{"_id":"5a8bff304f1c1b5e028b6441","slug":"fake-board-owners-luck-change-who-arrested-from-lucknow","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ से गिरफ्तार फर्जी बोर्ड संचालकों की देखते ही देखते पलटी किस्मत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ से गिरफ्तार फर्जी बोर्ड संचालकों की देखते ही देखते पलटी किस्मत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Tue, 20 Feb 2018 04:27 PM IST
विज्ञापन
पकड़े गए आरोपी
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से फर्जी बोर्ड चलाने के आरोप में लखनऊ के इंदिरानगर से गिरफ्तार आरोपियों की किस्मत किस्मत देखते ही देखते पलटी थी। गिरफ्तार सात में से तीन फर्जी बोर्ड संचालक आजमगढ़ निवासी हैं।
आजमगढ़ के राजमन गौड़ और जितेंद्र गौड़ पुत्र कैलाश गौड़ तथा राधेश्याम प्रजापति पुत्र पारस की किस्मत अचानक से बदल गई थी। आरोपियों ने अपने फर्जी बोर्ड से 62 शिक्षण संस्थाओं को जोड़ा था और आठ राज्यों में अपने स्टडी सेंटर भी बनाए थे, जिनके जरिए इन्होंने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।
लक्जरी गाड़ियां, गनर आदि के साथ इनकी शानशौकत देखकर गांववासी भी हैरान थे। गिरफ्तारी की खबर पहुंचने के बाद लोगों को पता चला कि इन्होंने फर्जी बोर्ड खोलकर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।
विज्ञापन
बता दें कि ये ठग हाईस्कूल और इंटर के 4000 से ज्यादा छात्रों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर उन्हें अंकपत्र व प्रमाणपत्र देते हुए रुपया वसूलते थे। इन्होंने www.upsosb.ac.in, www.upsos.co.in और www.upsos.in के नाम से तीन वेबसाइट बना रखी थीं। उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और झारखंड में फर्जी बोर्ड के हजारों स्टडी सेंटर खोलकर ठगी का धंधा किया जा रहा था।
ठगी के इस धंधे का खुलासा रविवार को हुआ था। अब जांच के बाद एक के बाद एक कई सच्चाई सामने आ रही है। उधर, कैलाश गौड़ ने अपने दोनों पुत्रों को निधि फाइनेंस नामक कंपनी चलाने का दावा किया है।
बरदह थाना क्षेत्र के रवनिया निवासी कैलाश गौड़ के तीन पुत्र हैं। इनमें से दो राजमन और जितेंद्र गौड़ को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। इनका एक भाई शैलेंद्र गौड़ मुंबई में काम करता है।
कैलाश गौड़ ने बताया कि पहले ये भी मुंबई में रहते थे। चार साल पूर्व वहां की जमीन बेचकर जौनपुर के गौरा बादशाहपुर थाना के बारी रोड पर जेबीएस नाम का प्राइमरी स्तर का विद्यालय खोला था। उसी में पॉलीटेक्निक भी चला रहे थे पर मान्यता नहीं होने से विद्यालय बंद कर दिया। सामान, वाहन बेचकर घर बनवाया है।
विज्ञापन
आजमगढ़ के राजमन गौड़ और जितेंद्र गौड़ पुत्र कैलाश गौड़ तथा राधेश्याम प्रजापति पुत्र पारस की किस्मत अचानक से बदल गई थी। आरोपियों ने अपने फर्जी बोर्ड से 62 शिक्षण संस्थाओं को जोड़ा था और आठ राज्यों में अपने स्टडी सेंटर भी बनाए थे, जिनके जरिए इन्होंने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।
विज्ञापन
लक्जरी गाड़ियां, गनर आदि के साथ इनकी शानशौकत देखकर गांववासी भी हैरान थे। गिरफ्तारी की खबर पहुंचने के बाद लोगों को पता चला कि इन्होंने फर्जी बोर्ड खोलकर करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।
विज्ञापन
बता दें कि ये ठग हाईस्कूल और इंटर के 4000 से ज्यादा छात्रों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर उन्हें अंकपत्र व प्रमाणपत्र देते हुए रुपया वसूलते थे। इन्होंने www.upsosb.ac.in, www.upsos.co.in और www.upsos.in के नाम से तीन वेबसाइट बना रखी थीं। उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और झारखंड में फर्जी बोर्ड के हजारों स्टडी सेंटर खोलकर ठगी का धंधा किया जा रहा था।
