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Varanasi News: गंगा किनारे टेंट सिटी बनाने में पर्यावरण मंत्रालय पर लगा 25 हजार जुर्माना
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वाराणसी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ( एनजीटी) ने गंगा किनारे रेती उस पार टेंट सिटी बनाने के मामले में शुक्रवार को कड़ा रुख अख्तियार किया। एनजीटी ने जवाब दाखिल करने में देरी का हवाला देकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही टेंट सिटी बनाने वाली कंपनियों पर लगाए गए जुर्माने की वसूली न होने और गंगा की तलहटी में पर्यावरण को नुकसान करने के मामले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को तलब किया है।
टेंट सिटी मामले की सुनवाई शुक्रवार को एनजीटी की तीन सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल , न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए. सेंथिल वेल ने की है।न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के वकील से पूछा कि ये बताइए कछुआ अभयारण्य को आखिर कैसे डिनोटिफाइड किया गया? आखिर कछुओं का क्या हुआ ? क्या कछुए गायब हो गए या चले गए? पर्यावरण मंत्रालय के वकील से कहा कि हम 17 मार्च से इसका जबाब मांग रहे हैं, लेकिन आपने जवाब नहीं दिया। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय पर जुर्माना लगाते हुए जवाब दखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सौरभ तिवारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में शामिल हुए। मामले में अगली सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में होगी।
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एनजीटी ने पूछा अब तक क्यों नहीं हुई जुर्माने की वसूली, सचिव को किया तलब
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा कि टेंट सिटी बनाने वाली कंपनियों पर 17-17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसकी वसूली हुई या नहीं ? इस पर जवाब देते हुए यूपीपीसीबी (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के वकील ने कहा कि अभी जुर्माना राशि की वसूली नहीं हुई है। एनजीटी ने कहा कि वैसे भी टेंट सिटी बनाने वाली कंपनियों पर लगाई गई जुर्माने की राशि कम है। एनजीटी ने पूछा कि गंगा नदी तल में टेंट सिटी लगाने के कारण पर्यावरण को जो नुकसान हुआ है, उसके लिए क्या उपचारात्मक कार्रवाई की गई है? जवाब से असंतुष्ट होने पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
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एनजीटी ने कहा, नदी तल में नहीं हो सकता कंक्रीट का निर्माण
एनजीटी ने टेंट सिटी के निर्माण में ईंट और लोहे की छड़ के इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया है। अमर उजाला ने गंगा उस पार रेती पर टेंट सिटी के बाद के हालात को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी के माध्यम से 13 दिसंबर को दायर शपथ पत्र में टेंट सिटी स्थल पर निर्मित ईंट, लोहे के छड़ से हुए निर्माण व अमर उजाला की खबर को एनजीटी ने गंभीरता से लिया है। एनजीटी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह का निर्माण तो नदी तल में हो ही नहीं सकता। आप लोगों ने इस तरह का निर्माण किसकी अनुमति से कर लिया। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए.सेंथिल वेल ने नदी तल में हुए निर्माण पर गहरी नाराजगी जाहिर की। प्रवेग व निर्वान कंपनी को गंगा नदी तल में कंक्रीट ढांचे के निर्माण के मामले में जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
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टेंट सिटी मामले की सुनवाई शुक्रवार को एनजीटी की तीन सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल , न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए. सेंथिल वेल ने की है।न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के वकील से पूछा कि ये बताइए कछुआ अभयारण्य को आखिर कैसे डिनोटिफाइड किया गया? आखिर कछुओं का क्या हुआ ? क्या कछुए गायब हो गए या चले गए? पर्यावरण मंत्रालय के वकील से कहा कि हम 17 मार्च से इसका जबाब मांग रहे हैं, लेकिन आपने जवाब नहीं दिया। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय पर जुर्माना लगाते हुए जवाब दखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सौरभ तिवारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में शामिल हुए। मामले में अगली सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में होगी।
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एनजीटी ने पूछा अब तक क्यों नहीं हुई जुर्माने की वसूली, सचिव को किया तलब
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा कि टेंट सिटी बनाने वाली कंपनियों पर 17-17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसकी वसूली हुई या नहीं ? इस पर जवाब देते हुए यूपीपीसीबी (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के वकील ने कहा कि अभी जुर्माना राशि की वसूली नहीं हुई है। एनजीटी ने कहा कि वैसे भी टेंट सिटी बनाने वाली कंपनियों पर लगाई गई जुर्माने की राशि कम है। एनजीटी ने पूछा कि गंगा नदी तल में टेंट सिटी लगाने के कारण पर्यावरण को जो नुकसान हुआ है, उसके लिए क्या उपचारात्मक कार्रवाई की गई है? जवाब से असंतुष्ट होने पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
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एनजीटी ने कहा, नदी तल में नहीं हो सकता कंक्रीट का निर्माण
एनजीटी ने टेंट सिटी के निर्माण में ईंट और लोहे की छड़ के इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया है। अमर उजाला ने गंगा उस पार रेती पर टेंट सिटी के बाद के हालात को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी के माध्यम से 13 दिसंबर को दायर शपथ पत्र में टेंट सिटी स्थल पर निर्मित ईंट, लोहे के छड़ से हुए निर्माण व अमर उजाला की खबर को एनजीटी ने गंभीरता से लिया है। एनजीटी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह का निर्माण तो नदी तल में हो ही नहीं सकता। आप लोगों ने इस तरह का निर्माण किसकी अनुमति से कर लिया। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. ए.सेंथिल वेल ने नदी तल में हुए निर्माण पर गहरी नाराजगी जाहिर की। प्रवेग व निर्वान कंपनी को गंगा नदी तल में कंक्रीट ढांचे के निर्माण के मामले में जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।