Eid ul Adha 2022: बनारस में अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया जज्बा-ए-कुर्बानी का त्योहार, मस्जिदें और ईदगाह दो साल बाद गुलजार
ईद-उल-अजहा खुशी है तो जज्बा-ए-कुर्बानी भी है। कुर्बानी का त्योहार बकरीद वाराणसी में आज पूरे जोशोखरोश के साथ मनाया जा रहा है। ईदगाहों व मस्जिदों में साढ़े छह बजे से ही नमाज का दौर शुरू हो गया।
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जज्बा-ए-कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर रविवार को वाराणसी समेत पूर्वांचल के ईदगाहों और मस्जिदों में पूरी अकीदत के साथ नमाज अदा की गई। खुदा की बारगाह में नमाजियों ने मुल्क की तरक्की, अमन-चैन के साथ बरकत और खुशहाली के लिए दुआ की। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद मस्जिद और ईदगाह गुलजार हुए।
ईद-उल-अजहा की नमाज के बाद मस्जिदों और ईदगाहों के बाहर नजारा बेहद खुशनुमा था। लोग एक-दूसरे को गले लगकर बधाइयां दे रहे थे और मेले की रौनक के बीच बच्चों की अलमस्ती देखते बन रही थी। इस दौरान कई स्थानों पर गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा भी देखने को मिला।
ईदगाहों पर मेले जैसा माहौल
नमाज का सिलसिला सुबह छह बजे से शुरू हो गया था। सर्वाधिक भीड़ दरगाहे फातमान लल्लापुरा और सदर इमामबाड़ा लाटसरैया में उमड़ी। रवायतों के अनुसार अल्लाह की राह में कुर्बानी भी पेश की गई। नये परिधानों में सजे लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर बकरीद की बधाइयां भी दी। ईदगाहों पर मेले जैसे माहौल के बीच बच्चों का अपना अलग उत्साह था। नए परिधानों में सजे-धजे बच्चों ने गुब्बारों और अपने मनपसंद खिलौनों के अलावा अन्य सामान खरीदे।
वाराणसी में काशी विद्यापीठ, लाट सरैया, नदेसर, धरहरा के अलावा अन्य मस्जिदों पर सुबह तय समय से पहले ही नमाजियों का रेला पहुंचना शुरू हो गया था। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था जहां चाकचौबंद रही तो वह प्रमुख मस्जिदों में नमाज को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई।
इससे पहले बकरीद की खरीदारी के लिए देर रात तक दालमंज, नई सड़क समेत अन्य बाजार गुलजार रहे। सेवईयों के साथ, तिरंगा फेनी, डबल फेनी व लाल फेनी की बिक्री सबसे अधिक रही। इसके साथ ही खजूर, ड्राइफ्रूट, चॉकलेट की भी बिक्री हुई।
कुर्बानी के बाद साफ-सफाई का खास ख्याल
मुफ्ती ए शहर अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा है कि कुर्बानी के बाद साफ-सफाई का खास ख्याल रखें। कुर्बानी की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर न करें। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कुर्बानी के पर्व को शांतिपूर्व परंपरागत तरीके से मनाने की अपील की है।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैय्यद फरमान हैदर ने कहा कि घर के अंदर ही कुर्बानी करें। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी रामसकल यादव ने बताया कि जिन इलाकों में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। वहां कांपैक्टर और छोटे डस्टबिन रखे गए हैं। इसमें अपशिष्ट पदार्थों को करसड़ा ले जाया जाएगा। करसड़ा में अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण के लिए गड्ढा खोदवाया गया है