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मालिक नहीं माली बनकर परिवार की बगिया सींचें
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 31 Jul 2016 01:50 AM IST
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प्रख्यात कथा वाचक पं. श्रीकांत शर्मा बाल व्यास ने शनिवार को कहा कि परिवार में सुख-शांति के लिए घर के मुखिया को मालिक बनकर नहीं, माली बनकर काम करना चाहिए। ऐसा करने से परिवार खुशहाल बना रहेगा। श्री काशी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन बाल व्यास ने इसी तरह भक्तों को कथामृत का पान कराया।
उन्होंने कहा कि आज के मानव का मन ‘मनी’ यानी संपत्ति अर्जित करने में लगा रहता है किंतु जिसने प्रभु को अपना ‘मनी’ मान लिया उसका मन प्रभु में ही लगा रहेगा। उसके सपने में भी विपत्ति नहीं आती है। उन्होंने कहा कि पूत सपूत हो तो भी, कपूत हो तो भी धन का संचय अनुचित ढंग से नहीं करना चाहिए क्योंकि धन अपने साथ कई तरह की विपत्तियां भी लाता है। वैसे भी जो धन जैसे आता है वैसे ही चला जाता है। ऐसे धन के पीछे भागने से कोई लाभ नहीं होता।
बाल व्यास ने कहा कि प्रत्येक इंसान को अपना सखा प्रभु को ही बनाना चाहिए जिसे प्रभु अपना सखा बना लेते हैं, वह भिखारी नहीं रह जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु अपने सखा की दीन-दशा देख भाव विह्वल हो इतना रोए कि सखा का चरण पखारने के लिए जल की जरूरत ही नहीं पड़ी। यह प्रसंग सुनाते हुए बाल व्यास भी भाव विह्वल हो गए।
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उन्होंने कहा कि आज के मानव का मन ‘मनी’ यानी संपत्ति अर्जित करने में लगा रहता है किंतु जिसने प्रभु को अपना ‘मनी’ मान लिया उसका मन प्रभु में ही लगा रहेगा। उसके सपने में भी विपत्ति नहीं आती है। उन्होंने कहा कि पूत सपूत हो तो भी, कपूत हो तो भी धन का संचय अनुचित ढंग से नहीं करना चाहिए क्योंकि धन अपने साथ कई तरह की विपत्तियां भी लाता है। वैसे भी जो धन जैसे आता है वैसे ही चला जाता है। ऐसे धन के पीछे भागने से कोई लाभ नहीं होता।
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बाल व्यास ने कहा कि प्रत्येक इंसान को अपना सखा प्रभु को ही बनाना चाहिए जिसे प्रभु अपना सखा बना लेते हैं, वह भिखारी नहीं रह जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु अपने सखा की दीन-दशा देख भाव विह्वल हो इतना रोए कि सखा का चरण पखारने के लिए जल की जरूरत ही नहीं पड़ी। यह प्रसंग सुनाते हुए बाल व्यास भी भाव विह्वल हो गए।
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