{"_id":"5f529c138ebc3e43984e5999","slug":"education-city-news-vns545380314","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव ककरहिया में शिक्षक बदल रहे विद्यायल की सूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव ककरहिया में शिक्षक बदल रहे विद्यायल की सूरत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। पहले सरकारी स्कूलों में सारे कार्य सरकारी बजट आने के इंतजार में ठप रहते हैं। शिक्षक भी स्कूल को संवारने में कम दिलचस्पी लेते थे। लेकिन वक्त बदल गया है। साथ ही शिक्षकों की सोच भी बदल रही है। अब सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर सुंदर बनाने और शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कुछ शिक्षक सरकारी राशि आने के इंतजार नहीं करते। बल्कि अपने हुनर का इस्तेमाल करने के लिए खुद ही स्कूल को सुंदर बनाने के लिए अपने हाथों में पेंट और ब्रश पकड़ लेते हैं। ऐसे एक शिक्षक हैं जो रोजाना अपनी ड्यूटी के बाद स्कूल को रंग रोगन कर सवार रहे हैं। कुछ ऐसा ही किया है प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव ककरहिया के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक राजेश सिंह ने।
लॉकडाउन में विद्यालय के बच्चों के घर-घर जाकर ड्रेस, किताब पहुंचाने के साथ व्हाट्सएप व फोन कॉल के जरिए बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं कायाकल्प की धनराशि का उपयोग करने के साथ राजेश अपनी सैलरी से परिसर को आकर्षक बनाने में जुटे हुए हैं। अपनी ड्यूटी खत्म होने के बाद वह पेंट ब्रश लेकर स्कूल की दीवारों पर चित्रकारी करने लगते हैं।
प्रधानाचार्य ने स्कूल की सूरत बदलने का उठाया बीड़ा
राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह यादव को पिछले साल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए ही राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तभी से वह लगातार छात्रों की उपस्थिति से लेकर क्वींस कॉलेज कैंपस की तस्वीर बदलने में लगे हुए हैं। परिसर को हराभरा रखने के लिए में जगह जगह पौधरोपण, 120 बेड के नया हॉस्टल निर्माण की प्रक्रिया भी चल रही है। डॉ. राजेश में बताया कि क्लॉस में सभी की उपस्थिति और उन्हें किताबी ज्ञान के साथ-साथ अलग-अलग खेलकूद सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार छात्रों से बातचीत जारी रखने के प्रयास जारी है। ऑनलाइन शिक्षा और कंप्यूटरीकरण की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
लॉकडाउन में विद्यालय के बच्चों के घर-घर जाकर ड्रेस, किताब पहुंचाने के साथ व्हाट्सएप व फोन कॉल के जरिए बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वहीं कायाकल्प की धनराशि का उपयोग करने के साथ राजेश अपनी सैलरी से परिसर को आकर्षक बनाने में जुटे हुए हैं। अपनी ड्यूटी खत्म होने के बाद वह पेंट ब्रश लेकर स्कूल की दीवारों पर चित्रकारी करने लगते हैं।
विज्ञापन
प्रधानाचार्य ने स्कूल की सूरत बदलने का उठाया बीड़ा
राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह यादव को पिछले साल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए ही राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। तभी से वह लगातार छात्रों की उपस्थिति से लेकर क्वींस कॉलेज कैंपस की तस्वीर बदलने में लगे हुए हैं। परिसर को हराभरा रखने के लिए में जगह जगह पौधरोपण, 120 बेड के नया हॉस्टल निर्माण की प्रक्रिया भी चल रही है। डॉ. राजेश में बताया कि क्लॉस में सभी की उपस्थिति और उन्हें किताबी ज्ञान के साथ-साथ अलग-अलग खेलकूद सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार छात्रों से बातचीत जारी रखने के प्रयास जारी है। ऑनलाइन शिक्षा और कंप्यूटरीकरण की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।
विज्ञापन