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...पहले रोज कमाते थे 500 अब बोहनी भी नहीं होती

Sat, 12 Jun 2021 01:57 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jun 2021 01:57 AM IST
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... earlier used to earn 500 daily, now there is no sown
कचहरी में अधिवक्ताओं के चेंबर और चौकियों के बाहर न्यायिक कार्यों की चर्चाएं और टाइपिस्ट की खटरपटर से गुलजार रहने वाली कचहरी अब शांत है। चौकियों पर धूल की मोटी परत जम चुकी है। चुनिंदा अधिवक्ताओं की चहलपहल ही यहां देखने को मिल रही है। कोरोना की दूसरी लहर में अदालतों की बंदी से अधिवक्ताओं और न्यायिक कार्यों से जुड़े कर्मचारियों के सामने आजीविका का संकट छा गया है। फोटो स्टेट करने वाले एक शख्स ने बताया कि पहले 500 रोज कमाते थे अब बोहनी तक नहीं हो रही है।
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लगभग डेढ़ माह से बंद 58 अदालतों में पिछले दिनों आठ को खोलने की अनुमति मिली है। लेकिन अधिवक्ताओं और नियमित प्रैक्टिस करने वाले, नोटरी अधिवक्ता, राजस्व, फौजदारी, ट्रिब्यूनल, परिवार अदालत, उपभोक्ता फोरम, टाइपिस्ट को खास राहत नहीं मिली। सिविल कोर्ट में आंशिक रूप से सिर्फ आठ अदालतें सुबह साढ़े दस से अपराह्न ढाई बजे तक चल रही हैं। वहीं, कलेक्ट्रेट से जुड़ी राजस्व अदालतें शुरू तो हुईं, लेकिन अधिकांश मामलों में अभी तारीखें ही पड़ रही हैं। जनपद अदालत 18 जून तक बंद हैं। इससे रोज कमाने और खाने वाले टाइपिस्ट, नोटरी, मुचलका नवीश और अन्य की हालत खराब है। जमा पूंजी से घर का खर्च चला रहे हैं। बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार पांडेय, महामंत्री द्वय कन्हैया लाल पटेल, विवेक कुमार सिंह ने मांग की कि सरकार हर हाल में अधिवक्ताओं और उनके सहयोगियों को आर्थिक राहत प्रदान करें।
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पूंजी से चला रहे घर खर्च
टाइपिस्ट भैया लाल विश्वकर्मा ने बताया कि महज आठ अदालतों में सिर्फ तारीख ही तारीख मिल रही है। ऐसे में काम बंद है। पहले जहां हजार-पांच सौ की आमदनी हो जाती थी अब सौ से डेढ़ रुपये जुटाना भी बड़ी बात हो गई है। घर परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेपटरी होने के कगार पर है। भविष्य की जमा पूंजी से अब घर परिवार का खर्च चला रहे हैं।
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पहले जैसी बात नहीं
मुचलका नवीश बबलू श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से आमदनी ठप है। जैसे-तैसे परिवार का खर्च चल रहा है। कचहरी तो खुल गई है लेकिन पहले जैसी बात नहीं है। रोज कुआं खोदना और रोज पानी पीने वालों के लिए बहुत भारी संकट है। सरकार से मदद की आस है।
नहीं मिल रहा काम
हलफनामा का काम करने वाले और काजीसराय निवासी ओमप्रकाश लाल ने बताया कि आंशिक लॉकडाउन ने कमर तोड़ दी है। कचहरी में काम करने वाले लगभग सभी की जीविका पर असर पड़ा है। काम मिल नहीं रहा है। जब तक कचहरी पूरी तरह से नहीं खुलेगी तब तक राहत के आसार नहीं हैं।
दस हजार लोग परेशान
नोटरी अधिवक्ता कृपाशंकर पांडेय ने बताया कि कचहरी बंद होने से दस हजार अधिवक्ताओं और इनसे जुड़े कर्मियों की आमदनी प्रभावित है। अब भी पूरी तरह से अदालतें नहीं खुल सकी हैं, जो खुली भी हैं तो वह बस नाम मात्र की हैं। जब तक पूरी तरह से कचहरी नहीं खुलेगी तब तक कर्मियों की जीविका पर संकट बना रहेगा।

डेढ़ माह से खाली बैठे हैं
फोटो स्टेट करने वाले शाहिद ने बताया कि लंबे समय से काम बंद होने से भुखमरी की नौबत आ गई है। पहले तो तीन-चार सौ कमा लेते थे लेकिन अब तो बोहनी तक नहीं हो रही है। डेढ़ माह से बैठे ही हैं। पिछले कोरोना काल में ढाई से तीन माह तक कचहरी बंद रही। इस बार भी यही हाल है।
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