ठगी के इस धंधे का खुलासा रविवार को हुआ था। अब जांच के बाद एक के बाद एक कई सच्चाई सामने आ रही है। उधर, कैलाश गौड़ ने अपने दोनों पुत्रों को निधि फाइनेंस नामक कंपनी चलाने का दावा किया है।
बरदह थाना क्षेत्र के रवनिया निवासी कैलाश गौड़ के तीन पुत्र हैं। इनमें से दो राजमन और जितेंद्र गौड़ को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। इनका एक भाई शैलेंद्र गौड़ मुंबई में काम करता है।
कैलाश गौड़ ने बताया कि पहले ये भी मुंबई में रहते थे। चार साल पूर्व वहां की जमीन बेचकर जौनपुर के गौरा बादशाहपुर थाना के बारी रोड पर जेबीएस नाम का प्राइमरी स्तर का विद्यालय खोला था। उसी में पॉलीटेक्निक भी चला रहे थे पर मान्यता नहीं होने से विद्यालय बंद कर दिया। सामान, वाहन बेचकर घर बनवाया है।
छह साल पहले खोला ता पहला स्कूल
राजमन गौड़ का गांव स्थित मकान
- फोटो : अमर उजाला
उनका दावा है कि विद्यालय के बाद राजमन और जितेंद्र ने लखनऊ में निधि फाइनेंस कंपनी खोली है और उसी को चला रहे हैं। जमीन के नाम पर मात्र एक बीघा खेत है। वहीं, गांव के लोगों ने बताया कि राजमन आदि ने छह साल पहले ठेकमा में किराए के मकान में विद्यालय खोला था। एक दिन रात को अचानक से स्कूल बंद कर गायब हो गया।
मकान मालिक ने काफी इंतजार किया। बाद में ताला तोड़ कर सामान दान में दे दिया। मकान मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इनकी गतिविधियां उसी समय संदिग्ध थीं। ये उस समय भी लोगों को स्कूल खोलने और उसकी मान्यता दिलाने का झांसा देते थे। हाल के दिनों में इनके परिवार के पास खूब पैसा आया है। गांव में एक साल पहले तीन मंजिला मकान बना है।
20 दिन पहले आधा दर्जन गाड़ियों और सुरक्षा गार्डों के साथ गांव आए थे। जितेंद्र जिसकी शादी हाल ही में हुई है उसमें भी जमकर पैसे उड़ाए गए थे। वहीं, कैलाश गौड़ इन बातों से सिरे से इकार कर रहे थे। वहीं, गिरफ्तार इनका तीसरा साथी राधेश्याम प्रजापति के पिता खरगीपुर निवासी पारस प्रजापति के तीन लड़के और हैं। राधेश्याम तीसरे नंबर का है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय से से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग करने के बाद यह रवनिया निवासी राजमन के साथ निधि फाइनेंस कंपनी में काम करने लगा। ग्रामीणों का कहना था कि उसके कच्चे मकान के बगल में नया बन रहा मकान उसी का है।
जबकि राधेश्याम की पत्नी इसे अपना मानने से भी इनकार किया। एसओ बरदह सुरेश चंद्र यादव ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ यहां कोई मुकदमा नहीं मिला है। एसटीएफ अभी यहां तक नहीं पहुंची है।
मकान मालिक ने काफी इंतजार किया। बाद में ताला तोड़ कर सामान दान में दे दिया। मकान मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इनकी गतिविधियां उसी समय संदिग्ध थीं। ये उस समय भी लोगों को स्कूल खोलने और उसकी मान्यता दिलाने का झांसा देते थे। हाल के दिनों में इनके परिवार के पास खूब पैसा आया है। गांव में एक साल पहले तीन मंजिला मकान बना है।
20 दिन पहले आधा दर्जन गाड़ियों और सुरक्षा गार्डों के साथ गांव आए थे। जितेंद्र जिसकी शादी हाल ही में हुई है उसमें भी जमकर पैसे उड़ाए गए थे। वहीं, कैलाश गौड़ इन बातों से सिरे से इकार कर रहे थे। वहीं, गिरफ्तार इनका तीसरा साथी राधेश्याम प्रजापति के पिता खरगीपुर निवासी पारस प्रजापति के तीन लड़के और हैं। राधेश्याम तीसरे नंबर का है।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय से से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग करने के बाद यह रवनिया निवासी राजमन के साथ निधि फाइनेंस कंपनी में काम करने लगा। ग्रामीणों का कहना था कि उसके कच्चे मकान के बगल में नया बन रहा मकान उसी का है।
