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आपातकाल: दाढ़ी के कारण बीएचयू के पूर्व उपाध्यक्ष को नहीं पकड़ सकी थी पुलिस, दो साल तक चलता रहा चूहे-बिल्ली का खेल

Fri, 25 Jun 2021 12:55 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 25 Jun 2021 12:55 PM IST
सार

आज देश में लागू आपातकाल की 46वीं बरसी है। बीएचयू  के पूर्व उपाध्यक्ष व सपा नेता स्व. राजनारायण के साथ साये की तरह रहने वाले अनिरुद्ध नारायण सिंह आपातकाल को याद करते हुए कहते हैं कि पूरे दो साल तक मैं बनारस, बिहार नेपाल में दाढ़ी बढ़ाकर छिपता रहा। 

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emergency 46th anniversary Police could not arrest former vice president of BHU due to beard
अनिरुद्ध नारायण सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आपातकाल में छात्रशक्ति को कुचलने के लिए सत्ता ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। जून 1975 में काशी के भी लगभग सौ विद्यार्थियों को भारत रक्षा अधिनियम और मीसा कानूनों के जरिए कैद में डाल दिया गया। 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक देश में आपातकाल लागू था।

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पूर्व उपाध्यक्ष व सपा नेता स्व. राजनारायण के साथ साये की तरह रहने वाले अनिरुद्ध नारायण सिंह आपातकाल को याद करते हुए कहते हैं कि पूरे दो साल तक मैं बनारस, बिहार नेपाल में दाढ़ी बढ़ाकर छिपता रहा। अंत में जब इमरजेंसी खत्म हुई तब मैं प्रकट हुआ। मैं अपने साथियों में अकेला था जिसे पुलिस पकड़ नहीं पाई थी। इस सफलता में मेरी दाढ़ी का भी कमाल था, इसलिए मैंने फिर कभी दाढ़ी नहीं कटवाई और दाढ़ी मेरी पहचान बन गई। 
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बताया कि 26 जून 1975 को तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष मोहन प्रकाश के साथ मैं अपने घर रवींद्रपुरी कालोनी से छात्रसंघ पहुंचा। हम लोगों के पहुंचते ही भेलूपुर पुलिस ने छात्रसंघ को घेर लिया। हमलोगों ने गेट पहले ही बंद करवा दिया था। पीछे के रास्ते से हम दोनों वहां से निकल भागे। फिर हम दोनों अलग-अलग हो लिए। पुलिस की शहर में हलचल देख मैं अपने गांव शहाबाबाद पहुंचा। गांव वालों ने बताया कि पुलिस आई थी और आपको खोज रही थी। मैंने बिहार जाने का निर्णय लिया और चंपारण के भैरोगंज गांव पहुंच गया। पुलिस पीछे-पीछे मैं आगे-आगे। 

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सूचना मिली की पुलिस यहां भी आने वाली है इसलिए मैं नेपाल निकल लिया। इस दौरान जानकारी मिली कि पुलिस ने मेरे गांव में मेरा काफी सामान कुर्क कर लिया है। मोहन प्रकाश के अस्सी स्थित घर की जबरदस्त कुर्की हुई। यूपी से मैं बिहार पहुंचा तो मालूम चला कि कर्पूरी ठाकुर और रामविलास पासवान बिहार से बनारस पहुंचे हैं और छिपते फिर रहे हैं। फिर वे लोग भी बनारस से नेपाल पहुंच गए। तमाम साथी मारकंडेय सिंह, सुरजीत सिंह डंग, चंचल कुमार, शतरुद्र प्रकाश, उनकी पत्नी अंजना प्रकाश, रामबचन पांडेय आदि गिरफ्तार कर लिए गए।

आपातकाल में टूट गया बीएचयू में स्थापित आरएसएस का संघ भवन

आज की नई पीढ़ी को शायद इस बात की जानकारी न हो कि कभी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में संघ भवन भी था और वहां राष्ट्रीय सेवक संघ के कार्यक्रम संचालित होते थे जिसे आपातकाल के दौरान कोर्ट के आदेश पर तोड़ दिया गया। लखनऊ टेक्निकल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दुर्ग सिंह चौहान, बीएचयू के प्रो. जय प्रकाश लाल व बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानन्द राय बताते हैं कि 1932 में पंडित मदन मोहन मालवीयजी की प्रेरणा से बीएचयू के लॉ कालेज मे संघ भवन का निर्माण हुआ था।

संघ ने बीएचयू को एक हजार 52 रुपये भवन के लिए अदा किया था। अदालत ने संघ भवन को तोड़ने का आदेश दे दिया, संघ के लोग आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देते तब तक इमरजेंसी लग गई। इस मौके का फायदा उठाते हुए कालु लाल श्रीमाली के वीसी काल में अदालत के आदेश पर संघ भवन को जमींदोज कर दिया गया।
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