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काशी तमिल संगमम: तमिल परिवारों में उत्साह, राष्ट्रकवि सुब्रहमण्यम के भांजे केवी कृष्णन ने बताई अनसुनी बातें
Wed, 16 Nov 2022 01:15 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Wed, 16 Nov 2022 01:15 PM IST
सार
बीएचयू से सेवानिवृत्त प्रो. केवी कृष्णन (97) ने बताया कि तमिल के राष्ट्रकवि सुब्रहमण्यम भारती उनके मामा थे। उनका काशी से पुराना रिश्ता है। उन्होंने बताया कि 16 वर्ष की अवस्था में राष्ट्रकवि 1898 में वाराणसी आए थे।
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राष्ट्रकवि सुब्रहमण्यम के भतीजे केवी कृष्णन ने बताई अनसुनी बातें
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तमिल से काशी का पुराना रिश्ता है। तमिल संगमम को लेकर हनुमान घाट के तमिल परिवारों में गजब का उत्साह है। इसी मोहल्ले में रहने वाले बीएचयू से सेवानिवृत्त प्रो. केवी कृष्णन (97) काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि तमिल के राष्ट्रकवि सुब्रहमण्यम भारती उनके मामा थे। उनका काशी से पुराना रिश्ता है।
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उन्होंने बताया कि 16 वर्ष की अवस्था में राष्ट्रकवि 1898 में वाराणसी आए थे। यहां जय नारायण इंटर कालेज में पढ़ते थे। चार साल तीन माह यहां रहे। इसके बाद वे पांडिचेरी चले गए। राष्ट्रकवि सुब्रहमण्यम भारती की बुआ (कुप्पम्माल उर्फ रुक्मिनी अम्माल) का घर बनारस में है। उन्होंने बताया कि हनुमान घाट के पास 1986 में राष्ट्रपति आर वेंकटरमण ने राष्ट्रकवि सुब्रहमण्यम भारती की प्रतिमा का शिलान्यास किया था।
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- फोटो : अमर उजाला
यहां राष्ट्रकवि ने हिंदी, संस्कृत, बंगाली, मराठी, पंजाबी आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया था। उनका कहना था कि अंग्रेजी के बाद तमिल एकमात्र भाषा है। जो किसी और भाषा से नहीं लिया गया है। प्रो. केवी कृष्णन की पुत्री डॉ. जयंती मुरली ने बताया कि हम लोगों को काफी खुशी हो रही है। वहां रहने वाले कई परिचित यहां आएंगे। उनके स्वागत की पूरी तैयारी की है। बाहर रहने वाले यहां होने वाले कार्यक्रम तमिल संगमम के बारे में पूछते हैं। पहली बार इस प्रकार का आयोजन हो रहा है।
राष्ट्रकवि के बुआ के घर में खुले रहे लाइब्रेरी में ले जाने की तैयारी
हनुमान घाट में राष्ट्रकवि बुआ के जिस घर में रहे। वहां पर एक लाइब्रेरी का निर्माण कराया जा रहा है। जहां पर उनकी रचित कई पुस्तकें रखी जाएंगी। अभी फीनिशिंग का काम चल रहा है। तमिल संगमम में आने वाले लोगों को यहां भी ले जाने की तैयारी चल रही है।
राष्ट्रकवि के बुआ के घर में खुले रहे लाइब्रेरी में ले जाने की तैयारी
हनुमान घाट में राष्ट्रकवि बुआ के जिस घर में रहे। वहां पर एक लाइब्रेरी का निर्माण कराया जा रहा है। जहां पर उनकी रचित कई पुस्तकें रखी जाएंगी। अभी फीनिशिंग का काम चल रहा है। तमिल संगमम में आने वाले लोगों को यहां भी ले जाने की तैयारी चल रही है।
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कन्नौज से काशी आकर मुकेश बेचते इत्र
कन्नौज के मुकेश सिंह काशी आकर हनुमान घाट की गलियों में इत्र बेचते हैं। उन्होंने बताया कि तमिल से आने वाले लोग उनसे इत्र लेते हैं। तमिल के लोगों की पहली पसंद केसर और चंदन का इत्र होता है। इसके अलावा कस्तूरी इत्र की भी वे डिमांड करते हैं। मेरे परिवार की आजीविका इसी पर टिकी है।
कन्नौज के मुकेश सिंह काशी आकर हनुमान घाट की गलियों में इत्र बेचते हैं। उन्होंने बताया कि तमिल से आने वाले लोग उनसे इत्र लेते हैं। तमिल के लोगों की पहली पसंद केसर और चंदन का इत्र होता है। इसके अलावा कस्तूरी इत्र की भी वे डिमांड करते हैं। मेरे परिवार की आजीविका इसी पर टिकी है।