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Varanasi News: ट्रॉमा सम्मेलन में जीवन बचाने की राह पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
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आईएमएस बीएचयू में शुक्रवार को इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर (आईएसटीएसी) के 16वें वार्षिक सम्मेलन ‘ट्रॉमा 2026’ का उद्घाटन हुआ। चार दिवसीय इस सम्मेलन का उद्देश्य ट्रॉमा देखभाल के क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित उपचार और बेहतर पद्धतियों का आदान-प्रदान करना है।
सम्मेलन का विषय बियॉन्ड द गोल्डन आवर- लेवलिंग अप ट्रॉमा केयर है। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि युवा चिकित्सकों को प्रशिक्षण और अनुसंधान से तैयार करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने आम नागरिकों को भी प्रशिक्षित और जागरूक करने पर जोर दिया। प्राे. चतुर्वेदी ने सड़क सुरक्षा के लिए अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और समय पर उपचार से जीवन बचाए जा सकते हैं। ट्रॉमा देखभाल में निवेश से जीवन बचाने के साथ अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है।
इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर के अध्यक्ष एमसी मिश्रा ने जागरूकता अभियान और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से मौतों को कम करने के प्रयासों पर जोर दिया। आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने कहा कि ट्रॉमा के उपचार में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर प्राथमिक सहायता और घायल व्यक्ति को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एडवांस्ड ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट और बेसिक लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। संस्थान में भी इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कौशल विकास किया जा रहा है।
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प्रभारी संकाय प्रमुख प्रो. शंपा अनुपुरबा ने कहा कि ट्रॉमा का प्रभावी प्रबंधन सामूहिक प्रयास पर निर्भर करता है। आयोजन अध्यक्ष एसके भारतीय ने मृत्यु और दिव्यांगता कम करने के लिए समय पर आकलन और बहुविषयक विशेषज्ञता को आवश्यक बताया। आईएसटीएसी की सचिव सुष्मा सागर ने बताया कि संगठन का उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुसंधान और शिक्षा से ट्रॉमा मौतों को कम करना है।
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सम्मेलन का विषय बियॉन्ड द गोल्डन आवर- लेवलिंग अप ट्रॉमा केयर है। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि युवा चिकित्सकों को प्रशिक्षण और अनुसंधान से तैयार करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने आम नागरिकों को भी प्रशिक्षित और जागरूक करने पर जोर दिया। प्राे. चतुर्वेदी ने सड़क सुरक्षा के लिए अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और समय पर उपचार से जीवन बचाए जा सकते हैं। ट्रॉमा देखभाल में निवेश से जीवन बचाने के साथ अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है।
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इंडियन सोसाइटी ऑफ ट्रॉमा एंड एक्यूट केयर के अध्यक्ष एमसी मिश्रा ने जागरूकता अभियान और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से मौतों को कम करने के प्रयासों पर जोर दिया। आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने कहा कि ट्रॉमा के उपचार में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर प्राथमिक सहायता और घायल व्यक्ति को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एडवांस्ड ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट और बेसिक लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। संस्थान में भी इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कौशल विकास किया जा रहा है।
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प्रभारी संकाय प्रमुख प्रो. शंपा अनुपुरबा ने कहा कि ट्रॉमा का प्रभावी प्रबंधन सामूहिक प्रयास पर निर्भर करता है। आयोजन अध्यक्ष एसके भारतीय ने मृत्यु और दिव्यांगता कम करने के लिए समय पर आकलन और बहुविषयक विशेषज्ञता को आवश्यक बताया। आईएसटीएसी की सचिव सुष्मा सागर ने बताया कि संगठन का उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुसंधान और शिक्षा से ट्रॉमा मौतों को कम करना है।