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सब्जियों के दाम धड़ाम, किसान हुए परेशान
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मंडी में हरी सब्जियों की कीमत काफी गिर गई है। स्थिति यह है कि सब्जी की तोड़ाई और मंडी पहुंचाने का खर्च भी नहीं निकल रही है। मजबूरन किसान फसल नष्ट कर रहें हैं और सब्जियों को मवेशियों का खिला रहे हैं।
बनारस में सब्जियों के निर्यात का हब बनकर उभरने के बाद भी किसानों को निर्यात का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सब्जियों का उत्पादन इस बार अच्छा हुआ है तो मंडी में अच्छे भाव नहीं मिल पर रहा है। किसानों का कहना है कि मंडी में नेनूआ, भिंडी, करेला, बोड़ा दो से चार रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। ऐसे में सिंचाई, बीज और खाद की लागत निकालना मुश्किल हो गया है। कोहड़ा, कद्दू, लौकी तो बाजार में कोई खरीद ही नहीं रहा है। मजबूरन खेत में ही इसे छोड़ना पड़ रहा है। वहीं कई सब्जियों को पशुओं को खिलाना पड़ रहा है।
बोले किसान
30 हजार रुपये प्रतिवर्ष की दर से लीज पर 15 बिस्वा जमीन लेेकर सब्जी की खेती है। फसल तैयार है लेकिन मंडी बिक ही नहीं रहा है। 15 सौ के बीज दो से दिन पर 60 रुपये प्रति घंटे के दर से सिंचाई का खर्च और खुद मेहनत करना पड़ा। भाव गिरने से फसल को खेत में ही छोड़ना पड़ रहा है। सब्जियों को पशुओं को खिला रहे हैं।- रामआसरे, किसान, बड़ागांव
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10 बिस्वा में भिंडी की फसल तैयार है। मंडी में दो से तीन रुपये किलो बिक रही है। मुनाफा तो दूर सिंचाई, बीज और खाद की लागत निकालना मुश्किल हो गया है। हालात तो अब ऐसे हो गए हैं कि तैयार फसल को मंडी ले जाने के बजाय पशुओं को खिलाना पड़ है। यही हाल नेनूआ, भिंडी, करेला, कोहड़ा, कद्दू, लौकी और बोड़ाक का भी है। - सुनील कुमार वर्मा, किसान, पिंडरा
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बोले आढ़ती-उत्पादन अधिक होने से दाम गिरे
पिंडरा स्थित नई सब्जी मंडी के आढ़ती हरिशंकर पटेल और अशोक पटेल का कहना है मंडी में आने वाले किसानों की फसल हम बेचने की कोशिश करते हैं। उत्पादन अधिक होने से दाम गिर गए हैं। ऐसे में किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
वर्जन
बनारस सब्जियों के निर्यात के मामले में हब बन कर उभरा है ऐसे में अगर किसानों को उनकी फसल का अच्छा भाव नहीं मिल रहा है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों को एफपीओ (किसान उत्पादन संगठन) से जुड़कर निर्यात का लाभ लेना चाहिए। जिले के सभी विकास खंड़ों में एफपीओ गठित है। इसके अलावा ऐसे किसान खुद एफपीओ का गठन कर निर्यात का विकल्प चुन सकते हैं। - डॉ सीबी सिंह, महाप्रबंधक, एपीडा
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80 रुपये में बिकी थी भिंडी
बीते मार्च के अंत में और अप्रैल में नेनूआ, भिंडी, करेला, कोहड़ा, कद्दू, लौकी, बोड़ा जैसी सब्जियों के दाम 60 से 80 रुपये प्रतिकिलो थे। जबकि बृहस्पतिवार को फुटकर बाजार में इन्हीं नेनूआ, भिंडी, करेला, कोहड़ा, कद्दू, लौकी, बोड़ा 10 से 20 रुपये किलो में बिका।
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बनारस में सब्जियों के निर्यात का हब बनकर उभरने के बाद भी किसानों को निर्यात का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सब्जियों का उत्पादन इस बार अच्छा हुआ है तो मंडी में अच्छे भाव नहीं मिल पर रहा है। किसानों का कहना है कि मंडी में नेनूआ, भिंडी, करेला, बोड़ा दो से चार रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। ऐसे में सिंचाई, बीज और खाद की लागत निकालना मुश्किल हो गया है। कोहड़ा, कद्दू, लौकी तो बाजार में कोई खरीद ही नहीं रहा है। मजबूरन खेत में ही इसे छोड़ना पड़ रहा है। वहीं कई सब्जियों को पशुओं को खिलाना पड़ रहा है।
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बोले किसान
30 हजार रुपये प्रतिवर्ष की दर से लीज पर 15 बिस्वा जमीन लेेकर सब्जी की खेती है। फसल तैयार है लेकिन मंडी बिक ही नहीं रहा है। 15 सौ के बीज दो से दिन पर 60 रुपये प्रति घंटे के दर से सिंचाई का खर्च और खुद मेहनत करना पड़ा। भाव गिरने से फसल को खेत में ही छोड़ना पड़ रहा है। सब्जियों को पशुओं को खिला रहे हैं।- रामआसरे, किसान, बड़ागांव
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10 बिस्वा में भिंडी की फसल तैयार है। मंडी में दो से तीन रुपये किलो बिक रही है। मुनाफा तो दूर सिंचाई, बीज और खाद की लागत निकालना मुश्किल हो गया है। हालात तो अब ऐसे हो गए हैं कि तैयार फसल को मंडी ले जाने के बजाय पशुओं को खिलाना पड़ है। यही हाल नेनूआ, भिंडी, करेला, कोहड़ा, कद्दू, लौकी और बोड़ाक का भी है। - सुनील कुमार वर्मा, किसान, पिंडरा
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बोले आढ़ती-उत्पादन अधिक होने से दाम गिरे
पिंडरा स्थित नई सब्जी मंडी के आढ़ती हरिशंकर पटेल और अशोक पटेल का कहना है मंडी में आने वाले किसानों की फसल हम बेचने की कोशिश करते हैं। उत्पादन अधिक होने से दाम गिर गए हैं। ऐसे में किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
वर्जन
बनारस सब्जियों के निर्यात के मामले में हब बन कर उभरा है ऐसे में अगर किसानों को उनकी फसल का अच्छा भाव नहीं मिल रहा है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों को एफपीओ (किसान उत्पादन संगठन) से जुड़कर निर्यात का लाभ लेना चाहिए। जिले के सभी विकास खंड़ों में एफपीओ गठित है। इसके अलावा ऐसे किसान खुद एफपीओ का गठन कर निर्यात का विकल्प चुन सकते हैं। - डॉ सीबी सिंह, महाप्रबंधक, एपीडा
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80 रुपये में बिकी थी भिंडी
बीते मार्च के अंत में और अप्रैल में नेनूआ, भिंडी, करेला, कोहड़ा, कद्दू, लौकी, बोड़ा जैसी सब्जियों के दाम 60 से 80 रुपये प्रतिकिलो थे। जबकि बृहस्पतिवार को फुटकर बाजार में इन्हीं नेनूआ, भिंडी, करेला, कोहड़ा, कद्दू, लौकी, बोड़ा 10 से 20 रुपये किलो में बिका।