विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष: पर्यावरण प्रहरी बनकर कर रहे धरा की सेवा, पेड़ों को संरक्षित करने का चला रहे अभियान
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिए हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। वाराणसी शहर में कई लोग जमीन के छोटे टुकड़े से जैविक खेती के माध्यम से धरा की सेवा करने में जुटे हैं।
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पृथ्वी का शृंगार हैं पेड़, पौधे, फूल, झरने और हवा। इन्हें बचाने और धरती को हरा-भरा रखकर पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित रखने के लिए चहुंओर पौधरोपण हो रहा है। लोग पुराने पेड़ों को संरक्षित करने के साथ ही अभियान चलाकर पृथ्वी को बचाने में लगे हैं। पर्यावरण के प्रति प्रेम का ही नतीजा है कि खाली और बंजर जमीन पर भी हरियाली लहलहा रही है।
लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता के लिए हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। वाराणसी शहर में कई लोग जमीन के छोटे टुकड़े से जैविक खेती के माध्यम से धरा की सेवा करने में जुटे हैं। धरा को बचाने के लिए इन प्रहरियों का यही जज्बा दूसरों को पर्यावरण से प्यार करना सिखा रहा है। विश्व पृथ्वी दिवस पर हम कुछ ऐसे ही लोगों से रूबरू होंगे।
गंगामित्रों ने घर-घर पहुंचाया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र बीएचयू के युवाओं ने धरा को बचाने का संकल्प लिया है। इन युवाओं ने अपने जागरूकता मुहिम के जरिये पर्यावरण संरक्षण, गंगा संरक्षण, जल संरक्षण और पौधरोपण का संदेश घर-घर पहुंचा दिया है। इको-स्किल्ड गंगामित्रों की टीम हर दिन अलग-अलग क्षेत्रों में अभियान चलाकर लोगों को पेड़-पौधे लगाने के साथ जल को व्यर्थ न बहाने और जैविक खेती के प्रति जागरूकता करती है। इस टीम के ग्रुप लीडर धर्मेंद्र पटेल अपने युवाओं की टोली के साथ स्कूलों में जाकर बच्चों को पौधरोपण और जल संरक्षण का महत्व बताते हैं।
वाराणसी में पौधरोपण का बढ़ रहा लक्ष्य
वाराणसी जिले में साल दर साल पौधे लगाने का जो लक्ष्य रखा गया है, उसमें बढ़ोत्तरी हो रही है। शासन के आदेश के बाद वन विभाग के साथ ही पर्यावरण, ग्राम्य विकास विभाग, पंचायती राज सहित अन्य विभागों को लक्ष्य दिया जाता है। इसमें वर्ष 2020-21 में जिले में 1484015 पौधे लगाए गए थे। 2021-22 यह संख्या बढ़कर 1780819 तक पहुंच गई है। इसके बाद 2022-23 में जिले में 2077618 का लक्ष्य रखा गया है।
ज्ञान जन से सींचते हरियाली
डॉ. आनंद प्रभा निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कालेज की प्रधानाचार्य हैं। उन्होंने अपने पर्यावरण प्रेम के जरिये विद्यालय को हरा-भरा बना दिया है। उनका ये प्रयास अभी थमा नहीं है, बल्कि अब वो इस प्रयास में अपने विद्यालय के बच्चों को भी जोड़ रही हैं। गुलाब की कई अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाने के साथ फलदार पौधे, नीम, लेमन ग्रास लगाने के साथ ऑक्सीजन बढ़ाने वाले पौधे लगाए हैं।
पर्यावरण बचाने को आगे आ रही महिलाएं
अपने धरा को हरा भरा बनाने के लिए काशी की महिलाएं अपनी अहम भूमिका निभा रही है। इसके लिए ये महिलाएं अपने घर का प्लास्टिक इकट्ठा कर उनसे इको ब्रिक बना रही है। नगवां निवासी भारती मिश्रा, सुनीति शुक्ला, वैदेही, सहित कई अन्य महिलाएं इसमें शामिल हैं। महिलाओं ने अपने द्वारा तैयार इको ब्रिक अपने छत पर गमलों को रखने में प्रयोग किया है।
मैं बीते 12 साल से गोबर और हरी खाद के प्रयोग से सब्जी और अनाज की खेती कर रहा हूं। प्रमाण पत्र मिलने के बाद अपने ग्राम पंचायत के कई गांव के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया, जिसमें कई किसान जैविक विधि से खेती कर पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य सुधार में योगदान दे रहे हैं। - ओम प्रकाश पटेल, किसान, फूलपुर, पिंडरा