों के साथ पत्थर के छोटे-छोटे प्राचीन अवशेष मिलते हैं। यहां से मिले तमाम प्राचीन अवशेष सामग्री को ग्राम प्रधान रत्नेश कुमार सिंह ने गांव वालों की मदद से सुरक्षित और संरक्षित किया हुआ है। ग्राम प्रधान कई वर्षों से लगातार इस स्थल के अध्ययन तथा जांच किए जाने की मांग कर रहे थे।

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अनेक मूर्तियां और बर्तन के टुकड़े यहां से पहले ही मिल चुके हैं। बर्तन का टुकड़ा काफी चिकना होता है। बताते हैं कि उन्होंने इतना चिकना बर्तन का टुकड़ा कभी नहीं देखा था। गांव के बहुत बड़े क्षेत्रफल में खुदाई में अक्सर ईट हांडी मिट्टी के बर्तन मिले हैं जिसमें राख भरी हुई थी। ऐसी चीजों को देखकर अनहोनी के भय से किसानों ने खुदाई बंद करवा दी।

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क्या कहते हैं ग्रामीण

गांव के बुजुर्ग 90 वर्षिय मायाशंकर सिंह जो 50 साल तक लगातार यहां के प्रधान रहे बताते हैं कि वह बचपन से ही इस स्थान से कुछ न कुछ निकलते देख रहे हैं। बताया कि भीटे से तरह-तरह के प्राचीन अवशेष मिलते हैं जो काफी चिकने होते हैं। यह भी बताया कि यहां से निकलने वाले ईट एक 1 फीट डेढ़ फिट लंबे उतने ही चौड़े आकृति के हैं। भीटे के अंदर मोटी-मोटी ईटों के चौड़े चौड़े दीवार है। पास ही एक पोखरी है जिसमें ऐसा निर्माण दिखाई देता है जो नाले के रूप में पुराने ईटों से बना है।

 

Farmers have got 4000 year old crafts village antiquities even during farming
kashi hindu vishwavidyalay bhu - फोटो : kashi hindu vishwavidyalay bhu

पिछले हफ्ते राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ बी आर मणि के साथ बीएचयू की टीम ने यहां पर बिखरी सामग्री को देखा और उन सामग्रियों के आधार पर इस स्थल को कुषाण काल के पूर्व के होने की बात ग्रामीणों से बताई।

पुरावशेषों में ब्राम्हीलिपि भी शामिल

पंचक्रोशी मार्ग पर सर्वेक्षण के दौरान जो पुरावशेष मिले हैं, उसमें ब्राम्ही लिपि के आलेख भी शामिल हैं। इसको देखने से दो हजार साल पुराना होने की संभावनाएं हैं, जांच के बाद ही सही पता चल सकेगा। बीएचयू के प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओएन सिंह के मुताबिक कुछ पत्थर ऐसे हैं जो आधा गढ़े हैं, शिवलिंग बन गए हैं। शिवलिंग के ऊपर ही आलेख है।

बीएचयू के प्राचीन इतिहास विभाग की ओर से अब तक सारनाथ, चंदौली सहित कई जगहों पर खुदाई कर चुकी है। प्रो. ओएन सिंह ने बताया कि पंचक्रोशी मार्ग पर इन अवशेषों के मिलने का महत्व अधिक है। पंचक्रोशी परिक्रमा से तीन किलोमीटर उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ सर्वेक्षण कराया गया है।

यहां से जानकारी मिलने के बाद अब खुदाई के बाद जांच में इसके सही उम्र का पता लग सकेगा। कहा कि गांव में मिले एक टीले की खुदाई के दौरान भी कई पुरावशेषों के मिलने का अनुमान है। सर्वेक्षण के दौरान जो मातृदेवी की प्रतिमा, नार्दन ब्लैक पालिश के बर्तन मिलने की भी जानकारी मिली है।

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