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राम बालि निज धाम पठावा...
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 04 Oct 2016 02:00 AM IST
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रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला
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अनुज बधू भगिनी सुत नारी/सुनु सठ कन्या सम ए चारी/इन्हहि कुदृष्टि बिलोकई जोई/ताहि बधें कछु पाप न होई/सुनत राम अति कोमल बानी/बालि सीस परसेउ निज पानी/राम बालि निज धाम पठावा/नगर लोग सब ब्याकुल धावा...। राम के एक ही बाण में बालि परलोक सिधार गया। इसके बाद प्रभु श्रीराम की आज्ञा से सुग्रीव का बानरी सेना के साथ राजतिलक हुआ। अंगद युवराज बन गए। अब प्रभु की महिमा देख पुलकित सुग्रीव ने बानरी सेना को एक माह के अंदर माता जानकी को खोजने का आदेश दिया। हालांकि गिद्धराज जटायु के भाई संपाती ने अपनी दूर दृष्टि से माता जानकी के अशोक वाटिका में होने की बात बता दी है। प्रभु श्रीराम से मुद्रिका लेकर वीर हनुमान अंगद, नील और जामवंत के साथ समुद्र तट पहुंचे। अब हनुमान समुद्र पार कर लंका जाएंगे।
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में सोमवार को बालि वध, वर्षा वर्णन, हनुमान का लंका प्रस्थान, संपाति मिलन, पंचवटी, भीटी लंका के आसपास का मंचन हुआ। बालि-सुग्रीव युद्ध के साथ लीला की शुरूआत हुई। प्रभु श्रीराम एक ही बाण से बालि को परलोक पहुंचा देते हैं। सुग्रीव के राजतिलक के साथ अंगद को युवराज बनाया जाता है। विलाप करती तारा को प्रभु श्रीराम दिव्य ज्ञान देकर उसका मोह हर लेते हैं। खेतों में सफेद चांदनी की तरह सफेद फूटी काश देख प्रभु श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि हे तात शरद ऋतु आने वाली है। पर अब तक सीते का कुछ पता नहीं चल सका।
राजघाट में खोये सुग्रीव को वीर हनुमान के साथ भ्राता लक्ष्मण जा कर रामकाज की सुधि दिलाते हैं। वानरराज सुग्रीव माह भर में माता सीता को खोजने का आदेश दिया है। हनुमान को बुलाकर राम अपनी मुद्रिका उन्हें देते हैं। फिर अंगद, नील, जामवंत के साथ दक्षिण दिशा की तरफ निकलते हैं। समय बीतने के साथ बानर चिंता में पड़ जाते हैं कि महीने भर बीतने को हैं लेकिन सीता का पता नहीं लगा। समुद्र तट पर कुशासन पर बैठे बानरों को संपाती बताते हैं कि सीता अशोक वाटिका में हैं। जामवंत हनुमान को सीता का पता लगाकर आने को कहते हैं।
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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में सोमवार को बालि वध, वर्षा वर्णन, हनुमान का लंका प्रस्थान, संपाति मिलन, पंचवटी, भीटी लंका के आसपास का मंचन हुआ। बालि-सुग्रीव युद्ध के साथ लीला की शुरूआत हुई। प्रभु श्रीराम एक ही बाण से बालि को परलोक पहुंचा देते हैं। सुग्रीव के राजतिलक के साथ अंगद को युवराज बनाया जाता है। विलाप करती तारा को प्रभु श्रीराम दिव्य ज्ञान देकर उसका मोह हर लेते हैं। खेतों में सफेद चांदनी की तरह सफेद फूटी काश देख प्रभु श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि हे तात शरद ऋतु आने वाली है। पर अब तक सीते का कुछ पता नहीं चल सका।
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राजघाट में खोये सुग्रीव को वीर हनुमान के साथ भ्राता लक्ष्मण जा कर रामकाज की सुधि दिलाते हैं। वानरराज सुग्रीव माह भर में माता सीता को खोजने का आदेश दिया है। हनुमान को बुलाकर राम अपनी मुद्रिका उन्हें देते हैं। फिर अंगद, नील, जामवंत के साथ दक्षिण दिशा की तरफ निकलते हैं। समय बीतने के साथ बानर चिंता में पड़ जाते हैं कि महीने भर बीतने को हैं लेकिन सीता का पता नहीं लगा। समुद्र तट पर कुशासन पर बैठे बानरों को संपाती बताते हैं कि सीता अशोक वाटिका में हैं। जामवंत हनुमान को सीता का पता लगाकर आने को कहते हैं।
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