Sawan 2022: काशी में इस बार कांवड़ियों की स्वागत परंपरा पर ग्रहण, बाबा को जल चढ़ाने 14 जुलाई से आएंगे कांवड़िये
दो साल के बाद सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, लेकिन श्रद्धालुओं की सेवा के इंतजाम नहीं होंगे। वाराणसी शहर के अंदर सजने वाले दो बड़े कांवड़िया शिविर इस साल नहीं सजेंगे।
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सावन में शिव की नगरी काशी कांवड़ियों से बम-बम रहेगी। गलियों से लेकर घाट तक केसरिया परिधान में कांवड़ लेकर आने वालों का रेला उमड़ेगा। दो साल के बाद सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, लेकिन श्रद्धालुओं की सेवा के इंतजाम नहीं होंगे। शहर के अंदर सजने वाले दो बड़े कांवड़िया शिविर इस साल नहीं सजेंगे।
आयोजकों ने सहयोग नहीं मिलने के कारण अपने-अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। 14 जुलाई से 12 अगस्त तक सावन रहेगा। सिंधी धर्मशाला लक्सा और चितरंजन पार्क दशाश्वमेध घाट पर कांवड़ियों की सेवा के लिए व्यापक स्तर पर शिविर लगाया जाता है। पिछले 20 साल से (कोरोना संक्रमण के दो साल छोड़कर) लगते आ रहे शिविर पर इस बार संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
चितरंजन पार्क में मलबा होने के कारण तैयारी शुरू नहीं हुई है। श्री शिव शक्ति कांवरिया तीर्थयात्री सेवा शिविर के अध्यक्ष नरसिंह दास ने बताया कि पार्क में मलबे की वजह से 2000 से लगने वाला शिविर इस बार नहीं लग सकेगा।
सिंधी धर्मशाला में लगने वाले श्री बाबा काशी विश्वनाथ भक्त सेवा समिति के लक्ष्मी नारायण जायसवाल ने बताया कि सन 2000 से निशुल्क शिविर लगाते आ रहे हैं। तैयारियां तो पूरी हैं, लेकिन प्रबंधक धर्मशाला नहीं देना चाहते हैं। इसके चलते इस साल सेवा नहीं कर पाएंगे। सावन में लाखों कांवड़ियों के लिए शौच-प्रसाधन के इंतजाम किए जाते हैं।
इसके लिए कांवड़ स्टैंड जरूरी है, क्योंकि स्नान करने के बाद कांवड़िया यहीं से कांवड़ उठाते हैं। समिति की ओर से इंतजाम किया जाता है। कांवड़ियों के लिए प्राथमिक चिकित्सा 24 घंटे उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा चाय, जलपान, फलाहार, अन्न प्रसाद, ठहरने व विश्राम की सुविधा, गर्म जल से पैर सेंकने की सुविधा भी दी जाती है। दूरदराज से आने वाले कांवड़िया यहां विश्राम भी करते हैं।