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कानपुर में बनवाई विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट

Tue, 25 Aug 2020 01:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 01:51 AM IST
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education
वाराणसी। फर्जी नियुक्ति प्रकरण में पीडि़त ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उनका कहना है कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। जालसाजों ने विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट तैयार करवाई और उस पर ही अभ्यर्थियों का डाटा अपलोड किया था। पीडि़त ने बताया कि वेबसाइट को कानपुर में तैयार करवाया गया था। जालसाजों ने आगरा, सीतापुर, फिरोजाबाद के युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर एक करोड़ से अधिक की वसूली की है।
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पीडि़त जगदीशकांत ने बताया कि पाणिनी भवन स्थित व्याकरण विभाग के कमरे में उनसे फार्म भरवाए गए। फर्जी नियुक्ति पत्र, फर्जी परिचय पत्र और फर्जी सेलरी स्लिप दिखाकर कई किश्तों में पांच-पांच लाख रुपये वसूल लिए। इसके बाद नियुक्ति दिलाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये और मांगे गए। उन्होंने बताया कि जालसाजों ने विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उन सभी लोगों के नाम दिखाए थे। उसके बाद हम लोगों ने रुपये दिए थे। जब हम लोगों को विश्वविद्यालय से भगा दिया गया और नियुक्ति नहीं हुई तो समझ में आया कि हमारे साथ ठगी हुई है। हमने एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन हर जगह से फटकार मिली। हम लोगों ने अपने स्तर से जानकारी जुटानी शुरू की तो पता चला कि जालसाजों ने कानपुर में विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट तैयार करवाई थी। चीफ प्राक्टर आशुतोष मिश्रा ने बताया कि अभी तक पुलिस ने इस मामले में विवेचना नहीं शुरू की है। नाटी इमली चौकी पर जालसाजी के मामले में तहरीर दी गई है। अभी तक कोई पुलिस का अधिकारी जांच के लिए नहीं आया है।
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एसटीएफ या क्राइम ब्रांच से कराई जाए जांच
जगदीशकांत ने कहा कि प्रकरण की शिकायत नाटी इमली पुलिस चौकी पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई है, लेकिन अब तक किसी पुलिसकर्मी ने पूछताछ करने की जहमत नहीं उठाई। पुलिस इस गंभीर मामले को हल्के में ले रही है। पुलिस चाहती तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अब तक कार्रवाई कर चुकी होती। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से यह मांग है कि प्रकरण की जांच एसटीएफ या क्राइम ब्रांच या किसी अन्य बड़ी एजेंसी से कराकर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाए।
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जालसाजों की तस्वीर और वीडियो है हमारे पास
आगरा के पीडि़तों ने बताया कि उनके पास जालसाजों की तस्वीर, वीडियो, मोबाइल नंबर, अकाउंट नंबर और वायस रिकॉर्डिगिं मौजूद है। पुलिस अगर इस मामले को गंभीरता से ले तो जालसाज उनकी पकड़ में होंगे।
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