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प्रतिबंध के बाद भी छोटे वाहनों में ठूंस जा रहे बच्चे
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स्कूल बस में बैठे गाजियाबाद के एक छात्र की मौत के बाद शासन भले ही मानकों को नहीं मानने वाले स्कूली वाहनों को हटाने के लिए सख्त है, मगर वाराणसी में इसका असर अभी नहीं हो रहा है। यहां धड़ल्ले से स्कूल के बच्चों को वैन, ऑटो, ई रिक्शा, विक्रम से ढोए जा रहे हैं। आलम यह है कि सुबह और दोपहर में स्कूली बसों से ज्यादा प्रतिबंधित वाहन बच्चों को लेकर सड़क पर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि मंगलवार को अभियान तो चला लेकिन शहरी क्षेत्र में इस अभियान का असर नहीं दिखाई दिया।
दरअसल, ढाई हजार से ज्यादा पंजीकृत बसों की आड़ में करीब दो हजार वाहन परिवहन विभाग के रिकार्ड के बिना ही बच्चों को स्कूलों से घर तक पहुंचा रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि खुली वैन, ऑटो और ई रिक्शा में बच्चे लटकते हुए बैठाए जाते हैं। क्षमता से ज्यादा बच्चों को लेकर ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
इन नियमों की उड़ाई जा रहीं धज्जियां
छोटे वाहनों को लेकर स्कूलों को भी ज्यादा खबर नहीं रहती है और परिवहन विभाग भी इनकी मनमानियों पर बेखबर रहता है। दरअसल, 14 सीट से नीचे के वाहन में स्कूली बच्चों को ढोया नहीं जा सकता है। वाहन में जितनी सीटें हैं उतने ही बच्चे उसमें बैठने चाहिए। वाहन स्कूली प्रबंधन के नाम होना चाहिए। स्कूल के नाम से पंजीकृत वाहनों से परिवहन विभाग टैक्स नहीं लेता। सिर्फ उन्हें हर साल वाहन फिटनेस की जांच करानी होती है। मगर, इसकी आड़ में वैन, ऑटो सहित अन्य वाहन भी स्कूलों से जुड़े हैं।
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30 विद्यालयों के 40 वाहनों का हुआ चलान
वाराणसी। स्कूल वाहनों के खिलाफ मंगलवार को परिवहन विभाग ने जांच अभियान चलाया गया। इसमें 30 विद्यालयों के 40 वाहन मानक के विपरित पाए गए। जिनके खिलाफ चार लाख 67 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। जबकि छह वाहनों को सीज कर दिया गया।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सर्वेश कुमार चतुर्वेदी की अगुवाई में यात्रीकर अधिकारी केकी मिश्रा ने बच्चाें की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल वाहनों के खिलाफ जांच अभियान पूरे दिन चला। इसमें संत अतुलानंद, गुरुनानक इंग्लिश स्कूल, आर्य महिला महाविद्यालय, डॉ. अमरीत लाल मेमोरियल स्कूल, कमला शिक्षण समिति, जीवनदीप शिक्षण संस्थान, दी आर्यन इंटरनेशनल स्कूल, हैप्पी मॉडल स्कूल, प्रिंसपल स्कूल, एसओएस स्कूल, लॉर्ड शिवा शिक्षण संस्थान, लिटिल हेवेल स्कूल, वाराणसी पब्लिक स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, राज इंग्लिश स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर, एमआर जयपुरिया, सन्नी विल्ला, विकल्प शिक्षण संस्थान, एसओएस शिक्षण संस्थान, सुभाष एकेडमी, हैप्पी होम, ग्रीन विल्ला, सीएसजी पब्लिक स्कूल, पोरनियर सैनिक स्कूल, स्वामी हर्ष सेवानंद स्कूल, विवेकानंद एजुकेशनल एम एल पब्लिक स्कूल, संत जोसेफ पब्लिक स्कूल और जेएमएस स्कूल के वाहनों की जांच की गई। जिसमें छह वाहनों को सीज कुल चार लाख 67 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
कैंट बस अड्डे पर चला संयुक्त अभियान
एडीसीपी दिनेश पुरी और यात्रीकर अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र की अगुवाई में कैंट बस अड्डे के आसपास अभियान चलाया गया। इस दौरान नो पार्किँग, बिना परमिट वाले एक दर्जन वाहनों का चालान किया गया। कुछ वाहनों को पुलिस लाइन में जमा कराया गया है।
हम भी जुुटे हैं, मगर अभिभावक भी जागे
