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वाराणसीः असि और वरुणा से हटाया जाएगा अतिक्रमण, अपने स्वरूप में लौटेगा नदियों का स्वरूप
Thu, 01 Jul 2021 05:18 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Thu, 01 Jul 2021 05:18 PM IST
सार
नदी विशेषज्ञों ने कहा कि असि और वरुणा का अतिक्रमण हटाए बिना उनको पुराने स्वरूप में नहीं लौटाया जा सकता है। इसके लिए पुराने राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी होगी।
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एनजीटी की सख्ती के बाद शुरू हो गई कवायद
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
असि और वरुणा अपने पुराने स्वरूप में लौटेंगी। पुराने राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार नदियों से अतिक्रमण हटाने के साथ ही प्रदूषण मुक्ति के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। बुधवार को मॉनिटरिंग कमेटी की पहली ऑनलाइन बैठक में नदी विशेषज्ञों ने असि और वरुणा के पुनरुद्धार के लिए अपने-अपने सुझाव दिए।
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बुधवार को हुई ऑनलाइन बैठक में नदी विशेषज्ञों ने कहा कि असि और वरुणा का अतिक्रमण हटाए बिना उनको पुराने स्वरूप में नहीं लौटाया जा सकता है। इसके लिए पुराने राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी होगी। वहीं दोनों नदियों में होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए नए सिरे से कार्ययोजना तैयार करनी होगी। इसमें गिरने वाले नालों के ट्रीटमेंट के साथ ही सीवेज बहने से रोकना होगा।
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वहीं कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि गंगा किनारे बनाए गए सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट गलत तरीके से बनाए गए हैं। इसमें सरकार का पैसा ही बर्बाद हुआ है। एडीएम सिटी गुलाब चंद ने कहा कि एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी गई और उसी पर आज विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय दी है। बता दें कि अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने एनजीटी में याचिका दायर की थी कि वरुणा और असि के पुनरुद्धार के बिना गंगा को प्रदूषण मुक्त करना मुश्किल है।
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गठित हुई है मॉनिटरिंग कमेटी
गंगा और उनकी सहायक नदियों वरुणा व असि को प्रदूषण से बचाने और अवैध कब्जों को हटाने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन कर दिया गया है। एनजीटी ने स्वतंत्र निगरानी कमेटी गठन करने का आदेश दिया था। इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अतिरिक्त निदेशक डॉ. एके विद्यार्थी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह, जिलाधिकारी की ओर से अपर जिलाधिकारी नगर को कमेटी में सदस्य नामित किया गया है।