जबकि राधेश्याम की पत्नी इसे अपना मानने से भी इनकार किया। एसओ बरदह सुरेश चंद्र यादव ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ यहां कोई मुकदमा नहीं मिला है। एसटीएफ अभी यहां तक नहीं पहुंची है।
ऐसे सामने आया मामला
छापेमारी में बरामद किए गए कागजात
- फोटो : amar ujala
पांच साल से चल रहे फर्जी बोर्ड का पूरा मामला एक छात्र की शिकायत के बाद सामने आया। एएसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह ने बताया कि फर्जी बोर्ड का खेल पासपोर्ट ऑफिस ने पकड़ा था जिसके बाद एक छात्र ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
दरअसल जौनपुर के शाहगंज निवासी एक छात्र ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद से संबद्ध वहीं के एक संस्थान में परीक्षा दी थी। उक्त छात्र ने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया, जिसमें अपने अंकपत्र व प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए।
पासपोर्ट ऑफिस ने जांच में छात्र के अंकपत्र व प्रमाणपत्र फर्जी पाते हुए उसका आवेदन निरस्त कर दिया। छात्र जौनपुर स्थित संस्थान गया और फर्जीवाड़े की शिकायत की। वहां उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद छात्र ने शाहगंज कोतवाली में फर्जी बोर्ड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। एसटीएफ ने इस मामले को संज्ञान में लिया और पासपोर्ट ऑफिस पहुंचकर छानबीन शुरू की तो ऐसे कई केस सामने आए। इसके बाद छानबीन शुरू की गई।
एएसपी के मुताबिक, प्रबंधक सभी स्टडी सेंटर व संबद्ध संस्थानों से छात्र-छात्राओं का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराता था। एक साल बाद परीक्षा की औपचारिकता पूरी करके उन्हें अंकपत्र व प्रमाणपत्र दे दिए जाते थे।
छात्र-छात्राओं के अंकपत्र व प्रमाणपत्र वेबसाइट पर ही अपलोड कर दिए जाते थे। छात्र-छात्राएं वेबसाइट से अंकपत्र व प्रमाणपत्र डाउनलोड कर लेते थे।
दरअसल जौनपुर के शाहगंज निवासी एक छात्र ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद से संबद्ध वहीं के एक संस्थान में परीक्षा दी थी। उक्त छात्र ने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया, जिसमें अपने अंकपत्र व प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए।
पासपोर्ट ऑफिस ने जांच में छात्र के अंकपत्र व प्रमाणपत्र फर्जी पाते हुए उसका आवेदन निरस्त कर दिया। छात्र जौनपुर स्थित संस्थान गया और फर्जीवाड़े की शिकायत की। वहां उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद छात्र ने शाहगंज कोतवाली में फर्जी बोर्ड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। एसटीएफ ने इस मामले को संज्ञान में लिया और पासपोर्ट ऑफिस पहुंचकर छानबीन शुरू की तो ऐसे कई केस सामने आए। इसके बाद छानबीन शुरू की गई।
एएसपी के मुताबिक, प्रबंधक सभी स्टडी सेंटर व संबद्ध संस्थानों से छात्र-छात्राओं का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराता था। एक साल बाद परीक्षा की औपचारिकता पूरी करके उन्हें अंकपत्र व प्रमाणपत्र दे दिए जाते थे।
छात्र-छात्राओं के अंकपत्र व प्रमाणपत्र वेबसाइट पर ही अपलोड कर दिए जाते थे। छात्र-छात्राएं वेबसाइट से अंकपत्र व प्रमाणपत्र डाउनलोड कर लेते थे।