एआरटीओ सर्वेश चतुर्वेदी का कहना है कि स्कूल फीस की तरह ही बसों और अन्य वाहनों की पुख्ता जानकारी अभिभावक लें। इसमें कई बार ऑटो व ई रिक्शा आदि अभिभावक अपने स्तर पर लगाते हैं। उन्हें इस बारे में थोड़ा जागरूक होना होगा और स्कूलों पर मानकों के पालन का दबाव अवश्य बनाएं।
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दरअसल, ढाई हजार से ज्यादा पंजीकृत बसों की आड़ में करीब दो हजार वाहन परिवहन विभाग के रिकार्ड के बिना ही बच्चों को स्कूलों से घर तक पहुंचा रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि खुली वैन, ऑटो और ई रिक्शा में बच्चे लटकते हुए बैठाए जाते हैं। क्षमता से ज्यादा बच्चों को लेकर ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
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इन नियमों की उड़ाई जा रहीं धज्जियां
छोटे वाहनों को लेकर स्कूलों को भी ज्यादा खबर नहीं रहती है और परिवहन विभाग भी इनकी मनमानियों पर बेखबर रहता है। दरअसल, 14 सीट से नीचे के वाहन में स्कूली बच्चों को ढोया नहीं जा सकता है। वाहन में जितनी सीटें हैं उतने ही बच्चे उसमें बैठने चाहिए। वाहन स्कूली प्रबंधन के नाम होना चाहिए। स्कूल के नाम से पंजीकृत वाहनों से परिवहन विभाग टैक्स नहीं लेता। सिर्फ उन्हें हर साल वाहन फिटनेस की जांच करानी होती है। मगर, इसकी आड़ में वैन, ऑटो सहित अन्य वाहन भी स्कूलों से जुड़े हैं।
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30 विद्यालयों के 40 वाहनों का हुआ चलान
वाराणसी। स्कूल वाहनों के खिलाफ मंगलवार को परिवहन विभाग ने जांच अभियान चलाया गया। इसमें 30 विद्यालयों के 40 वाहन मानक के विपरित पाए गए। जिनके खिलाफ चार लाख 67 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। जबकि छह वाहनों को सीज कर दिया गया।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सर्वेश कुमार चतुर्वेदी की अगुवाई में यात्रीकर अधिकारी केकी मिश्रा ने बच्चाें की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल वाहनों के खिलाफ जांच अभियान पूरे दिन चला। इसमें संत अतुलानंद, गुरुनानक इंग्लिश स्कूल, आर्य महिला महाविद्यालय, डॉ. अमरीत लाल मेमोरियल स्कूल, कमला शिक्षण समिति, जीवनदीप शिक्षण संस्थान, दी आर्यन इंटरनेशनल स्कूल, हैप्पी मॉडल स्कूल, प्रिंसपल स्कूल, एसओएस स्कूल, लॉर्ड शिवा शिक्षण संस्थान, लिटिल हेवेल स्कूल, वाराणसी पब्लिक स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, राज इंग्लिश स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर, एमआर जयपुरिया, सन्नी विल्ला, विकल्प शिक्षण संस्थान, एसओएस शिक्षण संस्थान, सुभाष एकेडमी, हैप्पी होम, ग्रीन विल्ला, सीएसजी पब्लिक स्कूल, पोरनियर सैनिक स्कूल, स्वामी हर्ष सेवानंद स्कूल, विवेकानंद एजुकेशनल एम एल पब्लिक स्कूल, संत जोसेफ पब्लिक स्कूल और जेएमएस स्कूल के वाहनों की जांच की गई। जिसमें छह वाहनों को सीज कुल चार लाख 67 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
कैंट बस अड्डे पर चला संयुक्त अभियान
एडीसीपी दिनेश पुरी और यात्रीकर अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र की अगुवाई में कैंट बस अड्डे के आसपास अभियान चलाया गया। इस दौरान नो पार्किँग, बिना परमिट वाले एक दर्जन वाहनों का चालान किया गया। कुछ वाहनों को पुलिस लाइन में जमा कराया गया है।
हम भी जुुटे हैं, मगर अभिभावक भी जागे
एआरटीओ सर्वेश चतुर्वेदी का कहना है कि स्कूल फीस की तरह ही बसों और अन्य वाहनों की पुख्ता जानकारी अभिभावक लें। इसमें कई बार ऑटो व ई रिक्शा आदि अभिभावक अपने स्तर पर लगाते हैं। उन्हें इस बारे में थोड़ा जागरूक होना होगा और स्कूलों पर मानकों के पालन का दबाव अवश्य बनाएं।