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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Eyes welled up painful Nauhas in Saathe procession mourning of chains last day of Gham-e-Hussain

Varanasi News: साठे के जुलूस में दर्द भरे नौहों पर छलक उठीं आंखें, गम-ए-हुसैन के आखिरी दिन जंजीर का मातम

Fri, 13 Sep 2024 03:36 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 13 Sep 2024 03:36 PM IST
सार

Varanasi News: दो महीने आठ दिन गम के दिन पूरे होने पर शुक्रवार को शिया हजरात ने खुशी मनाई। गमों का लिबास उतारकर खुशियों के नए लिबास ओढ़ा। घरों में पकवान बने। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैय्यद फरमान हैदर ने बताया कि शिया वर्ग अब यौमे नबी वीक मनाएगा। घरों व इमामबाड़ों में महफिलें होंगी।

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Eyes welled up painful Nauhas in Saathe procession mourning of chains last day of Gham-e-Hussain
मातम मनाते लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गम-ए-हुसैन के अंतिम दिन साठे के जुलूस में हर आंख अश्कबार हो उठी। दर्द भरे नौहों और करबला के वाकियात सुनकर जायरीन की आंखों से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। साठे का जुलूस दालमंडी से निकला और इसी के साथ दो महीने आठ दिन के गम का सिलसिला खत्म हो गया।

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बृहस्पतिवार को या हुसैन... की दर्द भरी सदाओं के बीच पुरानी अदालत दालमंडी स्थित शब्बीर और सफदर के अजाखाने से निकले जुलूस में शहीदाने करबला को आंसुओं का नजराना पेश किया गया। जुलूस में शामिल अलम, दुलदुल, तुरबत और आमारी की जियारत की गई। 
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रास्ते भर अंजुमन हैदरी के दर्द भरे नौहे अकीदतमंदों की आंखें नम करते रहे। जुलूस नई सड़क काली महल पहुंचा तो यहां लोगों ने आमारी का इस्तकबाल किया। जुलूस नौहा और मातम करता हुआ दरगाह-ए-फातमान पहुंचा। यहां अलविदाई मजलिस हुई। 

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घरों व इमामबाड़ों में होंगी महफिलें
मजलिस को खिताब करते हुए लखनऊ के मौलाना इरशाद अब्बास नकवी ने कहा कि इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को शहीद करने के बाद यजीद के हुक्म पर उनकी औरतों, बच्चों और बीमार बेटे को पैदल करबला से कूफा और कूफा से शाम तक ले जाया गया। यजीदी फौज ने बच्चों और औरतों की गर्दनी रस्सी से बांध दी थी। 

औरतें उठती थीं तो बच्चों का गला कसने लगता था और वो दर्द से तड़प उठते थे। बच्चों को दर्द से बचाने के लिए औरतों ने 3590 किमी का सफर कमर झुकाकर पूरा किया। यही नहीं यदि कोई औरत या बच्चा चलते चलते रुक जाता था तो उसे कोड़ों से मारा जाता था। मौलाना की तकरीर सुनकर वहां मौजूद लोग बिलख पड़े। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि इमाम हसन असकरी की शहादत पर ताबूत भी उठाया गया। आखिर में असकरी रजा सईद ने शुक्रिया अदा किया।

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