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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां: पहले लॉकडाउन में आर्थिक हालत हुई खस्ता, अब आवास के विवाद ने बढ़ाई परिवार परेशानी

Wed, 19 Aug 2020 08:56 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Wed, 19 Aug 2020 08:56 PM IST
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Family upset by Ustad Bismillah Khan's housing dispute
बिस्मिल्लाह खां
वाराणसी के हड़हासराय की गलियां, जहां भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां की शहनाई की तान गूंजती थी तो हर कोई ठहर सा जाता था, अब सुनसान हैं। उस्ताद की शहनाई क्या खामोश हुई, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लॉकडाउन ने पूरे परिवार की हालत और भी ज्यादा खराब कर दी। अब आवास के विवाद से पूरा परिवार परेशान है।
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बुधवार दोपहर उस्ताद के बैठक खाने में उनके पौत्र शिफतैन, नासिर, पौत्र वधू नजमी फिरोजन, पोते राजी खां समेत परिवार के सभी सदस्य चिंतित बैठे थे। उस्ताद के कमरे को देखने की इच्छा जताने पर राजी खां आगे-आगे चल पड़े। उस्ताद के इबादतखाने की तरफ जाने वाली सीढ़ियां, घर की छत और दीवारें परिवार की बदहाली को साफ बयां कर रहे थे। 
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Family upset by Ustad Bismillah Khan's housing dispute
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

बैठकखाने की छत को बांस-बल्ली लगाकर रोका गया था। आंगन में पानी टपक रहा था। सीढ़ियां जर्जर हो चुकी थीं। तीसरे तल्ले पर जब हम उस्ताद के इबादतखाने में पहुंचे तो वहां सन्नाटा था। कमरे में ऐसा कोई निशान नहीं था, जिससे पता चले कि यह वही जगह है, जहां सुकून भरी नींद के लिए उस्ताद ने अमेरिका में बसने का निमंत्रण ठुकरा दिया था। उस्ताद की पौत्र वधू नजमी फिरोजन ने बताया कि मकान का रिनोवेशन कराया जा रहा था, इसलिए सारा सामान दूसरे कमरे में रखवाया है। 

उन्होंने बताया कि दादा अब्बा के जाने के बाद सब कुछ बदल गया। अब हमें कोई नहीं पूछता। आर्थिक हालत बेहद खराब है। लोग समझते हैं कि बिस्मिल्लाह खां का परिवार है तो बहुत पैसा होगा। पोते नासिर ने कहा- घर की स्थिति ऐसी है कि कैसे परिवार का पेट पालें, हम यही सोच नहीं पा रहे हैं।

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Family upset by Ustad Bismillah Khan's housing dispute
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

आमदनी का कोई जरिया नहीं है। कोई सिर पर हाथ रखने वाला नहीं है। साल में एक या दो प्रोग्राम होते थे, लेकिन लॉकडाउन में तो वह भी बंद है। दादा को बहुत से पुरस्कार मिले, लेकिन आज उसकी कोई कीमत नहीं है। आज भी उनका जूता, छाता, टेलीफोन, कुर्सी, लैंप, चम्मच और बर्तन रखे हुए हैं।

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