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ज्ञानवापी: एएसआई सर्वे में मिले साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएंगे, जिला अदालत का आदेश, मसाजिद कमेटी ने जताई आपत्ति

Thu, 14 Sep 2023 05:12 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 14 Sep 2023 05:12 PM IST
सार

Gyanvapi: ज्ञानवापी परिसर में जारी एएसआई सर्वे के दौरान मिल रहे साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के आवेदन जिला अदालत का आदेश गुरुवार को आ गया। वादिनी राखी सिंह के आवदन पर सुनवाई के बाद सुरक्षित रखे फैसले पर जिला जज ने वादी के पक्ष में निर्णय दिया। 

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Evidence found in Gyanvapi ASI survey will be kept safe court orders  Masjid Committee objection
ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे जारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने गुरुवार को ही आदेश दिया है कि  ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान हिंदू धर्म और पूजा पद्धति से संबंधित जो भी सामग्रियां मिलें, उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित अधिकारी को सुपुर्द किया जाए। संबंधित अधिकारी उन सामग्रियों को सुरक्षित रखेंगे और जब भी अदालत तलब करेगी उन्हें उसे प्रस्तुत करना होगा। 

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जिला जज की अदालत ने कहा कि सर्वे के दौरान ज्ञानवापी से प्राप्त होने वाली सामग्रियों की सूची एएसआई द्वारा बनाई जाएगी। उस सूची की एक प्रति एएसआई द्वारा अदालत में दाखिल की जाएगी। साथ ही, एक प्रति जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। मां शृंगार गौरी मुकदमे की वादिनी राखी सिंह ने ज्ञानवापी में सर्वे के दौरान मिलने वाले हिंदू धर्म से संबंधित साक्ष्यों व प्रतीक चिह्नों को सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था।
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इसके अलावा ज्ञानवापी में नमाजियों की संख्या सीमित करने और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को परिसर में रंगाई-पुताई से रोकने का भी अनुरोध अदालत से किया था। राखी सिंह का पक्ष अदालत में अधिवक्ता सौरभ तिवारी, मानबहादुर सिंह और अनुपम द्विवेदी ने रखा। राखी सिंह और मसाजिद कमेटी का पक्ष सुनने के बाद जिला जज की अदालत ने अपना आदेश सुनाया।
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जिला जज ने कहा- यह उचित प्रतीत होता है

जिला जज की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह उचित प्रतीत होता है कि एएसआई के सर्वे के दौरान ज्ञानवापी से जो भी सामग्री मिले, जो कि इस मुकदमे के तथ्यों से संबंधित हो या हिंदू धर्म व पूजा पद्धति से संबंधित हो या ऐतिहासिक व पुरातात्विक दृष्टिकोण से मुकदमे के निस्तारण के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, उन सभी को जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित अधिकारी को सौंप कर सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही जिला जज की अदालत ने मां शृंगार गौरी मुकदमे की चार अन्य वादिनी के प्रार्थना पत्र और अन्य लंबित प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तिथि नियत कर दी।

अपने आदेश में कोई टिप्पणी नहीं की

अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने कहा कि अपने आवेदन में राखी सिंह ने ज्ञानवापी में नमाजियों की संख्या सीमित अथवा विनियमित करने और वहां अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को रंगाई-पुताई कराने से रोकने की भी प्रार्थना की थी। मगर, उक्त दोनों बिंदुओं पर अदालत ने अपने आदेश में कोई टिप्पणी नहीं की।

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