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जगतपुर पीजी कॉलेज में पकड़ा गया फर्जी परीक्षार्थी
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जगतपुर पीजी कॉलेज में बृहस्पतिवार को बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की द्वितीय व्यावसायिक परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया। केंद्राध्यक्ष ने आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया और इसकी सूचना काशी विद्यापीठ के कुलपति व परीक्षा नियंत्रक को दी। आरोपी ज्ञानपुर भदोही का रहने वाला है। पुलिस छात्र को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई कर रही है।
प्राचार्य डॉ. अनिल प्रताप सिंह ने बताया कि विद्यापीठ से संबद्ध डॉ. विजय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर भदहां कला कैथी का केंद्र जगतपुर पीजी कॉलेज को बनाया गया है। प्रथम पाली की परीक्षा के दौरान आधे घंटे बाद कक्ष संख्या 69 में कक्ष निरीक्षक आमोद कुमार श्रीवास्तव व सुभाष सिंह प्रवेश पत्र से मिलान कर उत्तर पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर रहे थे। इसी दौरान परीक्षार्थी धर्मेंद्र कुमार यादव के हस्ताक्षर प्रवेश पत्र से कुछ अलग महसूस हुए। कक्ष निरीक्षकों ने जब परीक्षार्थी से पूछताछ की तो उसने आधार कार्ड दिखाते हुए धर्मेंद्र होने का दावा किया। कक्ष निरीक्षक ने जब पुलिस की धमकी दी तो वह टूट गया और उसने स्वीकार किया कि वह धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा दे रहा था।
फीस कम कराने का दिया गया था लालच
फर्जी परीक्षार्थी ने अपना नाम प्रमोद कुमार पुत्र राधेश्याम बताया। उसने लिखित रूप में स्वीकार किया कि वह भी बीएमएस का छात्र है और धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा दे रहा है। धर्मेंद्र ने उसे फीस में बीस हजार रुपये कम कराने का आश्वासन दिया था। ऐसे में फीस कम कराने की लालच में आकर वह धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा देने के लिए तैयार हो गया।
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बनवाया था फर्जी आधार कार्ड
प्रमोद ने स्वीकार किया कि धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा देने के लिए उसने फर्जी आधार कार्ड भी तैयार कराया था। आधार कार्ड पर प्रमोद की फोटो व नाम धर्मेंद्र दर्ज है। यही नहीं प्रवेश पत्र पर भी फोटो प्रमोद की लगी हुई थी। इसके चलते दो पेपरों की परीक्षा में कक्ष निरीक्षक भी गच्चा खा गए।
दो बार पहले दे चुका था परीक्षा
बीएएमएस की परीक्षा के दौरान पकड़ा गया फर्जी परीक्षार्थी इसके पहले दो प्रश्नपत्रों की परीक्षाएं दे चुका था। हालांकि इस दौरान वह पकड़ा नहीं गया। हस्ताक्षर मिलान में संदेह होने के बाद ही उसे कक्ष निरीक्षकों ने पकड़ा।
जिसकी परीक्षा दे रहा, वह गाजीपुर का
कक्ष निरीक्षकों की पूछताछ में पता चला कि प्रमोद गाजीपुर के धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा देने बैठा था। गड़बड़ी की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसे परीक्षा से वंचित कर दिया। धर्मेंद्र गाजीपुर के दौलतपुर का रहने वाला है और वह जिस मेडिकल कॉलेज में अध्ययन कर रहा है वह उसके परिवार का ही है। उसने ही प्रमोद को उसकी फीस कम कराने का लालच देकर अपनी जगह परीक्षा देने के लिए तैयार किया था।
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प्राचार्य डॉ. अनिल प्रताप सिंह ने बताया कि विद्यापीठ से संबद्ध डॉ. विजय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर भदहां कला कैथी का केंद्र जगतपुर पीजी कॉलेज को बनाया गया है। प्रथम पाली की परीक्षा के दौरान आधे घंटे बाद कक्ष संख्या 69 में कक्ष निरीक्षक आमोद कुमार श्रीवास्तव व सुभाष सिंह प्रवेश पत्र से मिलान कर उत्तर पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर रहे थे। इसी दौरान परीक्षार्थी धर्मेंद्र कुमार यादव के हस्ताक्षर प्रवेश पत्र से कुछ अलग महसूस हुए। कक्ष निरीक्षकों ने जब परीक्षार्थी से पूछताछ की तो उसने आधार कार्ड दिखाते हुए धर्मेंद्र होने का दावा किया। कक्ष निरीक्षक ने जब पुलिस की धमकी दी तो वह टूट गया और उसने स्वीकार किया कि वह धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा दे रहा था।
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फीस कम कराने का दिया गया था लालच
फर्जी परीक्षार्थी ने अपना नाम प्रमोद कुमार पुत्र राधेश्याम बताया। उसने लिखित रूप में स्वीकार किया कि वह भी बीएमएस का छात्र है और धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा दे रहा है। धर्मेंद्र ने उसे फीस में बीस हजार रुपये कम कराने का आश्वासन दिया था। ऐसे में फीस कम कराने की लालच में आकर वह धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा देने के लिए तैयार हो गया।
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बनवाया था फर्जी आधार कार्ड
प्रमोद ने स्वीकार किया कि धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा देने के लिए उसने फर्जी आधार कार्ड भी तैयार कराया था। आधार कार्ड पर प्रमोद की फोटो व नाम धर्मेंद्र दर्ज है। यही नहीं प्रवेश पत्र पर भी फोटो प्रमोद की लगी हुई थी। इसके चलते दो पेपरों की परीक्षा में कक्ष निरीक्षक भी गच्चा खा गए।
दो बार पहले दे चुका था परीक्षा
बीएएमएस की परीक्षा के दौरान पकड़ा गया फर्जी परीक्षार्थी इसके पहले दो प्रश्नपत्रों की परीक्षाएं दे चुका था। हालांकि इस दौरान वह पकड़ा नहीं गया। हस्ताक्षर मिलान में संदेह होने के बाद ही उसे कक्ष निरीक्षकों ने पकड़ा।
जिसकी परीक्षा दे रहा, वह गाजीपुर का
कक्ष निरीक्षकों की पूछताछ में पता चला कि प्रमोद गाजीपुर के धर्मेंद्र के स्थान पर परीक्षा देने बैठा था। गड़बड़ी की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसे परीक्षा से वंचित कर दिया। धर्मेंद्र गाजीपुर के दौलतपुर का रहने वाला है और वह जिस मेडिकल कॉलेज में अध्ययन कर रहा है वह उसके परिवार का ही है। उसने ही प्रमोद को उसकी फीस कम कराने का लालच देकर अपनी जगह परीक्षा देने के लिए तैयार किया था।