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जिले में 6059 लोगों से अभी भी दूर है शिक्षा
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वाराणसी। जिले में निरक्षरता का कलंक मिटाने के लिए सरकारी योजनाएं कामयाब नहीं हो रही हैं। ऐसे में अब सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत समितियां बनाकर व वालंटियर्स के माध्यम से निरक्षर लोगों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें पढ़ाया लिखाया जाएगा।
निदेशक साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा ने पढ़ना लिखना अभियान के लिए राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा गठित जिला शिक्षा परियोजना समिति से कार्य कराने का निर्देश दिया हैं। 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों में सर्वाधिक 4 हजार 544 महिलाएं हैं, वहीं पुरुषों का आंकड़ा 1515 है।
इस संबंध में साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा के निदेशक संजय सिन्हा ने सभी बीएसए को आदेश जारी किए है। सी ग्रेड, ड्रॉप आउट व 2011 की जनगणना में शेष रहे निरक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य तय किया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में एससी के 2424, एसटी के 606, अल्पसंख्यक वर्ग के 1212 और अन्य वर्गों में 1818 लोग निरक्षर हैं। जिले में साक्षरता दर बढ़ाने से निरक्षर महिला व पुरुषों की संख्या में पहले के मुकाबले कमी आई हैं। लेकिन अब भी बड़ी संख्या में जिले की महिलाओं से शिक्षा उनके पहुंच से बाहर है। अभियान को मूर्त रूप देने के लिए 15 दिसंबर तक बीएसए स्तर से निरक्षरों की सूची मांगी गई थी, ताकि 20 दिसंबर से इस पर कार्य शुरू किया जा सके। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि निरक्षरों को साक्षर करने की जिम्मेदारी वर्ष 2019 के तृतीय समेस्टर के डीएलएड प्रशिक्षार्णियों को दी जाएगी।
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निदेशक साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा ने पढ़ना लिखना अभियान के लिए राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा गठित जिला शिक्षा परियोजना समिति से कार्य कराने का निर्देश दिया हैं। 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों में सर्वाधिक 4 हजार 544 महिलाएं हैं, वहीं पुरुषों का आंकड़ा 1515 है।
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इस संबंध में साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा के निदेशक संजय सिन्हा ने सभी बीएसए को आदेश जारी किए है। सी ग्रेड, ड्रॉप आउट व 2011 की जनगणना में शेष रहे निरक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य तय किया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में एससी के 2424, एसटी के 606, अल्पसंख्यक वर्ग के 1212 और अन्य वर्गों में 1818 लोग निरक्षर हैं। जिले में साक्षरता दर बढ़ाने से निरक्षर महिला व पुरुषों की संख्या में पहले के मुकाबले कमी आई हैं। लेकिन अब भी बड़ी संख्या में जिले की महिलाओं से शिक्षा उनके पहुंच से बाहर है। अभियान को मूर्त रूप देने के लिए 15 दिसंबर तक बीएसए स्तर से निरक्षरों की सूची मांगी गई थी, ताकि 20 दिसंबर से इस पर कार्य शुरू किया जा सके। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि निरक्षरों को साक्षर करने की जिम्मेदारी वर्ष 2019 के तृतीय समेस्टर के डीएलएड प्रशिक्षार्णियों को दी जाएगी।
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