आइसोलेशन कोच में चढ़ी लापरवाही की ‘धूल’: वाराणसी मंडल के आठ स्टेशनों पर रखे गए थे 133 आइसोलेशन कोच
कोरोना की पहली लहर में बेड और आक्सीजन की उपलब्धता कम होने पर पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के वाराणसी सिटी, बनारस स्टेशन समेत आठ स्टेशनों पर कुल 133 आइसोलेशन कोच लगाए गए थे।
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कोरोना की पहली लहर में संक्रमण की तेजी से फैलने की आशंकाओं के बीच रेलवे ने ऐहतियातन आइसोलेशन कोच बनाए थे। ताकि आपात स्थिति में किसी भी संक्रमित मरीज को इसका लाभ मिल सके। लेकिन करीब दो साल बाद भी ये कोच कोचिंग डिपो व वाशिंग लाइन में धूल फांक रहे हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के बनारस स्टेशन सहित आठ स्टेशनों पर लगाए गए आइसोलेशन कोच अब भी लॉक हैं। राहत की बात यह रही कि मऊ स्टेशन को छोड़ कर बाकि किसी भी स्टेशन पर खड़े आइसोलेशन कोच का इस्तेमाल संक्रमित मरीजों को भर्ती करने में नहीं हुआ।
एक कोच की लागत लगभग 8000 रुपये
कोरोना की पहली लहर में बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता कम होने पर पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के वाराणसी सिटी, बनारस स्टेशन समेत आठ स्टेशनों पर कुल 133 आइसोलेशन कोच लगाए गए थे। इसे तैयार करने में प्रति कोच की लागत लगभग 8000 रुपये आई थी।
हालांकि रेल अधिकारियों के अनुसार अधिकतर जुगाड़ से ही काम किया गया था। रेल अधिकारियों के अनुसार, जिला प्रशासन की ओर से कोच में चिकित्सकीय टीम और ऑक्सीजन के साथ अन्य मेडिकल सुविधाएं दी गई थीं। जबकि रेलवे प्रशासन की ओर से कोच की साफ-सफाई और चादर, कंबल आदि की व्यवस्था कराई गई थी।
पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने कहा रेलवे द्वारा संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर जिला प्रशासन की देखरेख में आइसोलेशन कोच की व्यवस्था शुरू की गई थी, उपयोग नहीं होने पर उन्हें कोचिंग डिपो के पास खड़ा कराया गया है।
मरीजों के साथ डॉक्टर केबिन और स्टोर रूम की है व्यवस्था
एक कोच में आठ आइसोलेशन केबिन बनाए गए हैं। इनमें कुल 19 मरीजों को रखने की व्यवस्था है। इनमें एक डाक्टर केबिन और एक स्टोर रूम की व्यवस्था भी है। मरीजों के लिए तीन टॉयलेट और बाथरूम की भी व्यवस्था है। सभी केबिन में ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति के लिए होल्डर, मरीज को ड्रिप लगाने के लिए स्टैंड, वाटर बॉटल होल्डर और मच्छरदानी के साथ वॉश बेसिन की सुविधा दी गई है।
आइसोलेशन कोच का सबसे पहले मऊ रेलवे स्टेशन पर हुआ उपयोग
संक्रमण की पहली लहर जून 2020 में रेलवे प्रशासन की ओर से देश में पांच हजार आइसोलशन कोच तैयार किए गए थे। पूर्वोत्तर रेलवे के मऊ रेलवे स्टेशन और उसके बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कोविड मरीजों को भर्ती करने के काम में आया।
इसके बाद वाराणसी मंडल के किसी भी स्टेशन पर खड़े कोच में क्वारंटीन कोई नहीं हुआ। लंबे समय तक यह कोच स्टेशन पर खडे़ रहे और जब इसकी उपयोगिता नहीं समझ में आई तो रेलवे ने इन्हें वाशिंग लाइन और कोचिंग डिपो में खड़ा करा दिया।