मनुष्य अपने घर को भी बैकुंठ बना सकता है। घर में मिलकर भोजन और भजन करो, घर खुद वैकुंठ बन जाएगा। मनुष्य को स्वभाव सुधारने के लिए बांसुरी को सुनना चाहिए। जो व्यक्ति अपने स्वभाव को जीत ले, उससे दुनिया बनाने वाला भी उस व्यक्ति से खुश हो जाता है। राष्ट्र को सुखी बनाने के लिए भगवान के साथ महापुरुषों के शरण में जाए। ये बातें कथावाचक श्रीकांत शर्मा बालव्यास ने कहीं।
वह शुक्रवार को चौकाघाट स्थित हेरिटेज पैलेस में श्रीमद्भागवत कथा में बैकुंठ दर्शन एवं श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा सुना रहे थे। बालव्यास ने कहा कि भारत का कोई वैष्णव मुक्ति नहीं मांगता। मदन मोहन मालवीय ने मुक्ति नहीं बल्कि काशी को शिक्षा के शिखर पर पहुंचाने का प्रण लिया। भागवत की कथा में भगवान की दृष्टि सभी पर पड़ती है। जो गोविंद को सुनने जाते हैं वही धनवान होते हैं। काम करते रहो भगवान नाम जपते रहो। मुक्ति गोपाल के चरणों में होती है। कार्यक्रम में श्री काशी अग्रवाल समाज के सभापति संतोष कुमार अग्रवाल, प्रधानमंत्री डॉ. रचना अग्रवाल, प्रद्युम्न अग्रवाल, बृजकमल दास अग्रवाल, भूपेंद्र अग्रवाल, अतुल गोयल मौजूद रहे। व्यासपीठ का पूजन यजमान नवल किशोर कथूरिया, योगेश अग्रवाल, यतींद्र कथूरिया ने किया। संचालन कृष्ण कुमार काबरा और संयोजन अंशुमान गुप्ता, सौरभ कपूर ने किया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय प्रयागराज की न्यायाधीश वाणी रंजन अग्रवाल, राजकुमार कोठरी, निधि देव अग्रवाल, कौशल शर्मा, बजरंग अग्रवाल मौजूद रहे।