Doctors Day:अमर उजाला संवाद में बनारस के जाने-माने डॉक्टरों ने रखी बेबाक राय, बीमारियों से निजात पाने पर चर्चा
डॉक्टर्स डे पर वाराणसी के चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय में शनिवार को विशेष संवाद का आयोजन किया गया। इसमें शहर के जाने-माने डॉक्टरों ने अपनी बेबाक राय रखी।साफ कहा कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत है।
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वाराणसी शहर के जाने-माने डॉक्टरों ने शनिवार को डॉक्टर्स डे पर बेबाक राय रखी। साफ कहा कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत है। बड़े अस्पतालों से भीड़ कम करनी चाहिए। सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही बेहतर इलाज मिले, यह सुनिश्चित होना चाहिए। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर शोध करेंगे। संक्रामक बीमारियों की चुनौती से निपटने की दिशा में काम करेंगे। जनजागरूकता अभियान के जरिये बीमारियों से निजात पाने के लिए काम करेंगे। डॉक्टर सेवा, समर्पण व संकल्प की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
डॉक्टर्स डे पर चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय में शनिवार को विशेष संवाद का आयोजन किया गया। शहर के प्रमुख डॉक्टरों ने कहा कि टेलीमेडिसिन और टेलीकंसल्टेंसी की सुविधा को विस्तार देने की जरूरत है। इसके जरिये विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की चुनौती से निपटा जा सकता है। तमाम बीमारियां ऐसी हैं, जिनका प्राथमिक स्तर पर ही उपचार हो सकता है। ऐसा हुआ तो लोगों की भागदौड़ कम होगी। खर्च भी कम होगा।
डॉक्टरों ने संघर्षों को भी याद किया
संवाद में विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव की जानकारी व सावधानी बरतने की सलाह दी गई। डॉक्टरी पेशा अपनाने और इस बीच आने वाली पारिवारिक समस्याएं भी बताईं। कहा कि पति-पत्नी डॉक्टर रहते हैं तो परिवार को संभालने में दिक्कत आती है। बच्चों पर ध्यान देना मुश्किल रहता है। अमर उजाला ने शहर के प्रमुख डॉक्टरों को सम्मानित भी किया। स्मृति चिन्ह भेंट करके उनकी सेवाओं को सराहनीय बताया।

शहर के जाने-माने डॉक्टरों की बेबाक राय
स्वास्थ्य सेवाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाने की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि वह कुल बजट का 10 फीसदी हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करे। टेलीमेडिसिन व टेलीकंसल्टेंसी को और बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। -प्रो. ओमशंकर, विभागाध्यक्ष, हृदय रोग विभाग बीएचयू
डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने से कहीं अधिक उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चाहिए। कौशल विकास के साथ ही सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है। देश की जीडीपी के हिसाब से स्वास्थ्य पर धनराशि बढ़ाने की जरूरत है।-प्रो.सौरभ सिंह, प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर, बीएचयू

काशी के डॉक्टर देश ही नहीं दुनिया में अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर रहे हैं। चिकित्सा व्यवस्था दूसरे शहरों से बहुत बेहतर है। इसे बरकरार रखना होगा। एक बात और। अंधविश्वास को दूर करने की जरूरत है। अब तमाम घाट, स्थान व क्षेत्रों में अप्रशिक्षित लोग मिर्गी के इलाज का दावा करते हैं। -प्रो. विजयनाथ मिश्र, विभागाध्यक्ष, न्यूरोलॉजी विभाग, बीएचयू
डॉक्टरों को कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ता है। जब पति-पत्नी डॉक्टर हों तो दिक्कत ज्यादा रहती है। अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की जगह सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।-प्रो. समीर त्रिवेदी, यूरोलाजिस्ट, बीएचयू

ओपीडी में सबसे अधिक मरीज ग्रामीण इलाकों से आते हैं। इन सबको सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही बेहतर सुविधा दी जा सकती है। इससे बड़े अस्पतालों पर भीड़ का बोझ कम होगा। विशेषज्ञ डॉक्टर शोध करेंगे। संक्रामक बीमारियों की चुनौती से निपटने की दिशा में काम करेंगे। - डॉ. दीपिका जोशी, न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजी विभाग, बीएचयू
स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे में बदलाव की जरूरत है। बेहतर सुविधाएं मिले, इस पर ध्यान देना होगा। सोच में बदलाव लाना पड़ेगा।- डॉ. सुबोध सिंह, प्लास्टिक सर्जन, जीएस मेमोरियल प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। तनाव का दायरा बढ़ा है। 15 से 30 फीसदी तक लोग तनाव में रहते हैं। इस दिशा में बेहतर काम करना होगा।-प्रो. संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बीएचयू
डॉक्टर बनने के बाद मरीजों की सेवा पहला कर्तव्य है। इसे सबसे बड़ी पूंजी मानकर काम करने की जरूरत है। जब पति-पत्नी डॉक्टर हों तो घर की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।-डॉ. अनिल ओहरी, चेयरमैन, न्यू लाइफ हॉस्पिटल, सिगरा
कोरोना काल की चुनौतियों का डॉक्टरों ने डटकर सामना किया था। सेवा को साधना मानकर काम किया। इसका नतीजा भी सामने आया। सेवा, समर्पण और संघर्ष से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। -डॉ. कुमार उत्सव, पल्मोनोलॉजिस्ट, सामरिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
बीमारियों के उपचार को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां रहती हैं। इसे जनजागरूकता के माध्यम से दूर करना होगा। डॉक्टर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। -डॉ. अतुल सिंह, चिकित्साधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
डॉक्टर और मरीज के बीच संबंध अच्छे रहें, यह सुनिश्चित करना पड़ेगा। डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। इसलिए विश्वास बनाए रखना होगा। -डॉ. नीरज कुमार, मंडलीय रेल चिकित्सालय
डॉक्टर हर कदम पर संघर्ष करते हैं। मरीजों की सेवा के साथ ही घर की जिम्मेदारियां संभालना चुनौतीपूर्ण होता है। कोरोना काल की चुनौतियां यादगार रही हैं। - डॉ. अश्विनी टंडन, एमडी, जमुना सेवा सदन
महिला स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता बहुत जरूरी है। शिविर लगाकर महिलाओं की सेहत की जांच की जानी चाहिए। महिलाओं में खून की कमी आम है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। -डॉ. स्मिता टंडन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जमुना सेवा सदन शिवपुर
मरीज ही डॉक्टर का सबसे अच्छा दोस्त होता है। मरीज की संतुष्टि सबसे बड़ी ताकत होती है। मरीजों का विश्वास बना रहे, यही प्रयास रहता है। एक बार ऐसा मौका आया था, जब प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना पड़ा था। पांच लोगों का निशुल्क उपचार करना पड़ा। - डॉ. आरके ओझा, चेयरमैन, आरके नेत्रालय महमूरगंज
मरीज और डॉक्टर के बीच जिस तरह का रिश्ता होना चाहिए, उसमें कहीं न कहीं कमी आती जा रही है, इस ओर सभी को सोचने की जरूरत है। ऐसा करने से रिश्ता मजबूत होगा।-डॉ. इंदू सिंह, निदेशिका, सूर्या सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल महमूरगंज