फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   facebook help a daughters to meet her father Sculpture

Facebook ने 'इंडिया' को पहुंचाया पिता की कलाकृतियों तक

Tue, 23 Jan 2018 06:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 23 Jan 2018 06:09 PM IST
विज्ञापन
facebook help a daughters to meet her father Sculpture
आस्ट्रेलिया के कलाकार ने 2013 में रामछाटपार में बनाई थीं कलाकृतियां - फोटो : अमर उजाला
आस्ट्रेलिया की रहने वाली इंडिया मेहता को फेसबुक ने उनकी पिता की कलाकृतियों तक पहुंचा दिया। इंडिया को पता ही नहीं था कि उनके पिता फ्रेड मेहता की तीन दर्जन से अधिक मूर्तियां और चित्र बनारस में हैं। पिछले कुछ माह पूर्व जब इंडिया ने अपने पिता की मृत्यु की सूचना फेसबुक पर पोस्ट की तो फ्रेड के मूर्तिकार मित्र काशी के मदनलाल दु:खी हो गए।
विज्ञापन

उन्होंने फेसबुक के जरिए इंडिया मेहता से संपर्क किया और उन्हें उनके पिता की कृतियों के बारे में जानकारी दी। जानकारी से आश्चर्यचकित इंडिया मेहता ने बीएचयू के प्रोफेसर मदनलाल से संपर्क किया और पिता की कृतियों के दर्शन के लिए बेचैन हो उठी। 
विज्ञापन

facebook help a daughters to meet her father Sculpture
फेसबुक पर फ्रेड मेहता की मृत्यु की सूचना पर मदनलाल ने दी जानकारी - फोटो : अमर उजाला
जानकारी से आश्चर्यचकित इंडिया मेहता ने  मदनलाल से संपर्क किया और पिता की कृतियों के दर्शन के लिए बेचैन हो उठी। पिता की बनाई हुई कृतियों को देखने के वह लिए काशी आ गई। फ्रेड मेहता की कलाकृतियों को देखकर इंडिया भावुक हो गईं। इन कलाकृतियों को फ्रेड मेहता ने 2013 में रामछाटपार शिल्पन्यास में तीन महीने लगातार रहकर तैयार किया था।

इन कृतियों को अंतिम स्वरूप देने में बीएचयू के दृश्य कला संकाय के मूर्तिकार मदनलाल और उनके शिष्यों ने सहयोग किया था। इनमें मेटल से तैयार 21 मूर्ति शिल्प तथा पत्थरों और कागज पर उकेरी गई 25 कलाकृतियां शामिल हैं। 
 

facebook help a daughters to meet her father Sculpture
आस्ट्रेलिया की रहने वाली इंडिया मेहता - फोटो : facebook

इंडिया मेहता ने बताया कि मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरे पिता ने अपनी कृतियों के साथ ही बहुत सारी निशानियां भी बनारस में छोड़ रखी हैं। उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले सामान देख कर मैं पुन: अपने पिता को अपने पास महसूस कर रही हूं। मदनलाल ने बताया कि फेसबुक से जानकारी मिलने के बाद मैंने इंडिया से कहा था कि वह जब चाहे अपने पिता की कलाकृतियों को अपने साथ ले जा सकती है। मुझे भी बहुत संतोष मिला कि बेटी को उसके पिता की यादों से मिला सका।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed