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तर्पण और समर्पण की भूमि का कण-कण शंकर और बच्चा-बच्चा राम : अशोक सिंघल
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असम सरकार के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल ने कहा कि मां कामाख्या धाम से काशी आने की चाह वर्षों से रही जो इस आयोजन के माध्यम से पूरी हुई। तर्पण और समर्पण की इस भूमि का कण-कण शंकर और बच्चा-बच्चा राम है। विद्वानों से भरी इस नगरी में विचार व्यक्त करना अपने-आप में चुनौती है। पावन धाम का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं और उनका उद्देश्य एवं संकल्प देश का पुनर्जागरण एवं पुर्नउत्थान करना है।
शिवाला स्थित श्री श्री अन्नदा देवी मातृ आश्रम में श्री अन्नदा देवी कन्या गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में वह बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। अशोक सिंघल ने कहा कि जब संस्कृति, संस्कृत और सनातन का संक्रमण काल चल रहा था, उन कठिन-जटिल और विषम परिस्थितियों में संस्कृत महाविद्यालय की कल्पना और उसमें कन्याओं को शिक्षित करना, यह अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। इसी शक्ति, ऊर्जा और ईश्वरीय प्रेरणा से गंगा देवी ने गुरुकुल की स्थापना की जो आज भी देश में संस्कृत की अनंत ज्योति के रूप में प्रज्ज्वलित है। समारोह का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री, भाजपा कार्यकारिणी समिति के सदस्य असित दास ने दीप जलाकर एवं गंगा देवी के चित्र पर माल्यार्पण से किया। स्वागत प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने किया। मुख्य अतिथि ने डॉ. सिद्धनाथ श्रीवास्तव द्वारा संपादित स्मारिका का विमोचन भी किया। मुख्य अतिथि का स्वागत आश्रम की संचालिका ब्रह्मचारिणी कल्याणी देवी, ट्रस्टी वासुदेव सेन एवं महाविद्यालय की प्रबंधक दीप्ति तलापात्र ने किया। संचालन डॉ. सरोज कुमार पांडेय ने किया। छात्रों ने विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। शैली तिवारी ने कथक नृत्य, राजलक्ष्मी ने बांसुरी वादन किया। मातृ संघ, कोलकाता के कलाकारों ने गंगा मां पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। वहीं, पार्थ नंदी टीम द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी गई।
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शिवाला स्थित श्री श्री अन्नदा देवी मातृ आश्रम में श्री अन्नदा देवी कन्या गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में वह बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। अशोक सिंघल ने कहा कि जब संस्कृति, संस्कृत और सनातन का संक्रमण काल चल रहा था, उन कठिन-जटिल और विषम परिस्थितियों में संस्कृत महाविद्यालय की कल्पना और उसमें कन्याओं को शिक्षित करना, यह अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। इसी शक्ति, ऊर्जा और ईश्वरीय प्रेरणा से गंगा देवी ने गुरुकुल की स्थापना की जो आज भी देश में संस्कृत की अनंत ज्योति के रूप में प्रज्ज्वलित है। समारोह का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री, भाजपा कार्यकारिणी समिति के सदस्य असित दास ने दीप जलाकर एवं गंगा देवी के चित्र पर माल्यार्पण से किया। स्वागत प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने किया। मुख्य अतिथि ने डॉ. सिद्धनाथ श्रीवास्तव द्वारा संपादित स्मारिका का विमोचन भी किया। मुख्य अतिथि का स्वागत आश्रम की संचालिका ब्रह्मचारिणी कल्याणी देवी, ट्रस्टी वासुदेव सेन एवं महाविद्यालय की प्रबंधक दीप्ति तलापात्र ने किया। संचालन डॉ. सरोज कुमार पांडेय ने किया। छात्रों ने विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। शैली तिवारी ने कथक नृत्य, राजलक्ष्मी ने बांसुरी वादन किया। मातृ संघ, कोलकाता के कलाकारों ने गंगा मां पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। वहीं, पार्थ नंदी टीम द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी गई।
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